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जम्मू और कश्मीर में 4 जी सेवा शुरू हुई, असली वजह जानते हैं आप? यहां जानें

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाए जाने के बाद इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी. वहीं सरकार द्वारा लोगों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए हाल ही में जम्मू और कश्मीर में 4 जी सेवा शुरू की गई है. लेकिन जहां 2 जी सेवाएं भी नहीं थी वहां अचानक 4 जी इंटनेट सेवा शुरू किए जानें के पीछे क्या राज है? चलिए जानते हैं

तुम आरोप लगाओ. मानवाधिकार हनन पर शोर मचाओ. राजनयिक चैनल से ये झूठा प्रचार संभव नहीं है. तो सोशल मीडिया के जरिये भारत पर दमनकारी होने का असत्य प्रचार करो. कुछ खरीदे हुए एजेंडाधारी, मनोरंजन की दुनिया के सितारे या फिर उदारवाद के चोले में बैठी हस्तियां जुटा ली जाएं. देशों के मुद्दों को छोड़कर भारत में किसान आंदोलन के समर्थन में उतरकर भारत की छवि किस तरह से ख़राब करने की कोशिश की गई, पिछले दिनों ये सभी ने देखा. इसका हॉलीवुड से लेकर देश के हर वर्ग ने मुंहतोड़ जवाब भी दिया और इस तरह की शक्तियों को आईना भी दिखा दिया. आभासी संसार की इस जंग में भी धारणाओं के इस खेल को समझते हुए वो तो एक राष्ट्र का प्रतिकार था.

जम्मू और कश्मीर में 4 जी सेवा शुरू क्यों की गई शुरू

इसी बीच शुक्रवार को देश के मुकुट से एक ऐसा फ़ैसला आया, जिसने मानवाधिकार के नाम पर इन तमाम एजेंडाधारियों के तरकश को ही ख़ाली कर दिया.  जी यह फ़ैसला आया देश के मुकुट जम्मू और कश्मीर को लेकर. ऐसे इलाक़े से जहां मानवाधिकार के मुद्दे पर पाकिस्तान समेत देश और दुनिया की तमाम शक्तियां भारत पर आरोप मढ़ती चली आ रही थी.

अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाने के बाद लगातार स्थिति सामान्य करने और लोगों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ते हुए सरकार ने वहां इंटरनेट की 4 जी सेवा को शुरू करने का फ़ैसला ले लिया.  जम्मू और कश्मीर में अभी तक 2 जी सेवायें ही थीं, उन्हें भी अक्सर सुरक्षा कारणों से बंद करना पड़ता था. डिजिटल और सूचना क्रांति के इस दौर में इंटरनेट सेवायें बाधित होना या उन्हें सीमित करना बड़ा मसला है. आंदोलनकारी किसानों के बीच भी इंटरनेट सेवा न होना ही दुनिया में मुद्दा बनने का सबब बना.

इंटरनेट न होने से युवा वर्ग में थी नाराजगी

ऐसे में जम्मू और कश्मीर में 4 जी की बहाली हर ऐसी वितंडवादी ताकत के मुंह पर करारा तमाचा तो है ही, लेकिन राज की बात इससे कहीं बड़ी और दूरदर्शी नीति से जुड़ी है. दरअसल नापाक पड़ोसी की लगातार घाटी में शांति में ख़लल डालने और घुसपैठ के मंसूबों पर सुरक्षा बलों ने पानी फेरा. इस कारण  कई इलाक़े आतंकवादी विहीन हो चुके हैं. मगर घुसपैठ की कोशिशें लगातार जारी हैं, ये भी सच है. इसीलिए सुरक्षा कारणों से इंटरनेट और मोबाइल सेवा में कुछ सीमाएं और कुछ बाधाएं लगातार रही हैं. युवा वर्ग इससे ज्यादा निराश था. उसमें केंद्र सरकार के प्रति नाराज़गी थी कि उसे दुनिया से काट कर क्यों रखा गया है.

व्यापारी भी इंटरनेट बहाली की कर रहे थे मांग

इतना ही नहीं यहां स्थानीय निकाय चुनाव के बाद से ही लगातार मांग उठ रही थी 4 जी सेवाओं को लेकर व्यापार भी परवान चढ़ रहा है, लेकिन व्यापारी वर्ग को इंटरनेट में सीमाएं उनकी असीमित व्यापार की संभावनाओं को कम कर रही थीं. उनकी तरफ़ से भी यही मांग थी. लेकिन सुरक्षा और शांति बहाली केंद्र और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की प्राथमिकता में सबसे ऊपर थी.  इसीलिए पिछले दिनों मनोज सिन्हा जब दिल्ली आए और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की तो यही मुद्दा सर्वोच्च प्राथमिकता में उठाया गया था.

4 जी सेवा शुरू करने के पीछे ये है राज

सबसे बड़ी राज की बात यहीं छिपी है कि 4 जी सेवायें शुरू करने का फ़ैसला जितना विश्वास बहाली की दिशा में बड़ा कदम है, उससे कहीं ज्यादा सुरक्षा के लिहाज़ से भी अब इसमें फ़ायदा दिख रहा है. राज की बात ये है कि सेना और सुरक्षा बलों ने गहन मंथन किया तो पाया कि अब उनकी तैयारी इस लायक़ है कि यहां 4 जी सेवा शुरू हो. इससे सुरक्षा और शांति में भी मदद मिलेगी, जबकि पहले इसका उल्टा था.

मोबाइल मानीटरिंग सिस्टम हो चुका है मजबूत

राज की बात ये भी कि जम्मू और कश्मीर में मोबाइल मानीटरिंग सिस्टम काफ़ी मज़बूत हो चुका है. ऐसे में आम लोगों को इस सुविधा से वंचित रखता उचित नहीं. दूसरी बात ये कि आतंकवादी जब भी किसी ऑपरेशन को अंजाम देते हैं तो उसका वीडियो बनाकर  तस्दीक़ के लिए अपने आका को भेजते हैं. इस सेवा के शुरू होने के बाद जाहिर तौर पर ये तत्व भी इसका उपयोग करेंगे और डेटा ट्रांसफ़र होगा. सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसे ट्रैक करना ज्यादा आसान होगा.

घटनाओं को रोकने में मिलेगी मदद

अभी बड़े आपरेशन में आतंकवादी सेटेलाइट फ़ोन का इस्तेमाल करते हैं. ४ जी शुरू होने के बाद इसके उपयोग और मोह से बच पाना किसी के लिए आसान नहीं है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इसे ट्रैक कर और तेज़ी से घटनाओं को रोकने और आतंकियों को क़ाबू पाने में आसानी भी हो सकती है. इसके अलावा विश्वास बहाली की दिशा में बढ़ाया गया यह कदम युवाओं को ऐसी कोई भी अप्रिय चीज दिखने पर सुरक्षा बलों को तेज़ी के साथ सूचना साझा करने में भी मदद करेगा.

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