क्यों निर्भया के हत्यारों की फांसी के लाइव प्रसारण की हो रही है मांग?
सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार याचिका खारिज हो जाने के बाद दिल्ली की एक अदालत ने 2012 के गैंगरेप और हत्या के दोषी मुकेश, अक्षय पवन गुप्ता और विनय शर्मा के खिलाफ डेथ वारंट जारी कर दिया.

मुंबईः महाराष्ट्र के एक महिला संगठन 'भूमाता ब्रिगेड' ने मांग की है कि 22 जनवरी को तिहाड जेल नें निर्भाया के बलात्कारियों और हत्यारों को दी जाने वाली फांसीं टीवी पर लाइव दिखाई जाए. भूमाता ब्रिगेड वही संगठन है जिसने साल 2016 में महाराष्ट्र के शनि शिगणापुर मेदिर के चबूतरे पर महिलाओं को पूजा करने देने के लिये तीव्र आंदोलन छेडा था.
अपनी मांग के समर्थन में भूमाता ब्रिगेड की प्रमुख तृप्ति देसाई ने कहा, ''भारत में हर 15 मिनट में एक बलात्कार होता है. सालों से बलात्कार के मामलों में फांसीं की सजा पर अमल नहीं हुआ है 2 साल और 4 साल उम्र की बच्चियों पर भी बलात्कार हो रहा है. भारत की महिलाओं में असुरक्षा की भावना है. फांसीं की सजा लाइव दिखाने से एक तो न्यायिक व्यवस्था पर लोगों का विश्वास पुख्ता होगा और अपराधियों में खौफ पैदा होगा. ऐसा क्रूर कृत्य कोई दोबारा करने की नहीं सोचेगा.''
दोषियों के पास वचाव के विकल्प मौजूद
सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार याचिका खारिज हो जाने के बाद दिल्ली की एक अदालत ने 2012 के गैंगरेप और हत्या के दोषी मुकेश, अक्षय पवन गुप्ता और विनय शर्मा के खिलाफ डेथ वारंट जारी कर दिया. 22 जनवरी को सुबह 7 बजे तिहाड जेल में चारों की फांसीं का वक्त तय हुआ है.
चारों दोषियों के पास अभी भी अपने बचाव के लिये कई विकल्प मौजूद है. इस मामले से जुडा एक आरोपी राम सिंह पहले ही जेल में फांसीं लगाकर आत्महत्या कर चुका है.
सजा ए मौत के सार्वजनिक प्रदर्शन की प्रथा अरब देशों में प्रचलित है. इन देशों में जनता के बीच सरेआम दोषिययों को फांसी पर लटकाया जाता है ताकि लोगों के बीच अपराध के प्रति खौफ पैदा हो सके.
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