समय और पैसा बचाने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जुड़ेंगे जेल!

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर गृह मंत्रालय ने आज एक बड़ा फैसला लिया है. गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को एक खास निर्देश जारी किया है. इस फैसले के तहत सभी जेलों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जोड़ने के लिए कहा गया है. यह फैसला कैदियों की पेशी में होने वाली समय की बर्बादी और उसके चलते पैसों की फिजूल खर्ची को देखते हुए लिया गया है.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जेलों को कोर्ट से जोड़ों: केन्द्र सरकार
केन्द्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जेलों को अदालतों से जोड़े ताकि मामले की सुनवाई तेज हो सके और विचाराधीन बंदियों को अदालत लाने-ले जाने का खर्च बचे. गृह मंत्रालय ने राज्यों को भेजे गए परामर्श में यह भी कहा है कि जेल की ई-प्रणाली को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्किंग सिस्टम (सीसीटीएनएस) और ई-कोर्ट्स के साथ प्राथमिकता के आधार पर जोड़े.
समय समय पर होनी चाहिए ज्वॉइंट ट्रेनिंग
परामर्श में कहा गया है, ‘‘तेज गति से सुनवाई और विचाराधीन बंदियों को अदालत लाने और ले जाने के खर्च घटाने के लिए जेलों को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जोड़ा जाना चाहिए.’’ परामर्श में यह भी कहा गया है कि विचाराधीन बंदियों के प्रबंधन के लिए जेल, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और न्यायपालिका की ज्वॉइंट ट्रेनिंग समय समय पर आयोजित किया जाना चाहिए. बंदियों को उग्र विचारधारा से मुक्त कराने के लिए अलग से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाना चाहिए.
'हर स्तर के रिक्त पदों को तेजी से भरा जाए'
गृह मंत्रालय ने राज्यों को सलाह दी है कि कारा विभागों में हर स्तर के रिक्त पदों को तेजी से भरा जाए. यह परामर्श कारा सुधार पर राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के कारा प्रमुखों के एक राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद जारी किया गया है. राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की सरकारों को यह भी कहा गया है कि वे प्रभावी कारा प्रशासन प्रणाली पर लक्षित कुछ सलाहों को कार्यान्वित करने पर विचार करें.
Source: IOCL























