'हिम्मत रखो, आओ लौट चलें', H-1B वीजा शुल्क बढ़ने पर बोलीं Edelweiss CEO राधिका गुप्ता
अमेरिका की ओर से H-1B वीजा शुल्क में बढ़ोतरी को लेकर Edelweiss AML की प्रबंध निदेशक और सीईओ राधिका गुप्ता ने कहा कि अब उन्हें मौका मिले, फिर भी वह अमेरिका नहीं जाना चाहेंगी.

अमेरिका की ओर बढ़ाए गए H-1B वीजा शुल्क को लेकर Edelweiss AML की प्रबंध निदेशक और सीईओ राधिका गुप्ता ने कहा कि वह अब अमेरिका वापस जाना नहीं चाहेंगी. उन्होंने अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के बारे में बात की और अपने अनुभव साझा किए.
राधिका गुप्ता ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में लिखा, 'मैं भाग्यशाली थी कि मुझे 2005 में स्नातक की उपाधि मिली, जब अमेरिका में H-1B मानदंड कहीं अधिक अनुकूल थे, लेकिन 2008 में वित्तीय संकट के दौरान हालात तेजी से बदल गए और कई भारतीय छात्र परेशान, खोए हुए और फंसे हुए महसूस करने लगे.'
'हिम्मत रखो, आओ अब लौट चलें'
उन्होंने कहा, 'अमेरिका में वीजा मानदंड कड़े होने के बाद कुछ छात्र घर लौट आए, जबकि कुछ ने वैध वीजा होने के बाद भी भारत लौटने का फैसला लिया. हममे से जिनके पास वैध वीजा था, वो भी अपने वतन वापस आ गए. आज यहां हमने अपनी मेहनत और लगन से काफी सफलता हासिल कर ली है और अब आनंद महसूस कर रहे हैं.'
गुप्ता ने कहा, '20 साल पहले उन्होंने अमेरिका छोड़ा था और उन्हें अगर अब भी मौका मिले, फिर भी वह खुद वहां नहीं जाएंगी.' विदेश में रह रहे भारतीय छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा, 'अगर आप अभी अमेरिकी कैंपस में हैं और खुद को निराश महसूस कर रहे हैं, ये याद रखें कि अगर एक दरवाजा बंद होता है तो कई और दरवाजे खुल जाते हैं.' राधिका ने कहा, 'साल 2025 का भारत अब साल 2005 के भारत से कहीं ज्यादा रोमांचक हो गया है. हिम्मत रखो, आओ अब लौट चलें.'
साल 2006 में AQR कैपिटल मैनेजमेंट में शामिल
बता दें कि पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय और व्हार्टन स्कूल की स्टूडेंट रह चुकीं सुश्री गुप्ता ने साल 2005 में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग और अर्थशास्त्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त की. साल 2006 में AQR कैपिटल मैनेजमेंट में शामिल होने से पहले, उन्होंने मैकिन्से एंड कंपनी में एक बिजनेस एनालिस्ट के रूप में काम किया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लागू H-1B वीजा शुल्क बढ़ोतरी के बाद जहां वीजाधारकों को एक साल का शुल्क 10, 000 डॉलर देना पड़ता था, अब वही शुल्क 1,00,000 डॉलर कर दिया गया है. अमेरिकी नौकरियों की रक्षा और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि केवल योग्य कर्मचारियों को ही अमेरिका में काम पर रखा जाए.
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Source: IOCL





















