ईरान वॉर के बीच रुपये को मारा ‘लकवा’, राहुल बोले- PM ने देश के भविष्य को दांव पर लगाया
Indian Rupee Slip 95 mark first time: रुपया पहली बार 95 प्रति डॉलर के स्तर को पार करता हुआ, 95.21 प्रति डॉलर पर पहुंच गया है. दिनभर में 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच भारतीय रुपया में सोमवार को ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिली है. शुरुआती बढ़त मिलने के बावजूद रुपये में गिरावट इसलिए दर्ज की गई है, क्योंकि आर्थिक बुनियादी कारक इस करेंसी के पक्ष में नहीं थे. रुपया पहली बार 95 प्रति डॉलर के स्तर को पार करता हुआ, 95.21 प्रति डॉलर पर पहुंच गयाहै. दिनभर में 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.
इधर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कमजोर होते रुपए को लेकर सरकार पर सीधा निशाना साधा है. उन्होंने पीएम मोदी को देश के भविष्य दांव पर लगाने का आरोप लगाया है.
राहुल गांधी ने पोस्ट कर क्या कहा है?
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि रुपया 95 पर पहुंच गया है. यह 100 के आंकड़े की तरफ बढ़र हा है. शेयर बाजार धड़ाम हो चुका है. अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है. नौकरियां खत्म हो चुकी हैं. आमदनी घट रही है. बचत पूरी तरह साफ हो चुकी है. सिलेंडर गायब हो चुके हैं. क्यों,क्योकि प्रधानमंत्री समझौतावादी हैं. वह खुद को और अपनी आर्थिक व्यवस्था को बचाने के लिए बेताब हैं. लेकिन 140 करोड़ भारतीय जानते हैं, पीएम मोदी ने भारत का भविष्य दांव पर लगा दिया है.
रुपये में उतार-चढ़ाव की वजह क्या है?
सोमवार को रुपये में हुए उतार-चढ़ाव को लेकर रॉयटर्स ने एक रिपोर्ट साझा की है. इसमें बताया गया है कि शुक्रवार देर शाम आरबीआई ने बैंकों की ऑनशोर पोजिशन्स की नई सीमाएं लगाने के कदम ने बैंको को घरेलू बाजार में अपने डॉलर होल्डिंग्स को कम करने और साथ ही नॉन डिलीवरेबल फॉरवर्ड यानी एनडीएफ बाजार में पोजिशन्स बनाने के लिए मोटिवेट किया.
रॉयटर्स के मुताबिक, इस बड़े एक्सपोजर को देखते हुए, जिसका अनुमान 25 बिलियन डॉलर से 35 बिलियन डॉलर के बीच है, इस बदलाव ने ऑनशोर डॉलर/रुपया दर को एनडीएफ दर से काफी नीचे ला दिया. कंपनियों ने ऑनशोर बाजार में डॉलर खरीदकर और उन्हें एनडीएफ सेगमेंट में बेचकर इस आर्बिटेज के मौके का फायदा उटा. इससे रुपये की बढ़त सीमित हो गई. इस वजह से अलग-अललग बाजारों में कीमतों उतार-चढ़ाव देखने को मिला.
रिपोर्ट में कहा गया कि बड़ी कंपनियों की ओर से अपनी छोटे टाइम पिरियड की देनदारियों को हेज करने के लिए डॉलर की मजबूत मांग ने भी प्रेशर में डाला. इससे रुपया अपनी शुरुआती बढ़त गंवा बैठा. बाजार खुलने के साथ ही सोमवार को यह एक प्रतिशत उछलकर 93.60 के स्तर पर पहुंच गया. आरबीआई का ये फैसला ऐसे समय आया है, रुपये पर काफी प्रेशर है. इसके अलावा मिडिल ईस्ट में चल रही जंग से बने वैश्विक स्तर पर हालात ने भी रुपये की कीमतों पर असर डाला है.
























