निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए पार्किंग की जगह जानबूझकर घटाई जाएगी और एक एकीकृत पार्किंग प्लान बनेगा। यमुना किनारे 52 किलोमीटर का साइकिल ट्रैक भी बनाया जाएगा, जिसमें पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों को प्राथमिकता मिलेगी।
40 लाख नए घर और 695 KM मेट्रो का खाका लागू, 2047 तक बदल जाएगा दिल्ली का नक्शा
Master Plan 2047: दिल्ली का पहला मास्टर प्लान 1962 में आया था, जो दिल्ली विकास अधिनियम 1957 के तहत बना था. इसके बाद 2001 और 2021 के प्लान आए. अब मास्टर प्लान 2047 दिल्ली का चौथा मास्टर प्लान होगा.

- झुग्गी, पुरानी कॉलोनियों के पुनर्विकास पर भी जोर।
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार (20 अगस्त, 2026) को देश की राजधानी दिल्ली के लिए मास्टर प्लान दिल्ली 2047 की गजट अधिसूचना जारी कर दी है. उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान दिल्ली 2047 का उद्देश्य दिल्ली को वैश्विक स्तर का यानी वर्ल्ड क्लास लेवल का शहर बनाना है. इसके लिए अगले दो दशक की दिशा तय करने वाला प्लान जारी कर दिया गया है.
दिल्ली का पहला मास्टर प्लान 1962 में आया था, जो दिल्ली विकास अधिनियम 1957 के तहत बना था. इसके बाद 2001 और 2021 के मास्टर प्लान आए. मौजूदा मास्टर प्लान 2021 को 2007 में अधिसूचित किया गया था और वह करीब दो दशक से चल रहा है. इस लिहाज से मास्टर प्लान 2047 दिल्ली का चौथा मास्टर प्लान होगा.
आइए आपको दिखाते हैं 2047 में कैसी दिखेगी दिल्ली!
बदलाव की वजह - 90 लाख नए लोग
दिल्ली के लिए मास्टर प्लान 2047 का सबसे अहम आंकड़ा आबादी का है. इसके मुताबिक, 2047 तक दिल्ली की आबादी करीब 3.2 करोड़ हो जाएगी. अभी यह करीब 2.3 करोड़ है, यानी अगले 20 साल में शहर में करीब 90 लाख लोग और जुड़ेंगे. इन्हें बसाने के लिए प्लान का अनुमान है कि 2047 तक दिल्ली को करीब 40 लाख अतिरिक्त घर चाहिए होंगे. दिल्ली के पास नई जमीन बची नहीं है, इसलिए प्लान ने घनत्व बढ़ाने का रास्ता चुना है.
207 वर्ग किलोमीटर का नया जोन
प्लान के मुताबिक मेट्रो, नमो भारत और रेलवे कॉरिडोर के आसपास करीब 207 वर्ग किलोमीटर इलाके को ऊंची और सघन बसावट के लिए चिह्नित किया गया है. इसे ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी TOD कहते हैं.
नियम सीधा है- मेट्रो कॉरिडोर, नमो भारत या रेलवे स्टेशन से 500 मीटर के दायरे में आने वाली जमीन इस जोन में आएगी. यहां FAR यानी फ्लोर एरिया रेशियो ज्यादा मिलेगा, मतलब उतनी ही जमीन पर ज्यादा मंजिलें बन सकेंगी. अनुमान है कि अगले 10 साल में अकेले इन इलाकों में करीब 17 लाख फ्लैट बन सकते हैं.
अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 के दोनों तरफ 250 मीटर तक ऊंची रिहायशी इमारतों की गुंजाइश भी रखी गई है. इसी इलाके में हाई डेंसिटी कॉरिडोर जोन बनेगा, जहां घर, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स और दुकानें एक साथ होंगी.
अब मिलेगी TDR की सुविधा
प्लान में ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स यानी TDR की सुविधा दी जाएगी. आसान भाषा में- अगर किसी की जमीन का कुछ हिस्सा सड़क चौड़ी करने या किसी सार्वजनिक काम के लिए ले लिया जाता है, तो उसे उसी जगह मुआवजा देने के बजाय कहीं और ज्यादा निर्माण करने का अधिकार दिया जाता है. यह अधिकार खरीदा और बेचा भी जा सकता है.
इससे सरकार को नकद मुआवजे का बोझ कम पड़ता है और जमीन मालिक को भी नुकसान नहीं होता. दिल्ली में सड़क चौड़ीकरण और पुनर्विकास के कई प्रोजेक्ट जमीन के पेच में सालों से अटके हैं, टीडीआर से उनमें रास्ता निकल सकता है.
लैंड डेंसिटी और इमारतों की ऊंचाई पर नया काम
प्लान में लैंड डेंसिटी यानी जमीन पर आबादी के घनत्व को दोबारा तय करने पर काम होगा. साथ में इमारतों की ऊंचाई से जुड़े नियमों पर भी खास ध्यान दिया जाएगा. यह दोनों चीजें आपस में जुड़ी हैं. जब एक ही जमीन पर ज्यादा लोगों को बसाना है तो इमारतें ऊंची होंगी, लेकिन उसी हिसाब से पानी, सीवर, बिजली और सड़क का ढांचा भी बढ़ाना पड़ेगा. प्लान इसी संतुलन का ढांचा तय करता है.
मेट्रो 416 से बढ़कर करीब 695 किलोमीटर
दिल्ली का मेट्रो नेटवर्क इस समय 416 किलोमीटर है और आगे इसमें करीब 279 किलोमीटर और जुड़ने की उम्मीद है यानी नेटवर्क करीब 695 किलोमीटर तक पहुंच सकता है. नमो भारत यानी RRTS का जाल बढ़ाकर करीब 383 किलोमीटर तक ले जाने की योजना है, जो दिल्ली को गाजियाबाद, मेरठ, पानीपत, करनाल और अलवर से जोड़ेगा. 82 किलोमीटर के दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर के चालू होने के बाद दोनों शहरों के बीच सफर एक घंटे से कम रह गया है.
तीन जगह बनेंगे मल्टी मॉडल हब
प्लान में आनंद विहार से कड़कड़डूमा, कश्मीरी गेट और निजामुद्दीन से सराय काले खां के स्ट्रेच को मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के तौर पर विकसित किया जाएगा. इसका मतलब यह कि एक ही जगह मेट्रो, बस, रेल, नमो भारत और ऑटो रिक्शा जैसी सुविधाएं मिलेंगी और एक साधन से दूसरे में बदलना आसान होगा. इसके लिए मल्टी लेवल इंटरचेंज बनेंगे और अलग-अलग हिस्सों को स्काईवॉक, सबवे और पैदल पुल से जोड़ा जाएगा. इन हब के 500 मीटर के दायरे में कोई भी TOD प्रोजेक्ट तभी मंजूर होगा, जब वह हब की योजना से जुड़ा हो.
पार्किंग की जगह घटाई जाएगी
यह प्लान का सबसे चौंकाने वाला फैसला है कि दिल्ली में पार्किंग की जगह जानबूझकर कम की जाएगी, ताकि लोग निजी गाड़ी छोड़कर मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन की तरफ बढ़ें. इसके साथ पूरे शहर के लिए एक यूनिफाइड पार्किंग प्लान बनाया जाएगा, यानी अलग-अलग एजेंसियों की अलग-अलग व्यवस्था के बजाय एक तालमेल वाला ढांचा होगा. अभी दिल्ली में पार्किंग की जिम्मेदारी नगर निगम, NDMC, DDA और मेट्रो जैसी कई एजेंसियों के बीच बंटी हुई है.
यमुना किनारे 52 किलोमीटर का साइकिल ट्रैक
प्लान में यमुना के किनारे 52 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक बनाने की योजना है. यह ट्रैक न सिर्फ रोजाना सफर का साधन बनेगा, बल्कि नदी के किनारे को लोगों के लिए खोलने का जरिया भी होगा. प्लान में साफ लिखा है कि दिल्ली में अब गाड़ियों से पहले लोगों को प्राथमिकता मिलेगी. पैदल चलना, साइकिल और सार्वजनिक परिवहन को पसंदीदा साधन बताया गया है. इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन जैसे साफ ईंधन वाले वाहनों और उनके चार्जिंग व रिफ्यूलिंग ढांचे को भी जगह मिली है.
थोक बाजार और गोदामों के नियम बदले
व्यापार से जुड़ा एक अहम बदलाव यह है कि थोक बाजारों यानी होलसेल मार्केट का FAR बढ़ा दिया गया है, जबकि वेयरहाउस यानी गोदामों का एफएआर घटाया जाएगा. इसका सीधा मतलब यह है कि थोक बाजार अब उसी जमीन पर ज्यादा जगह बना सकेंगे और उन्हें फैलने के लिए नई जमीन की जरूरत कम पड़ेगी. दूसरी तरफ गोदामों को शहर के भीतर कम और बाहरी लॉजिस्टिक्स क्लस्टर में ज्यादा जगह लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
कॉलेज और संस्थान अब एक ही कैटेगरी में
शिक्षा से जुड़ा एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव भी हुआ है. पहले कॉलेज और इंस्टीट्यूट को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता था, अब दोनों को मिलाकर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट नाम की एक ही कैटेगरी बना दी गई है. इससे जमीन के इस्तेमाल और नक्शे की मंजूरी में उलझन कम होगी और शिक्षण संस्थानों के विस्तार का रास्ता आसान होगा.
सिंगल विंडो सिस्टम
मंजूरी की प्रक्रिया तेज करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाया जाएगा, यानी अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने के बजाय एक ही जगह से मंजूरी मिल सकेगी. इससे पहले डीडीए ने यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज 2016 में संशोधन को मंजूरी दी है, जिसके तहत नक्शा पास कराने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, चीफ इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज, दिल्ली जल बोर्ड और वन विभाग से एनओसी लेने की शर्त हटा दी गई है.
जहां झुग्गी, वहां मकान
झुग्गी बस्तियों को लेकर प्लान- जहां झुग्गी, वहां मकान- के सिद्धांत को दोहराता है, यानी झुग्गीवासियों को उसी जगह पक्का मकान देने की कोशिश होगी, जहां वे रह रहे हैं, ताकि उनका रोजगार और सामाजिक रिश्ता न टूटे. ऐसे पुनर्विकास में एफएआर बढ़ाने का प्रस्ताव है ताकि प्रोजेक्ट आर्थिक रूप से चल सकें.
अनधिकृत कॉलोनियों के लिए भी अलग ढांचा है. इनमें सड़क, पानी और सीवर सुधार कर कनेक्टिविटी बेहतर करके और विकास के नियम तय करके इन्हें शहर के औपचारिक ढांचे में जोड़ने की बात कही गई है.
पुरानी कॉलोनियों को दूसरी जिंदगी
प्लान मानता है कि दिल्ली की बहुत सी कॉलोनियां अब पुरानी पड़ चुकी हैं. डीडीए की हाउसिंग स्कीम, प्लॉटेड डेवलपमेंट, पुनर्वास कॉलोनियां, सरकारी आवास, कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी और प्राइवेट ग्रुप हाउसिंग इन सबके पुनर्विकास का रास्ता खोला गया है. डीडीए ने पुराने दो मंजिला डीडीए फ्लैटों के पुनर्निर्माण की नीति भी मंजूर की है.
नरायना विहार जैसी स्कीमों में बने ये मकान 50 साल से ज्यादा पुराने हैं और कई ढांचागत रूप से कमजोर हो चुके हैं. नई नीति में इन्हें भी खाली रिहायशी प्लॉट जैसे पुनर्विकास अधिकार मिलेंगे, बशर्ते एफएआर, ग्राउंड कवरेज, ऊंचाई, आग और ढांचागत सुरक्षा के नियम पूरे हों.
बाहरी दिल्ली में लैंड पूलिंग और फ्लेक्सी रोड
बाहरी इलाकों के लिए लैंड पूलिंग नीति को आगे बढ़ाया जा रहा है. इसमें किसान अपनी जमीन एक साथ मिलाकर देते हैं और बदले में विकसित जमीन का हिस्सा पाते हैं. प्लान में फ्लेक्सी रोड नाम की एक नई अवधारणा भी है, जिसमें सड़कों का ढांचा जरूरत के हिसाब से लचीला रखा जाएगा ताकि जमीन के टुकड़े बेकार न जाएं. दिल्ली के आखिरी छोर के गांवों को लो डेंसिटी एरिया में रखा गया है, जहां कम घनत्व वाला निर्माण ही होगा.
नौकरी और पढ़ाई का पक्ष
नरेला में 138 हेक्टेयर का एजुकेशन हब बनेगा, जहां विश्वविद्यालय, शोध संस्थान, कौशल प्रशिक्षण केंद्र और स्टार्टअप को जगह मिलेगी. नरेला में रिठाला कुंडली कॉरिडोर के मेट्रो डिपो के लिए जमीन के इस्तेमाल में बदलाव को भी मंजूरी मिली है. इसके अलावा, निवेश के लिए तैयार कारोबारी जिले, आधुनिक औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर और विशेष आर्थिक जोन प्लान का हिस्सा हैं.
हरियाली, यमुना और रिज
प्लान के मुताबिक, इस समय दिल्ली का करीब 22 प्रतिशत हिस्सा हरित क्षेत्र में आता है और इसे और बढ़ाने का लक्ष्य है. ग्रीन कनेक्ट नाम का एक नेटवर्क बनेगा जो पार्क, जंगल, बायोडायवर्सिटी पार्क, बावड़ियों और हरे रास्तों को आपस में जोड़ेगा.
दिल्ली रिज से यमुना तक के पूरे इलाके को एक पारिस्थितिक इकाई मानकर काम होगा. नजफगढ़, ट्रांस यमुना और बारापूला ड्रेनेज बेसिन में नालों, आर्द्रभूमि और झीलों को दोबारा जिंदा करने की बात है. यमुना के ओ जोन को बचाने का जिक्र भी प्लान में है.
खेल, सेहत और विरासत
खेल ढांचे को प्लान ने सामाजिक बुनियादी ढांचे का हिस्सा माना है. दस्तावेज में इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, शिवाजी स्टेडियम, डीडीए के 23 खेल परिसर और तीन गोल्फ कोर्स का जिक्र है. नरेला, द्वारका और रोहिणी उपनगरों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की नई खेल सुविधाएं बनेंगी.
सेहत के मोर्चे पर अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और वेलनेस सेंटर का जाल फैलाने और दिल्ली को मेडिकल टूरिज्म का बड़ा ठिकाना बनाने का लक्ष्य है. विरासत के मामले में पुरानी इमारतों के दोबारा इस्तेमाल, पारंपरिक बाजारों के पुनर्विकास और हेरिटेज वॉक का जिक्र है.
लागू करने का ढांचा
प्लान कहता है कि इसे जमीन पर उतारने के लिए समयबद्ध मंजूरी प्रक्रिया और निगरानी का ढांचा बनाया जाएगा. डिजिटल भूमि प्रबंधन, चरणबद्ध विकास और लैंड वैल्यू कैप्चर जैसे तरीकों से जमीन की बढ़ी कीमत का फायदा सार्वजनिक ढांचे पर लगाने की बात है. साथ में सट्टेबाजी रोकने के लिए नियामकीय ढांचे का जिक्र है. तकनीक के मोर्चे पर एआई आधारित योजना और डिजिटल ट्विन का इस्तेमाल होगा. इसके अमल में DDA अकेला नहीं होगा. केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, एमसीडी, एनडीएमसी, डीएमआरसी, एनसीआरटीसी, दिल्ली जल बोर्ड और डूसिब, सब इसमें शामिल होंगे.
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