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जानिए क्यों बढ़ रहें हैं छेड़खानी के मामले और क्यों बुलंद हैं अपराधियों के हौसले, क्या है मनोचिकित्सकों की राय?

कहीं ना कहीं अपराधियों को यह पता रहता है कि किसी तरह से वो कठोर सज़ा से बच जाएंगे. उनकी मेंटालिटी इसलिए ऐसी होती है क्योंकि या तो वो खुद किसी ताकतवर ओहदे पर होतें हैं या फिर ताकतवर ओहदे वालों से जुड़े होतें हैं जो उनके मन में कहीं ना कहीं डर को समाप्त कर देता है.

नई दिल्ली: हाथरस एक बार फिर से सुर्खियों में है. हाथरस में एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई, मृतक ने अपनी बेटी के साथ छेड़खानी करने वाले के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई. इसी बात पर अपराधियों ने फायरिंग करके एक व्यक्ति की हत्या कर दी. मृतक ने 2018 में उसकी बेटी के साथ हुयी छेड़खानी के खिलाफ मुखदमा दर्ज करवाया था.

उत्तर प्रदेश में प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी अपराधियों के हौसले बुलंद हैं. जैसे उन्हें कानून का कोई डर ही ना हो. ऐसे लोगों के बारे में मनोचिकित्सक संदीप वोहरा कहतें हैं कि प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी अपराधियों के मन में कोई खौफ नहीं है. क्योंकि कहीं ना कहीं उन्हें ये पता रहता है कि किसी तरह से वो कठोर सज़ा से बच जाएंगे. उनकी मेंटालिटी इसलिए ऐसी होती है क्योंकि या तो वो खुद किसी ताकतवर ओहदे पर होतें हैं या फिर ताकतवर ओहदे वालों से जुड़े होतें हैं जो उनके मन में कहीं ना कहीं डर को समाप्त कर देता है.

दूसरी बात वो ये बतातें हैं कि अपराधी कहीं ना कहीं इस बात से निश्चिंत होतें हैं कि उन्हें साहयता मिलेगी जिससे वो बच जाएंगे. और अगर सज़ा मिलती भी है तो वो उतनी कठोर नहीं होगी. ऐसे में प्रशासन को ये सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे अपराधियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दे ताकि ये उन लोगों के लिए उदहारण हो जो अपने मन में इस तरह के जुर्म को पनपने देते हैं. जब सज़ा कठोर होगी तभी अपराधियों की गलत पृवत्ति को लगाम लगाया जा सकता है. चाहे कोई कितना भी पावरफुल हो उसे कठोर सज़ा मिलनी चाहिए जिससे कि ऐसे अपराधों पर लगाम लगाया जा सके.

आखिर क्यों करते हैं छेड़खानी इस पर मनोचिकित्सक ये बतातें हैं के ऐसे लोग महिलाओं को ऑब्जेक्ट समझते हैं और उनके मन में महिलाओं को ले कर इज्जत नहीं होती. जिसकी वजह ये भी हो सकती है कि बचपन से उन्होंने अपने पिता को अपनी मां की इज्जत करते ना देखा हो, या बतमीज़ी करते देखा हो. या फिर उन्हें जिस तरह का वातावरण मिला हो, उनके आस पास ऐसे धारणा के लोग रहतें हों जो महिलाओं की इज्जत नहीं करते.

जिसकी वजह से वो भी महिलाओं को देख कर उत्तेजित हो जातें हैं उन्हें एक महिला में ऑब्जेक्ट दिखता है. उन्हें यही लगता है कि जो वो कर रहें हैं वो सही है. ऐसे व्यक्तियों के मन में पौरुषता का मायने ही अलग होतें हैं वो खुद भी कम सेल्फ एस्टीम के लोग होतें हैं जिन्हे मौका चाहिए हो अपनी पौरुषता साबित करने का.

कैसे करें ऐसे लोगो की पहचान इस तरह के लोग जो महिलाओं के बारे में ग़लत विचार रखते हैं वो आपके घर में या आस पास भी हो सकतें हैं. वो जिस तरह के शब्दों का प्रयोग कर रहें हैं महिलाओं के लिए ये देखना ज़रूरी हो जाता है. अगर वो महिलाओं को ऑब्जेक्ट की तरह देख रहें हैं तो ये उनकी भाषा शैली दर्शाती है.

पहचान करने के बाद क्या करें ऐसे लोगों को मनोविज्ञानिक तरीके से विश्लेषण की आवश्यकता होती है.जब भी कोई ऐसा व्यक्ति सामने आए तो उसकी भाषा शैली उसके विचारों पर ध्यान देना होगा . अगर कोई घट प्रवती का व्यक्ति है तो उसे समय रहते मनोचिकित्सक के पास ले जा कर उसे सही से कौंसिलिंग करवाएं.

प्रशासन किस तरह के कदम उठाए सबके लिए बराबर सज़ा होनी चाहिए. सरकार को ये सुनिचित करना होगा. कई लोग पॉवर के इस्तेमाल से बच के बाहर निकल जाते हैं जिस वजह से उनके मन में डर खत्म हो जाता है. ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर सज़ा होनी चाहिए ताके कोई दूसरा उस जुर्म को अंजाम देने से पहले कई बार सोचे.

बच्चों पर दें खास ध्यान पिता को ये सुनिचित करना चाहिए के वो अपनी पत्नी की इज्जत करे महिलाओं की इज्जत करे. बच्चे पर ध्यान दें के कहीं वो किसी बुरी संगती में ना हो. अगर उसके मन में इस तरह के कोई विचार आएं तो उसे वक़्त रहतें कॉउंसलिंग की मदद से दूर करें.

इसे भी पढ़ेंः हाथरस में बेटी से छेड़छाड़ की शिकायत पर आरोपियों ने पिता को गोलियों से भूना, एक गिरफ्तार | पढ़ें पूरा मामला दिल्ली के राजीव गांधी अस्पताल में कैसी है कोरोना टीकाकरण के दूसरे चरण की तैयारी | ग्राउंड रिपोर्ट

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