आम्रपाली बिल्डर पर गिरी सुप्रीम कोर्ट की गाज, कंपनी का बैंक अकाउंट किया फ्रीज
कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप की सभी 40 कंपनियों और उनके निदेशकों के बैंक अकाउंट फ्रीज़ कर दिए हैं. साथ ही इन कंपनियों और उनके निदेशकों की संपत्ति भी अटैच कर दी गई है. यानी अब कोई भी न तो बैंक खातों का इस्तेमाल कर सकेगा, न संपत्ति बेच सकेगा.

नई दिल्ली: अधूरे प्रोजेक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट को लगातार 'गुमराह' कर रहे आम्रपाली बिल्डर पर कोर्ट की गाज गिरी है. कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप की सभी 40 कंपनियों और उनके निदेशकों के बैंक अकाउंट फ्रीज़ कर दिए हैं. साथ ही इन कंपनियों और उनके निदेशकों की संपत्ति भी अटैच कर दी गई है. यानी अब कोई भी न तो बैंक खातों का इस्तेमाल कर सकेगा, न संपत्ति बेच सकेगा.
क्यों नाराज़ है कोर्ट
दिल्ली- एनसीआर में आम्रपाली के बिल्डिंग प्रोजेक्ट में 30 हज़ार से ज़्यादा लोगों के पैसे फंसे हैं. बिल्डर ने इन्हें पूरा करने की समय सीमा बताते हुए कोर्ट में हलफनामा दिया, लेकिन उसका पालन नहीं किया. कंपनी को कोर्ट की रजिस्ट्री में 250 करोड़ रुपए जमा कराने को कहा गया, पर कंपनी ने ये भी नहीं किया. बन चुकी इमारतों में ज़रूरी सुविधा देने के वादे भी अधूरे रहे. इसके अलावा कंपनी ने फ्लैट खरीदारों के 2765 करोड़ रुपए दूसरे कामों में लगा दिए. ये पैसे कहां गए, इसको लेकर स्पष्टता नहीं है. 18 जुलाई को कोर्ट ने कंपनी से जुड़े सभी बैंक खातों में 2008 से लेकर अब तक हुए लेन-देन का ब्यौरा मांगा था. कंपनी ने आज बस कुछ निदेशकों के खातों का ब्यौरा दिया.
NBCC को भी फटकार
18 जुलाई को हुई सुनवाई में बिल्डर ने दावा किया था कि केंद्र सरकार का उपक्रम नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (NBCC) उसके प्रोजेक्ट का टेकओवर करेगा. उसका कहना था कि उसी दिन सुबह NBCC के साथ उसकी बैठक हुई है.
कोर्ट ने इसे भी गुमराह करने की कोशिश करार दिया है. कोर्ट ने माना है कि पिछले वादों का हिसाब देने से बचने के लिए बिल्डर ने नया पैंतरा खेला था. कोर्ट ने पूछा, "किसके कहने पर NBCC ने बिल्डर के साथ बैठक की? जब कोर्ट सुनवाई कर रहा है तो ये समानांतर कार्रवाई क्यों शुरू की गयी." कोर्ट ने शहरी विकास मंत्रालय के सचिव और NBCC चेयरमैन को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर सफाई देने को कहा है. आम्रपाली के सीएमडी अनिल शर्मा को भी व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा गया है. कल दोपहर 2 बजे मामले की सुनवाई होगी.
चार्टड एकाउंटेंट पर भी नज़र
निवेशकों के पैसे दूसरे कामों में लगाए जाने से नाराज़ कोर्ट ने आम्रपाली से जुड़े सभी चार्टड एकाउंटेंट का भी ब्यौरा मांगा है. जस्टिस ने कहा- हम जानना चाहते हैं कि चार्टड एकाउंटेंट ने निवेशकों के पैसे दूसरे व्यापार में लगाने की सहमति कैसे दी.
हर कोई शक के दायरे में
जस्टिस अरुण मिश्रा और यु यु ललित की बेंच ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, "हमें लगता है कि कोर्ट के साथ गंभीर फ्रॉड खेला जा रहा है. फिलहाल हर कोई हमारे शक के दायरे में है. हम किसी पर भी अवमानना की कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेंगे."























