तेलंगाना के सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाकर कई छात्र बीमार, अस्पताल में भर्ती
तेलंगाना में सरकारी स्कूलों के भोजन में लापरवाही का मामला फिर से सामने आया है. कामारेड्डी के नागीरेड्डीपेट में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे मील खाकर 8 छात्र अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गए.

तेलंगाना के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. ताजा मामला कामारेड्डी जिले के नागीरेड्डीपेट मंडल के मालतुम्मेदा गांव का है, जहां एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय (Boys Primary School) में दोपहर का भोजन करने के बाद 8 छात्र अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गए. इस घटना के बाद स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में बच्चों को अस्पताल ले जाया गया.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रोजाना की तरह बुधवार को भी छात्रों को स्कूल में मध्याह्न भोजन परोसा गया था. खाना खाने के कुछ ही देर बाद कई छात्रों ने पेट में तेज दर्द और जी मिचलाने की शिकायत की. देखते ही देखते 8 बच्चों की हालत बिगड़ने लगी. स्कूल स्टाफ ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत एम्बुलेंस और स्थानीय वाहनों की मदद से बच्चों को एल्लारेड्डी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया.
सभी बच्चों का इलाज जारी
अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह 'फूड पॉइजनिंग' (Food Poisoning) का मामला लग रहा है. फिलहाल सभी बच्चों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है. जैसे ही यह खबर गांव में फैली बड़ी संख्या में अभिभावक अस्पताल और स्कूल की ओर दौड़ पड़े. परिजनों में शिक्षा विभाग और मिड-डे मील बनाने वाली एजेंसियों के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है. अभिभावकों का आरोप है कि भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच नहीं होने के कारण मासूमों की जान जोखिम में डाली जा रही है.
तेलंगाना में सरकारी स्कूलों के भोजन में लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी राज्य के विभिन्न हिस्सों से भोजन में कीड़े मिलने या दूषित खाना परोसे जाने की खबरें सामने आती रही हैं. मालतुम्मेदा की इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की निगरानी प्रक्रिया की पोल खोल दी है.
पुलिस ने मामले की जांच शुरू की
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय शिक्षा अधिकारियों और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. स्कूल में बचे हुए भोजन के नमूने लैब परीक्षण के लिए भेज दिए गए हैं. ग्रामीणों और जन प्रतिनिधियों ने मांग की है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार मिड-डे मील वर्कर और संबंधित निगरानी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में बच्चों की सेहत के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो.
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Source: IOCL























