सुप्रीम कोर्ट का 'समाधान समारोह 2026' सफल, 1712 मामलों का हुआ निपटारा
21 से 23 अगस्त तक चली इस विशेष लोक अदालत और मध्यस्थता कार्यक्रम में 1,712 मामलों का निपटारा किया गया. पक्षकारों की आपसी सहमति से समाप्त हुए इन मामलों में कुल 240.94 करोड़ रुपये की राशि भी बांटी गई.

सुप्रीम कोर्ट का 'समाधान समारोह 2026' काफी सफल साबित हुआ है. 21 से 23 अगस्त तक चली इस विशेष लोक अदालत और मध्यस्थता कार्यक्रम में 1,712 मामलों का निपटारा किया गया. पक्षकारों की आपसी सहमति से समाप्त हुए इन मामलों में कुल 240.94 करोड़ रुपये की राशि भी बांटी गई.
पक्षकारों से ली गई थी सहमति
'समाधान' कार्यक्रम की शुरुआत इस साल 21 अप्रैल को हुई थी. लंबे समय से चल रहे विवादों को कोर्ट की लंबी प्रक्रिया के बजाय मध्यस्थता और आपसी सहमति से सुलझाना इसका मकसद था. इस लोक अदालत में आने से पहले ही पक्षकारों के बीच समझौते की कोशिश की गई थी. इसके लिए पक्षकारों और उनके वकीलों के साथ बातचीत की गई थी.
हर दिन निपटे सैकड़ों मामले
तीन दिनों की इस लोक अदालत में कुल 3,285 मामले लगाए गए थे. इनमें से 21 अगस्त को 588 मामलों में से 402 का निपटारा हुआ. 22 अगस्त को 1,159 मामलों में से 350 और 23 अगस्त को 1,538 मामलों में से 912 का निपटारा किया गया, यानी कुल 1,664 मामले लोक अदालत के जरिए सुलझाए गए. इसके अलावा 48 मामलों का निपटारा मध्यस्थता के जरिए हुआ. यानी 3 दिनों में कुल 1,712 मामलों का समाधान हुआ.
इन मामलों में हुआ समझौता
लोक अदालत की बेंचों की अध्यक्षता CJI सूर्य कांत, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों और वरिष्ठ वकीलों ने की. इनमें मुख्य रूप से वैवाहिक विवाद, संपत्ति विवाद, सड़क हादसों से जुड़े मुआवजे के मामले, जमीन अधिग्रहण और मुआवजा, टैक्स, सर्विस और लेबर से जुड़े मामले शामिल थे.
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शनिवार-रविवार को भी हुआ काम
विवादों को आपसी सहमति से खत्म करने की इस संस्थागत पहल को सफल बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों ने शनिवार और रविवार को भी काम किया. कोर्ट की तरफ से जारी आधिकारिक रिलीज में कहा गया है कि इस पहल से न सिर्फ लोगों के पैसे बचे, बल्कि कोर्ट का कीमती समय भी उन मामलों के लिए बचाया जा सका जिनकी सुनवाई जरूरी है.
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