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वक्फ संशोधन विधेयक में क्या है सेक्शन 40, जिसे खत्म करने का लोकसभा में केंद्रीय मंत्री ने कर दिया ऐलान

वक्फ एक्ट का सेक्शन 40 वक्फ संपत्तियों के फैसले का अधिकार वक्फ बोर्ड को देता था, लेकिन अब इसे हटाने का प्रस्ताव किया गया है, जिससे बोर्ड की स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं.

2 अप्रैल को लोकसभा में पेश किए गए 'वक्फ संशोधन बिल 2024'  में सबसे बड़ा बदलाव है सेक्शन 40 को खत्म करना. ये सेक्शन ही इस बोर्ड को किसी भी भूमि को वक्फ संपत्ति में बदलने की अनुमति देता था. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को संसद में एक बहस के दौरान इसे वक्फ अधिनियम का सबसे कठोर प्रावधान बताया है.

रिजिजू ने चर्चा के दौरान कहा कि, 'अधिनियम में सबसे कठोर प्रावधान सेक्शव 40 है,  जिसके तहत वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर सकता था, लेकिन संशोधन के तहत हमने उस प्रावधान को हटा दिया है." 

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये सेक्शन 40 है क्या और इसे हटाने के क्या बदलाव आएगा 

वक्फ एक्ट का सेक्शन 40 

वक्फ एक्ट का सेक्शन 40 वक्फ संपत्तियों के बारे में फैसला करने से जुड़ा हुआ है. इसका मतलब है कि अगर किसी संपत्ति के बारे में यह सवाल उठता है कि वह वक्फ संपत्ति है या नहीं, तो वक्फ बोर्ड इस सवाल का फैसला कर सकता है.

इस सेक्शन के तहत, अगर वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति मानता है, तो उसका यह फैसला अंतिम होता है. इसका मतलब है कि सरकार या कोई और संस्था इस फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है. अगर किसी को बोर्ड के फैसले से आपत्ति होती, तो वह वक्फ ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता है. 

यह सेक्शन वक्फ बोर्ड को एक तरह से स्वतंत्रता देता था कि वह बिना किसी बाहरी दबाव के यह तय कर सके कि कोई संपत्ति वक्फ संपत्ति है या नहीं. साथ ही, अगर कोई अन्य ट्रस्ट या सोसाइटी की संपत्ति को वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकरण कराने की आवश्यकता होती, तो बोर्ड उसे ऐसा करने का निर्देश दे सकता था.

अब, वक्फ संशोधन बिल में इस सेक्शन को हटाने का प्रस्ताव है, जिससे वक्फ बोर्ड की ताकत और स्वतंत्रता पर सवाल उठने लगे हैं.

सरकारी हस्तक्षेप नहीं

सेक्शन 40 के तहत, बोर्ड के फैसले पर सरकार या किसी अन्य सरकारी संस्था का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता था. इसका मतलब है कि वक्फ संपत्तियों के मामलों में बोर्ड का फैसला ही सर्वोपरि होता है. 

इस सेक्शन के तहत अगर कोई संपत्ति किसी अन्य ट्रस्ट या सोसाइटी के तहत पंजीकृत होती, लेकिन वक्फ बोर्ड को लगता कि वह संपत्ति वक्फ संपत्ति हो सकती है, तो बोर्ड उसकी जांच कर सकता था. अगर बोर्ड ने यह फैसला लिया कि वह संपत्ति वक्फ संपत्ति है, तो उस ट्रस्ट या सोसाइटी को उसे वक्फ एक्ट के तहत पंजीकरण करने के लिए कहा जाता था.

सेक्शन 40 को क्या हटाना चाहती है

वक्फ (संशोधन) बिल 2025 में इस सेक्शन को हटा दिया गया है. इस बदलाव को लेकर केंद्रीय मंत्री ने संसद में ऐलान किया कि सेक्शन 40 को अब लागू नहीं किया जाएगा.

इस बदलाव के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कालन बैनर्जी ने संसद में कहा कि अगर सेक्शन 40 को हटा दिया गया, तो वक्फ बोर्ड महज एक 'गुड़िया' बनकर रह जाएगा, जिसकी कोई ताकत नहीं होगी. उनका कहना था कि अगर इस सेक्शन को हटा दिया जाता है, तो वक्फ बोर्ड को बनाए रखने का कोई मतलब नहीं है और इसकी शक्तियां सीधे तौर पर मंत्री को दे दी जानी चाहिए.

केंद्र सरकार का तर्क

केंद्र सरकार का कहना है कि इस बदलाव से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता आएगी. उनका मानना है कि अब वक्फ संपत्तियों के मामलों में कोई भ्रम नहीं होगा और यह प्रक्रिया ज्यादा सरल और सुचारू होगी,

क्या होगा इसका असर

विपक्ष का कहना है कि इस बदलाव से वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी और सरकार को वक्फ संपत्तियों के मामलों में ज्यादा नियंत्रण मिलेगा. वहीं, सरकार का कहना है कि यह बदलाव वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को और बेहतर बनाएगा. अब यह देखना होगा कि इस बिल को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और इसका वक्फ बोर्ड पर क्या प्रभाव पड़ेगा. 

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