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रामविलास पासवान: लोकसभा चुनाव जीतने का बनाया था विश्व रिकॉर्ड, बिहार से राष्ट्रीय राजनीति तक यूं तय किया सफर

राम विलास पासवान को जमीन से जुड़ा नेता माना गया है. यही नहीं, हर दल में उनके मित्र थे. सियासत के वो माहिर खिलाड़ी माने जाते थे. उन्होंने छह प्रधानमंत्रियों के सरकार में मंत्री पद संभाले.

नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का गुरुवार को निधन हो गया. वे काफी वक्त से बीमार चल रहे थे. रामविलास पासवान को जमीन से जुड़ा नेता माना गया है. खगड़िया के एक छोटे से इलाके शहरबन्नी से निकलकर शीर्ष सत्ता तक अपनी पहचान बनाने में उन्होंने लंबा संघर्ष किया. बिहार से लेकर राष्ट्रीय सियासत तक उन्होंने अपनी पहचान बनाई. राम विलास पासवान के नाम एक रिकॉर्ड भी है. उन्होंने दो बार लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक मतों से जीतने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है.

रामविलास पासवान देश के छह प्रधानमंत्रियों की कैबिनेट में मंत्री रहे. सियासत में उनकी पकड़ इस कदर थी कि कई बार उनकी मौजूदगी से सरकार बनती बिगड़ती थी. यही वजह रही कि वह राजनीति में हमेशा प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे. राजनीतिक कद उनका इतना बड़ा था कि यूपीए में शामिल करने के सोनिया गांधी उनके आवास पर मिलने खुद गई थीं.

हर दल से उनकी कैमिस्ट्री बहुत अच्छी थी. सभी दलों से उनके संबंध बेहद मधुर थे. पासवान छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुके थे. 1996 से 2015 तक केन्द्र में सरकार बनाने वाले सभी राष्ट्रीय गठबंधन चाहे यूपीए हो या एनडीए, का वह हिस्सा बने. कई सरकारों में वे अलग-अलग पदों पर रहें. इसी वजह से लालू प्रसाद ने उनको ‘मौसम विज्ञानी’ का नाम दिया था. रामविलास पासवान खुद भी स्वीकार कर चुके थे कि वह जहां रहते हैं सरकार उन्हीं की बनती है. उनके बारे में कहा जाता है कि राजनीतिक मौसम का पुर्वानुमान लगाने में वे माहिर थे. वे समाजवादी पृष्ठभूमि के बड़े नेताओं में से एक थे. देशभर में उनकी पहचान राष्ट्रीय नेता के रूप में रही. हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से वह कई बार चुनाव जीते, लेकिन दो बार उन्होंने सबसे अधिक वोट से जीतने का रिकॉर्ड बनाया.

बिहार की सत्ता में अपरिहार्य हो गये साल 2005 में वो मौका आया जब बिहार की सत्ता की चाबी रामविलास पासवान के हाथ में आ गई. उस समय उनकी पार्टी के 29 विधायक जीतकर आए थे. किसी दल को बहुमत नहीं होने के कारण सरकार नहीं बन रही थी. पासवान अगर उस समय नीतीश कुमार के साथ या लालू प्रसाद के साथ जाते तो प्रदेश में सरकार बन सकती थी. मगर उन्होंने शर्त रख दी कि जो पार्टी अल्पसंख्यक को मुख्यमंत्री बनाएगी उसी का साथ वह देंगे. उनकी इस शर्त पर कोई खरा नहीं उतरा और दोबारा चुनाव में जाना पड़ा. बाद में उसी साल नवंबर में हुए चुनाव में नीतीश कुमार के अगुवाई में एनडीए को बहुमत मिला और सरकार बनाई.

2009 में लोकसभा चुनाव हारे रामविलास पासवान 2004 के लोकसभा चुनाव जीते, पर 2009 में हार गए. 2009 में पासवान ने लालू प्रसाद की पार्टी राजद के साथ गठबंधन किया. पूर्व गठबंधन सहयोगी कांग्रेस को छोड़ दिया. इस तरह वे 33 वर्षों में पहली बार हाजीपुर से जनता दल के रामसुंदर दास से चुनाव हार गए. उनकी पार्टी लोजपा 15वीं लोकसभा में कोई भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी. साथ ही उनके गठबंधन के साथी और उनकी पार्टी भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई और 4 सीटों पर ही सिमट गई. उस समय लालू प्रसाद के सहयोग से वह राज्यसभा में पहुंच गये. बाद में हाजीपुर क्षेत्र से 2014 के चुनाव में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वह फिर से एनडीए में आ गए और संसद में पहुंचकर मंत्री बने. इस चुनाव में बेटे चिराग पासवान ने पहली बार सियासत के मैदान में कदम रखा और जमुई से पहली बार सांसद बने.

दलित सेना का गठन किया

वर्ष 1975 में जब भारत में आपातकाल की घोषणा की गई तो रामविलास पासवान को गिरफ्तार कर लिया गया. 1977 में रिहा होने पर वे जनता पार्टी के सदस्य बन गए और पहली बार इसके टिकट पर हाजीपुर से संसद पहुंचे और उन्होंने सबसे अधिक अंतर से चुनाव जीतने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया. वे 1980 और 1984 में हाजीपुर निर्वाचन क्षेत्र से 7वीं लोकसभा के लिए चुने गए. 1983 में उन्होंने दलित मुक्ति और कल्याण के लिए एक संगठन दलित सेना की स्थापना की. 1989 में लोकसभा के लिए फिर से चुने गए और उन्हें विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में केंद्रीय श्रम और कल्याण मंत्री बने. उसी समय मंडल आयोग की सिफारिशें लागू की गईं. 1996 में उन्होंने लोकसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन का भी नेतृत्व किया, क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा राज्यसभा के सदस्य थे. उसी साल वे पहली बार केंद्रीय रेल मंत्री बने. उन्होंने 1998 तक उस पद को संभाला. इसके बाद वे अक्टूबर 1999 से सितंबर 2001 तक केंद्रीय संचार मंत्री रहे, जब उन्हें कोयला मंत्रालय में स्थानांतरित किया गया और वे इस पद पर अप्रैल 2002 तक बने रहे. मगर इसी बीच 2000 में लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) बनाने के लिए वे जनता दल से अलग हो गए. 2004 के लोकसभा चुनावों के बाद पासवान यूपीए में शामिल हो गए और यूपीए सरकार में उन्हें रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री बनाया गया.

1969 में पहला चुनाव पहली बार वे 1969 में एक आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य के रूप में बिहार विधानसभा पहुंचे. 1974 में राज नारायण और जेपी के प्रबल समर्थक के रूप में लोकदल के महासचिव बने. वे व्यक्तिगत रूप से राज नारायण, कर्पूरी ठाकुर और सत्येंद्र नारायण सिन्हा जैसे आपातकाल के प्रमुख नेताओं के करीबी रहे.

जीवन परिचय रामविलास पासवान का जन्म 5 जुलाई 1946 में हुआ था. उनका पैतृक गांव खगड़िया जिले के अलौली स्थित शहरबन्नी गांव है. उनकी शादी 1960 में राजकुमारी देवी के साथ हुई थी. बाद में 1981 में उस पत्नी को तलाक देकर दूसरी शादी 1983 में रीना शर्मा से की. उनकी दोनों पत्नियों से तीन पुत्रियां और एक पुत्र है. उन्होंने कोसी कॉलेज खगड़िया और पटना यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की. पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने एमए और लॉ ग्रेजुएट की डिग्री ली. वह नॉनवेज पसंद करते थे. मछली उनकी पहली पसंद थी.

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