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Xप्लेन: UCC का किस राज्य में क्या हाल? उत्तराखंड से गुजरात तक जानिए पूरी स्थिति

मौजूदा समय में बात करें तो उत्तराखंड में UCC लागू कर दिया गया है. ऐसे करने वाला वो देश का पहला राज्य बन चुका है. वहीं गोवा में पहले से एक समान सिविल कानून लागू है.

देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) को लेकर हर जगह चर्चा हो रही है. कुछ राज्य इसे लागू कर चुके हैं तो कुछ लागू करने के मुहाने पर हैं. हर राज्य सरकार इसके फायदे गिनवा रही है. संविधान के नीति निदेशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) के अनुच्छेद 44 में राज्य के लिए सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने की बात कही गई है. अब देखना दिलचस्प होगा कि देश के क्या सभी राज्यों में स्वतंत्रता के 79 साल से अधिक समय बाद एक समान नागरिक कानून लागू नहीं हो सकता है.

मौजूदा समय में बात करें तो उत्तराखंड में UCC लागू कर दिया गया है. ऐसे करने वाला वो देश का पहला राज्य बन चुका है. वहीं गोवा में पहले से एक समान सिविल कानून लागू है. कुछ राज्य UCC से जुड़े विधेयक पारित कर चुके हैं जैसे - गुजरात और मध्य प्रदेश. राजस्थान भी कानून लाने की तैयारी में है, जबकि पश्चिम बंगाल में अभी इस पर राजनीतिक बहस जारी है.


Xप्लेन: UCC का किस राज्य में क्या हाल? उत्तराखंड से गुजरात तक जानिए पूरी स्थिति

ऐसे में किस राज्य में UCC किस चरण में है और उनके कानूनों या प्रस्तावों में क्या अंतर है. आइए विस्तार से समझते हैं.

1. उत्तराखंड: UCC लागू करने वाला पहला राज्य

जैसा कि ऊपर बता चुके हैं कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू हो गया है.  उत्तराखंड 27 जनवरी 2025 को समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया. राज्य सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति और पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है.

हालांकि, संविधान के प्रावधानों के अनुसार अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है. 

उत्तराखंड में क्या खास है इस कानून में

यहां के प्रावधानों में कहा गया है कि सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य होगा. लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण का प्रावधान  किया गया है. विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए समान नियम तय किए गए हैं. बहुविवाह (Polygamy) पर रोक की बात कही गई है. विभिन्न धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों (Personal Laws) की जगह एक समान नागरिक व्यवस्था लागू होने की बात कही गई है. उत्तराखंड सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को अधिक सुरक्षा मिलेगी तथा पारिवारिक विवादों में समान कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी.

2. गोवा: भारत का सबसे पुराना कॉमन सिविल कोड

गोवा में भारत का सबसे पुराना कॉमन सिविल कोड लागू है.  यहां पुर्तगाली शासन के दौरान लागू Portuguese Civil Code, 1867 आज भी संशोधित रूप में लागू है. इसी वजह से गोवा को भारत में समान नागरिक कानून का सबसे पुराना उदाहरण माना जाता है.


Xप्लेन: UCC का किस राज्य में क्या हाल? उत्तराखंड से गुजरात तक जानिए पूरी स्थिति

आइए जानते हैं यहां क्या है खास

गोवा के कॉमन सिविल कोड में कहा गया है कि अधिकांश नागरिकों के लिए समान सिविल कानून होगा. विवाह और संपत्ति के नियम काफी हद तक समान हैं. पति-पत्नी की संयुक्त संपत्ति (Community Property) की व्यवस्था की बात कही गई है. कुछ धार्मिक समुदायों को विशेष परिस्थितियों में छूट भी है.  गोवा मॉडल को अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर UCC की बहस में उदाहरण के तौर पर पेश किया जाता है.

3. गुजरात: कानून पारित, लागू होना बाकी

गुजरात विधानसभा UCC विधेयक को मंजूरी दे चुकी है. हालांकि कानून अभी लागू नहीं हुआ है. सरकार फिलहाल इसके लिए आवश्यक नियम (Rules), प्रशासनिक ढांचा और डिजिटल व्यवस्था तैयार कर रही है. राज्य सरकार का कहना है कि कानून लागू करने से पहले सभी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित किया जाएगा ताकि नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो.

गुजरात में क्या खास है?

गुजरात में भी उत्तराखंड मॉडल से कई प्रावधान अपनाए गए हैं. विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए समान नियम प्रस्तावित हैं. कानून लागू होने से पहले विस्तृत नियम बनाए जाएंगे. ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था विकसित की जा रही है.


4. मध्य प्रदेश: विधानसभा से पारित, लेकिन अभी लागू नहीं

मध्य प्रदेश ने भी UCC लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है. विधानसभा से संबंधित विधेयक पारित हो चुका है, लेकिन इसे लागू होने से पहले राज्यपाल की मंजूरी और अन्य संवैधानिक प्रक्रियाओं से गुजरना होगा.
सरकार का साफ कहना है कि एक बार UCC लागू हो गया तो फिर व्यक्तिगत कानून की जगह समान नागरिक संहिता होगी.

क्या खास है?

मध्य प्रदेश के कानून में विवाह और तलाक के लिए समान कानूनी व्यवस्था, उत्तराधिकार और संपत्ति विवादों के लिए समान नियम हैं. प्रशासनिक नियम बनने के बाद लागू किया जाएगा. कानून अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद नागरिकों पर प्रभावी होगा.

5. राजस्थान: ड्राफ्ट तैयार, कानून की तैयारी

राजस्थान सरकार भी UCC लागू करने की दिशा में काम कर रही है. सरकार ने प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और विधानसभा में विधेयक लाने की तैयारी कर रही है. हालांकि फिलहाल यह कानून लागू नहीं हुआ है और अभी विधायी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है.

ड्राफ्ट की प्रमुख बातें

सभी विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य, विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए समान नियम, लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी कानूनी प्रावधानों पर विचार होगा. पारिवारिक विवादों के लिए समान कानूनी प्रक्रिया का प्रस्ताव है. 
सरकार का कहना है कि अंतिम कानून बनने से पहले विभिन्न पक्षों से सुझाव भी लिए जाएंगे.

6. पश्चिम बंगाल: फिलहाल केवल राजनीतिक चर्चा

पश्चिम बंगाल में इसे लेकर काफी माहौल गर्म है. सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं. हालांकि अभी तक  UCC से संबंधित कोई विधेयक विधानसभा में पेश नहीं किया गया है. राज्य सरकार ने इसे लागू करने की दिशा में कोई औपचारिक कदम भी नहीं उठाया है. इस समय राज्य में कोई विधायी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है.

एक नजर में सभी राज्यों में समान नागरिक संहिता कानून की समीक्षा

राज्य वर्तमान स्थिति प्रमुख विशेषता
-उत्तराखंड- लागू UCC लागू करने वाला पहला राज्य
-गोवा-पहले से लागू पुर्तगाली सिविल कोड पर आधारित समान सिविल व्यवस्था
-गुजरात-विधेयक पारित नियम बनने के बाद लागू होगा
-मध्य प्रदेश-विधेयक पारित राज्यपाल की मंजूरी और नियमों का इंतजार
-राजस्थान- ड्राफ्ट तैयार विधानसभा में बिल लाने की तैयारी
-पश्चिम बंगाल- राजनीतिक चर्चा अभी कोई विधेयक पेश नहीं हुआ

सबसे बड़ा अंतर क्या है?

इन अलग-अलग राज्यों की स्थिति से पता चलता है कि  देश में UCC को लेकर अलग-अलग राज्यों की स्थिति अलग-अलग चरणों में है. कहीं यह पूरी तरह लागू हो चुका है, कहीं कानून बनने की प्रक्रिया जारी है और कहीं अभी केवल राजनीतिक विमर्श चल रहा है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य राज्य भी उत्तराखंड की राह पर चलते हैं या अपनी अलग कानूनी व्यवस्था बनाए रखते हैं.

संकल्प ठाकुर पिछले 10 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत न्यूज़ 24 से की, इसके बाद न्यूज़ नेशन में कार्य किया. वर्तमान में वह एबीपी हिंदी डिजिटल में डिप्टी प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं और पिछले सात वर्षों से संस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें खेल, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और चुनावी राजनीति से जुड़ी खबरों की गहरी समझ है. इसके अलावा साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता का क्षेत्र है. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है.

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