राज्य बार काउंसिल में SC-ST रिजर्वेशन के लिए जनहित याचिका पर विचार से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और यह याचिका देर से दाखिल की गई. उन्होंने कहा कि चुनावों के लिए इस तरह की मांग में बहुत देर हो चुकी है.

सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्य बार काउंसिल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वकीलों के लिए आरक्षण की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से मंगलवार (27 जनवरी, 2026) को सुनवाई से इनकार कर दिया.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और यह याचिका देर से दाखिल की गई. उन्होंने कहा कि चुनावों के लिए इस तरह की मांग में बहुत देर हो चुकी है.
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने विभिन्न राज्य बार काउंसिल में महिला वकीलों के लिए प्रतिनिधित्व जरूरी करने वाले सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश का हवाला दिया. याचिकाकर्ताओं के वकीलों, जिनमें राम कुमार गौतम भी शामिल थे, ने तर्क दिया कि विभिन्न राज्य बार काउंसिल में महिला वकीलों के प्रतिनिधित्व पर आदेश जारी किए गए थे जबकि अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में आरक्षण या प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर कुछ नहीं कहा गया है.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'आप हर जगह हैं. न्यायपालिका में, वकीलों के बीच, संसद में.....बार काउंसिल 1961 से है, और आपने कुछ नहीं किया. सिर्फ इसलिए कि सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के लिए कुछ किया, तो आप अब आ गए! आप बस इसे थाली में परोसा हुआ चाहते हैं.'
पहले के निर्देशों के दायरे पर स्पष्टीकरण देते हुए, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बेंच ने महिला वकीलों को आरक्षण नहीं दिया, बल्कि लंबे समय से चली आ रहीं कम प्रतिनिधित्व की समस्या पर ध्यान देने के लिए उनके प्रतिनिधित्व को अनिवार्य किया है.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'हमने महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं दिया है; यह सिर्फ प्रतिनिधित्व है.' उन्होंने यह भी कहा कि महिला वकीलों को दी गई राहत काफी समय तक लगातार चले वाद का नतीजा है. उन्होंने याचिकाकर्ताओं की इस बात के लिए आलोचना की कि वे चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत में आए. मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'आप अगले चुनाव के लिए हमसे संपर्क कर सकते हैं.'
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Source: IOCL



























