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ABP ग्राउंड रिपोर्ट: दक्षिण दिनाजपुर में बंद पड़ी लाइब्रेरी बनी चुनावी मुद्दा, शिक्षा संकट पर किसे मिलेगा जनता का साथ?

West Bengal Assembly Elections 2026: दक्षिण दिनाजपुर में शिक्षा का बुनियादी ढांचा धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और स्थानीय लोग इसे सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि भविष्य के साथ खिलवाड़ मान रहे हैं.

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  • शिक्षा, रोजगार की कमी से लोग नाराज, पर दिशा अस्पष्ट.

West Bengal Assembly Polls 2026: पहले दौर का चुनावी शोर शांत हो चुका है और अब 23 तारीख को पहले चरण का मतदान होना है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की हलचल के बीच, सीमावर्ती जिला दक्षिण दिनाजपुर एक अलग तरह की बेचैनी से गुजर रहा है. यहां चुनावी शोर के पीछे एक खामोश संकट गहराता दिख रहा है, पुरानी और पारंपरिक लाइब्रेरी का बंद होना. शिक्षा का यह बुनियादी ढांचा धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और स्थानीय लोग इसे सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि भविष्य के साथ खिलवाड़ मान रहे हैं.

बालुरघाट से लेकर हिली तक का रास्ता इस संकट की गवाही देता है. सड़क किनारे खड़ी कई सरकारी लाइब्रेरी अब बंद दरवाजों और जंग लगे ताले के पीछे कैद हैं. कभी जहां छात्र-छात्राएं किताबों में डूबे रहते थे, वहां अब सन्नाटा पसरा है. एक स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं, ‘यह लाइब्रेरी सालभर बंद रहती है. पहले हम यहीं से किताबें लेकर पढ़ाई करते थे.’ वहीं एक युवा छात्र कहता है, ‘मुझे तो पता ही नहीं था कि यह लाइब्रेरी है.’

यह सिर्फ एक या दो जगह की कहानी नहीं है. जिले भर में फैली करीब 57 लाइब्रेरी में से अधिकांश या तो बंद हैं या बेहद खराब हालत में चल रही हैं. स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सूरज दास बताते हैं, ‘पिछले 10-15 साल से लाइब्रेरी बंद होने का डर था. अब हालात ये हैं कि करीब 90 प्रतिशत लाइब्रेरी में स्टाफ की भारी कमी है. कई जगह अस्थायी कर्मचारी ही काम संभाल रहे हैं.’

शिक्षा से जुड़ा गहरा संकट

स्थानीय शिक्षित वर्ग का मानना है कि यह सिर्फ इमारतों का जर्जर होना नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक गिरावट की शुरुआत है. ये लाइब्रेरी कभी सिर्फ किताबों का केंद्र नहीं थीं, ये संवाद, विचार और समाज के निर्माण की जगह थीं. अब उनका खत्म होना एक पूरी पीढ़ी के बौद्धिक विकास पर असर डाल सकता है. दक्षिण दिनाजपुर जैसे सीमावर्ती जिले में, जहां संसाधनों की पहले ही कमी है, वहां लाइब्रेरी का महत्व और बढ़ जाता है, लेकिन मौजूदा हालात में यह बुनियादी संरचना ही दम तोड़ती नजर आ रही है.

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चुनावी मैदान: सीधी टक्कर, कई परतें

राजनीतिक रूप से यह जिला इस बार बेहद दिलचस्प मुकाबले का गवाह है. मुख्य लड़ाई तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच मानी जा रही है, लेकिन कांग्रेस और वाम दल भी अपने खोए आधार को वापस पाने की कोशिश में हैं.

2021 के विधानसभा चुनाव में कुल 6 सीटों में से 3 सीटें टीएमसी और 3 सीटें बीजेपी के खाते में गई थीं. टीएमसी ने कुशमंडी, कुमारगंज और हरिरामपुर जीती थीं, जबकि बीजेपी ने बालुरघाट, तपन और गंगारामपुर पर कब्जा किया था. 2024 के चुनावों में भी दोनों दल अपने-अपने गढ़ को बचाने में सफल रहे, लेकिन इस बार समीकरण बदलते दिख रहे हैं.

भाजपा का हमला: ‘पूरी तरह विफल सरकार’

जिले के भाजपा अध्यक्ष सुरजीत चौधरी का सरकार पर आरोप है कि स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है, हाईवे प्रोजेक्ट जमीन अधिग्रहण की वजह से अटका पड़ा है और शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है. दक्षिण दिनाजपुर में तृणमूल पूरी तरह विफल रही है. लाइब्रेरी की हालत खुद बता रही है कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं. बीजेपी का दावा है कि वह 2021 और 2024 के मुकाबले इस बार बेहतर प्रदर्शन करेगी और जिले में अपनी पकड़ मजबूत करेगी.

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तृणमूल का जवाब: ‘राजनीतिक एजेंडा’

टीएमसी इस मुद्दे को स्वीकार तो करती है, लेकिन इसे चुनावी हथियार के रूप में पेश किए जाने का विरोध करती है. बालुरघाट से उम्मीदवार अर्पिता घोष मानती हैं कि लोगों में नाराजगी है, लेकिन इसे दूर करने के लिए भविष्य में कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा, ‘भाजपा जब से बंगाल में दूसरे स्थान पर आई है, वह यहां की परंपराओं को बदलने की कोशिश कर रही है. यह खतरनाक है. बालुरघाट की अपनी एक पहचान थी, जो अब बदल रही है.’

अर्पिता घोष का दावा है कि जातीय विभाजन और बाहरी हस्तक्षेप जैसे सामाजिक मुद्दों को लेकर जनता में असंतोष है, जो भाजपा के खिलाफ जा सकता है.

जमीनी सच्चाई: नाराजगी है, लेकिन दिशा अस्पष्ट

ग्राउंड पर बात करने पर साफ होता है कि लोगों में नाराजगी खासतौर पर शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे को लेकर है, लेकिन यह नाराजगी किस राजनीतिक दिशा में जाएगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है. एक कॉलेज छात्र कहता है, ‘हमें लाइब्रेरी चाहिए, नौकरी चाहिए. नेता आते हैं, वादे करते हैं, लेकिन कुछ बदलता नहीं.’ एक स्थानीय व्यापारी का कहना है, ‘यहां निवेश नहीं आ रहा. युवा बाहर जा रहे हैं. चुनाव में हम उसी को वोट देंगे जो कुछ ठोस करेगा.’

दक्षिण दिनाजपुर का बड़ा सवाल

दक्षिण दिनाजपुर में इस बार चुनाव सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं है. यह विकास मॉडल, शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक ढांचे की दिशा तय करने वाला चुनाव बनता जा रहा है. पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले में कुल छह विधानसभा क्षेत्र हैं और ये सभी बालुरघाट लोकसभा में आते हैं. इनमें कुशमंडी (एससी), कुमारगंज, बालुरघाट, तपन (एसटी), गंगारामपुर (एससी) और हरिरामपुर शामिल हैं. ये सभी विधानसभा क्षेत्र आगामी 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अहम माने जा रहे हैं.

(रिपोर्टः दीपक घोष)

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