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Child Malnutrition In Gujarat: तरक्की में तेज गुजरात कुपोषित बच्चों के मामले में क्यों नंबर-1, क्या है इसकी वजह?

Child Health And Nutrition: हाल ही में गुजराज में कुपोषण को लेकर दावा किया गया है कि यहां 100 में से 40 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इसके पीछे कारण क्या है.

Why Child Malnutrition Is High In Gujarat: गुजरात में बच्चों में कुपोषण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. राज्य की तरक्की के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कुपोषण के मामले में स्थिति इतनी गंभीर क्यों बनी हुई है. हाल ही में विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस हुई, जहां कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने दावा किया कि राज्य में 100 में से 40 बच्चे कुपोषित हैं और इनमें बड़ी संख्या आदिवासी समुदाय से आती है. इस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री मनीषा वकील  ने जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष पुराने आंकड़ों पर निर्भर है. उन्होंने बताया कि पोषण ट्रैकर के मुताबिक जनवरी 2026 तक गुजरात में सिर्फ 11.4 प्रतिशत बच्चे ही कुपोषित हैं और पिछले कुछ सालों में इसमें गिरावट आई है.

क्यों गुजराज में ज्यादा है कुपोषण?

हालांकि, यहां सबसे बड़ा सवाल आंकड़ों को लेकर है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) और पोषण ट्रैकर दोनों के आंकड़े अलग-अलग तरीके से तैयार होते हैं, इसलिए इन्हें सीधे तुलना करना सही नहीं माना जाता. NFHS पूरे समाज का प्रतिनिधित्व करने वाला सर्वे है, जबकि पोषण ट्रैकर आंगनवाड़ी केंद्रों में दर्ज बच्चों के डेटा पर आधारित है.

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द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, इकोनॉमिस्ट रीतिका खेड़ा के अनुसार, पोषण ट्रैकर के डेटा को पूरी तरह भरोसेमंद मानना मुश्किल है, क्योंकि इसमें कई तकनीकी और ग्राउंड लेवल की दिक्कतें हैं. आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर डेटा अपडेट करने का दबाव रहता है और कई बार ऐप या नेटवर्क की समस्या के कारण सही जानकारी दर्ज नहीं हो पाती. पोषण ट्रैकर के जुलाई 2025 के आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में 32.7 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कम लंबाई), 7.3 प्रतिशत वेस्टिंग (लंबाई के हिसाब से कम वजन) और 18.4 प्रतिशत अंडरवेट (उम्र के हिसाब से कम वजन) की श्रेणी में हैं.

NFHS की रिपोर्ट में क्या है?

वहीं, NFHS-5 (2019-21) के अनुसार, 5 साल से कम उम्र के 39 प्रतिशत बच्चे स्टंटेड, 25.1 प्रतिशत वेस्टेड और 39.7 प्रतिशत अंडरवेट हैं. यानी अलग-अलग मानकों से देखें तो करीब 40 प्रतिशत बच्चों के कुपोषित होने की बात इन आंकड़ों से मेल खाती है. जिला स्तर के आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके वे हैं जो आदिवासी बहुल हैं, जैसे दाहोद, छोटा उदयपुर, नर्मदा और पंचमहल। यहां स्टंटिंग, वेस्टिंग और अंडरवेट के मामले सबसे ज्यादा हैं. यानी कुल मिलाकर, अलग-अलग डेटा के बावजूद यह साफ है कि गुजरात में कुपोषण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में इसका असर ज्यादा देखने को मिलता है.

क्या हो सकती है वजह?

गुजरात में बच्चों में कुपोषण की स्थिति के पीछे कई संभावित वजहें हो सकती हैं. आदिवासी इलाकों में रहने वाले परिवारों तक संतुलित और पौष्टिक आहार की पर्याप्त पहुंच नहीं हो पाती, जिससे बच्चों के पोषण पर असर पड़ता है.कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाओं और आंगनवाड़ी केंद्रों की गुणवत्ता और पहुंच भी चुनौती बनी रहती है. इसके अलावा, माता-पिता में पोषण और बच्चों की देखभाल को लेकर जागरूकता की कमी भी एक अहम कारण हो सकती है. खराब खानपान और सीमित संसाधनों के चलते बच्चों के विकास पर असर पड़ता है, जिससे स्टंटिंग, वेस्टिंग और अंडरवेट जैसे मामले बढ़ते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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