'प्रयागराज' के नाम से जाना जाएगा इलाहाबाद, अकबर ने 444 साल पहले बदला था नाम
यूपी की योगी सरकार द्वारा संगम के शहर इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किये जाने के फैसले का तमाम लोग स्वागत करते हुए खुशी जता रहे हैं. सरकार के इस फैसले पर लोगों की लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

इलाहाबाद: अब इलाहाबाद को प्रयागराज के नाम से जाना जाएगा. यूपी कैबिनेट की बैठक में इस नए नाम पर मुहर लग गई है. पिछले कई दिनों से इस मामले को लेकर चर्चा चल रही थी. मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने इस बात की घोषणा की. सरकार कुम्भ मेले से पहले ही इलाहाबाद के नाम को बदलना चाहती थी. हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि संत लगातार इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयाग करने की मांग उठा रहे थे, सरकार जल्द ही इस पर फैसला करेगी.
कुंभ मार्गदर्शक मंडल की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था. बैठक की अध्यक्षता कर रहे राज्यपाल रामनाईक ने भी इस पर सहमति जताई. उन्होंने कहा कि जहां दो नदियों का मिलन होता है, उसे प्रयाग कहा जाता है. उत्तराखंड में देवप्रयाग, कर्णप्रयाग और विष्णुप्रयाग हैं. इलाहाबाद में भी देवभूमि से निकलने वाली दो पवित्र नदियां मिलती हैं इसलिए इसे प्रयागराज कहा जाता है.
यूपी की योगी सरकार द्वारा संगम के शहर इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किये जाने के फैसले का तमाम लोग स्वागत करते हुए खुशी जता रहे हैं. सरकार के इस फैसले पर लोगों की लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कहा- सरकार ने इलाहाबाद को उसका पुराना गौरव वापस दिलाया
साधू-संतों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने योगी सरकार द्वारा इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किये जाने के फैसले का स्वागत करते हुए सीएम योगी को इसके लिए बधाई दी है. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि का कहना है कि सीएम योगी और उनकी सरकार ने इलाहाबाद को उसका पुराना गौरव वापस दिलाया है. इलाहाबाद नाम अकबर की आक्रमणकारी पहचान का प्रतीक था, इसलिए नाम अब बदला नहीं गया है, बल्कि पुराना नाम फिर से रखा गया है. महंत नरेन्द्र गिरि ने नाम बदलने का विरोध करने को गलत बताया है.
इलाहाबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के हेड ने कहा- सरकार का यह फैसला स्वागत के लायक है इलाहाबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी के मध्यकालीन इतिहास विभाग के हेड डॉ. योगेश्वर तिवारी के मुताबिक़ इलाहाबाद का असली नाम प्रयाग ही था. मुग़ल बादशाह अकबर ने 444 साल पहले प्रयाग का नाम बदलकर अल्लाहाबास किया था. इसका मतलब अल्लाह का बसाया हुआ शहर, बाद में यह बिगड़े हुए स्वरुप में इलाहाबाद हो गया. प्रोफ़ेसर तिवारी के मुताबिक़ इलाहाबाद में सदियों से कुंभ और माघ का मेला लगता है, जिसमें देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते रहे हैं, इसीलिये अकबर ने संगम के ठीक किनारे किला बनवाया था और मुगलिया सल्तनत स्थापित होने का संदेश देने के लिए प्रयाग का नाम बदलकर अल्लाहाबास या इलाहाबाद कर दिया था.
प्रोफ़ेसर योगेश्वर तिवारी के मुताबिक़ पुराणों से लेकर वाल्मीकि रामायण, महाभारत और दूसरे तमाम धार्मिक ग्रंथों में प्रयाग स्थल का जिक्र है. इलाहाबाद का जिक्र अकबर से पहले कभी नहीं सुनने में आया. उनके मुताबिक़ सरकार का यह फैसला स्वागत के लायक है, क्योंकि इस शहर की पहचान प्रयाग और इसकी आध्यात्मिक संस्कृति से ही है.
इलाहाबाद की मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने भी शहर का नाम बदलकर फिर से प्रयागराज किये जाने के योगी सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ का शुक्रिया अदा किया है. उनका कहना है कि योगी सरकार ने इस शहर को उसका पुराना गौरव वापस दिलाया है, क्योंकि पुराणों व धार्मिक ग्रंथों में इसकी पहचान प्रयागराज नाम से ही है.उनके मुताबिक इस बारे में जो लोग विरोध कर रहे हैं या सरकार के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं, ऐसा वह सिर्फ सियासत के नजरिये से ही कर रहे हैं. मेयर अभिलाषा का दावा है कि प्रयागराज नाम होने से इस शहर को नई पहचान मिलेगी.
वहीं नामचीन साहित्यकार यश मालवीय ने इसे पूरी तरह सियासी फैसला करार देते हुए अपनी तीखी प्रतिक्रिया जताई है. कवि- गीतकार और फ़िल्मी लेखक यश मालवीय का कहना है कि बीजेपी की सरकार ने हिंदुत्व की भावना के सहारे लोकसभा चुनाव में कामयाबी पाने के मकसद से यह कदम उठाया है, जो कतई ठीक नहीं है, क्योंकि इस शहर को नये स्वरुप में अकबर ने बसाकर अपना नाम दिया था और यही नाम समूची दुनिया में इसे अलग पहचान दिलाता है. उनका कहना है कि इलाहाबाद सिर्फ नाम ही नहीं, बल्कि मजबूती के साथ अपनी बात रखने की संस्कृति की भी पहचान है, इसलिए इसका नाम बदलना कहीं से भी उचित नहीं है.























