रेजीम चेंज' की मांग पर आंदोलनकारियों में मतभेद, प्रशांत भूषण से असहमत योगेंद्र यादव
सीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने रेजीम चेंज करने की बात कही थी. इस बात पर योगेंद्र यादव ने असहमति जताई है.

कॉकरोच जनता पार्टी के मंच पर कई नेता नजर आ चुके हैं. सीजेपी का साथ दे रहे प्रशांत भूषण ने सीजेपी के मंच से रेजीम चेंज करने वाली बात कही थी. उनकी इस बात से पॉलिटिकल एक्टिविस्ट और स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव सहमत नहीं हैं. योगेंद्र यादव ने कहा है कि किसी आंदोलन के नेता को जनता से बस एक कदम आगे रहकर अगुआई करनी चाहिए साथ ही वो मांगें होनी चाहिए जिसकी आवाज जनता से आ रही हो.
प्रशांत भूषण, नेहा बोरा समेत कई लोग चाहते हैं कि सड़क पर आंदोलन के जरिए देश में सत्ता का परिवर्तन हो. मगर योगेंद्र यादव ऐसा नहीं चाहते बल्कि उनका फोकस आम जनता की आवाज पर है.
मेरी राय अलग है
योगेंद्र यादव ने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि नेताओं को वो मांगे नहीं उठानी चाहिए जो जनता की आवाज नहीं है. हम जैसे हार्डकोर पॉलिटिकल लोगों की राय से दुनिया में परिवर्तन होते तो दो साल पहले हो जाना चाहिए था, एक साल पहले हो जाना चाहिए था. क्योंकि सड़क पर चलने वाला हर आम इंसान हमारी राय से सहमत नहीं था. इस वजह से ही मैं पॉलिटिकल जजमेंट की बात कर रहा हूं.
मेरी ये राय है कि सड़क पर चलती महिला की ये राय है. मेरी राय अलग है. मेरी और एलसीएम की राय कॉमन प्वाइंट है और मैं अपनी बात को वहां तक सीमिच रखता हूं.
जनता नहीं कर रही ये मांग
योगेंद्र यादव ने कहा कि आने वाले समय में जनता रेजीम चेंज की मांग कर सकती है लेकिन आज ये मांग नहीं है. आज आम आदमी की सिर्फ यही मांग है कि देश में निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं. चुनाव में चाहे बीजेपी जीते या हारे, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता. प्राथमिकता केवल चुनाव की निष्पक्षता है. यदि यह आंदोलन अगले छह महीनों तक चलता है और निष्पक्ष चुनाव की जरा सी भी गुंजाइश नजर नहीं आती. यहां तक कि यूपी चुनाव के बाद भी आम आदमी यही महसूस करे कि हर संभव गुहार लगाने के बावजूद न तो निष्पक्ष चुनाव हो रहे हैं और न ही सुप्रीम कोर्ट से कोई मदद मिल रही है, तब हालात बदल जाएंगे. जब सड़क पर खड़े उस आम नागरिक को लगेगा कि उसके सारे रास्ते बंद हो चुके हैं, तो हमें कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह आंदोलन अपने आप ही तख्तापलट का रूप ले लेगा. हालांकि, मेरे आकलन के मुताबिक, आज देश में ऐसे हालात नहीं हैं.
प्रशांत भूषण ने कही थी ये बात
हाल ही में सीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत भूषण ने एसआईआर और देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन को रेजीम चेंज की लड़ाई बताया थआ इसके अलावा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन की प्रमुख नेहा बोरा ने भी बांग्लादेश के उस हिंसक जेन जी प्रोटेस्ट को रास्ता दिखाने वाला बताया है जिसके जरिए पड़ोसी मुल्क में तख्तापलट किया गया.
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