अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 'हिन्दू छात्रों' के जबरन रोजे की चौंकाने वाली सच्चाई

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर हर रोज कई फोटो, मैसेज और वीडियो वायरल होते हैं. इन वायरल फोटो, मैसेज और वीडियो के जरिए कई चौंकाने वाले दावे भी किए जाते हैं. ऐसा ही एक मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसके एक चौंकाने वाला दावा भी किया जा रहा है.
क्या है वायरल मैसेज में ? सोशल मीडिया पर दावा है कि उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले गैरमुस्लिम छात्रों को रमजान में कैंटीन में खाना नहीं मिल रहा. मैसेज में लिखा है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रमजान की वजह से हिंदू छात्रों को सुबह का नाश्ता और दोपहर का लंच नहीं दिया जा रहा है. दावे के मुताबिक रमजाने के महीने में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों को रात में 3 बजे ही सुबह का नाश्ता दे दिया जाता है उसके बाद रात तक खाने के लिए कुछ नहीं मिलता.
क्या है वायरल मैसेज का सच ? तेजी से वायरल हो रहे दावे की पड़ताल के लिए एबीपी न्यूज़ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के हॉस्टल सर सैयद हॉल पहुंचा. जो कैंटीन बाकी दिनों में लंच के वक्त खचाखच भरी रहती है वहां सन्नाटा पसरा हुआ था. खाली कुर्सी और मेज इस सन्नाटे की गवाही दे रही थीं. पूरे हॉल में एक भी छात्र नहीं था लेकिन तस्वीरें देखकर भी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता था.
इसलिए हमने सबूत के साथ गवाह की भी तलाश की और गवाह के तौर पर हमें डाइनिंग हॉल के इंचार्ज शमसुद्दीन मिले. डाइनिंग हॉल के इंचार्ज शमसुद्दीन ने हमें बताया कि आम दिनों में सुबह 7 बजे से 9 बजे तक नाश्ता और दोपहर 12 बजे से दोपहर 2.30 तक लंच होता है लेकिन रमजान के महीने में छात्रों को सिर्फ सुबह की सहरी और डिनर दिया जाता है.
इसके बाद एबीपी न्यूज़ ने यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले गैरमुस्लिम छात्रों से बात करने की कोशिश की. यहां पढ़ने वाले एक छात्र राजेश्वर ने बताया, ''सुबह का नाश्ता और दोपहर का खाना यहां नहीं मिलता, आस पास के होटलों में खाना पड़ता है. सुबह तीन बजे उठ कर संभव नहीं है कि नास्ता किया जाए. जो छात्र रोजा नहीं रखते उनके लिए ये समस्या है.''
यूनिवर्सिटी ने इस बारे में क्यों कुछ नहीं सोचा? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हम अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जन संपर्क विभाग पहुंचे. हमने यूनिवर्सिटी के PRO ओमर पीरजादा से बात करने की कोशिश की तो पहले AMU के PRO समेत दूसरे अधिकारी बयान देने से बचते रहे. लेकिन कुछ वक्त बाद AMU के वाइस चांसलर से विचार विमर्श के बाद PRO ओमर पीरजादा बात करने को राजी हुए.
पीरजादा ने बताया, ''AMU में जो छात्र रोजे नहीं रखते थे वो पहले आपसी सहमति से एक दुसरे से साथ रहते थे. लेकिन इस बार चूँकि छात्रों ने डिमांड की कि हॉस्टल में लंच इत्यादि की सुविधा होनी चाहिए. इस पर प्रशासन ने निर्णय लिया है कि छात्रों को ऑन डिमांड हॉस्टल में ब्रेकफास्ट और लंच की सुविधा मिलेगी.''
एबीपी न्यूज सोशल मीडिया पर वायरल दावे की पड़ताल के लिए यूनिवर्सिटी पहुंचा और वायरल मैसेज के मुताबिक सवाल पूछा गया कि क्या गैर मुस्लिम छात्रों को खाना और नास्ता नहीं मिल रहा है तो एएमयू प्रशासन में भगदड़ मच गयी. आनन-फानन में रमजान के दिनों में हॉस्टल में सुबह और दोपहर को खाने की व्यवस्था का एलान कर दिया.
एबीपी न्यूज़ की टीम यूनिवर्सिटी में पड़ताल के लिए 1 बजे पहुंची और यूनिवर्सिटी की तरफ से दोपहर 2 बजक 7 मिनट पर नया आदेश जारी किया गया. एबीपी न्यूज़ के पास इस मेल की कॉपी है.
मेल में लिखा है, ''अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ये फैसला किया है कि गर्मी की छुट्टियां शुरू होने तक विश्वविद्यालय के छात्रावासों में मांगने पर दोपहर का खाना उपलब्ध करवाया जाएगा.छुट्टियां पांच जून से शुरू होंगीं.''
इस ईमेल के बाद ये साफ हो गया है कि- रमजान में रोजा न रखने वालों को छात्रावास में खाना न मिलने का दावा सच्चा है.
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