‘स्टूडेंट्स पर दबाव की चिंता’, CBSE की 3 भाषा नीति पर SC ने उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में कहा गया है कि इस नीति के चलते लाखों छात्रों के सामने अचानक नई भाषा पढ़ने की समस्या खड़ी हो गई है.

सीबीएसई की 3 भाषा नीति को लागू करने के तरीके और संसाधनों की कमी पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने अपनी चिंताओं पर जवाब देने के लिए सीबीएसई को समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 10 दिन बाद होगी. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में कहा गया है कि इस नीति के चलते लाखों छात्रों के सामने अचानक नई भाषा पढ़ने की समस्या खड़ी हो गई है.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कहा कि अभी तक कई जगहों पर नई भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं. पर्याप्त शिक्षक भी नहीं हैं. कई स्कूलों में नई भाषा की पढ़ाई शुरू तक नहीं हुई है, जबकि छात्रों की परीक्षाएं नजदीक हैं. छात्रों को ऐसी भाषा पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं पढ़ा. इससे परीक्षा में उनके प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है.
केंद्र सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने इन दावों को गलत बताया. उन्होंने कहा कि नीति को लागू करने के लिए जरूरी तैयारियां की गई हैं. भाटी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सभी जरूरी सामग्री और व्यवस्था उपलब्ध है. इस पर कोर्ट ने साफ किया कि वह इस नीति के खिलाफ नहीं है, लेकिन छात्रों के हित पर विचार करना ज़रूरी है.
चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि 2 भारतीय भाषाएं सीखना एक अच्छी बात हो सकती है. अगर उत्तर और दक्षिण भारत के लोग एक दूसरे की भाषण सीखेंगे तो इससे राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलेगा. इस पर एक वकील ने कहा कि राष्ट्रीय एकता की बात उचित हो सकती है, लेकिन दिल्ली के सभी स्कूलों में तमिल, तेलुगू या मराठी की जगह दूसरी भाषा के तौर पर संस्कृत को पढ़ाया जा रहा है.
याचिकाकर्ताओं की तरफ से यह सवाल भी उठाया गया कि इस नीति में अंग्रेज़ी को विदेशी भाषा कह दिया गया है. इसे कई राज्यों में आधिकारिक भाषा का दर्जा है. इसे विदेशी भाषा मानने से बच्चों के सामने फ्रेंच, जर्मन जैसी भाषाएं पढ़ने का विकल्प खत्म हो गया है. यह भाषाएं उन्हें भविष्य में अच्छा रोज़गार दे सकती हैं.
लगभग 45 मिनट चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की 3-भाषा नीति को रद्द या स्थगित करने से मना कर दिया, लेकिन केंद्र सरकार और सीबीएसई से इस नीति को लागू करने के तरीके पर दोबारा विचार करने को कहा. कोर्ट ने इन पहलुओं पर विचार के लिए कहा है :-
* जो बच्चे अभी क्लास 6 में हैं, क्या उन्हें एक बार की छूट दी जा सकती है? इससे उन पर अचानक नई भाषा का बोझ नहीं पड़ेगा
* इस बात पर विचार हो कि नई भाषा की पढ़ाई किस कक्षा से शुरू करवाना व्यवहारिक होगा? इसे क्लास 6 से शुरू किया जाए या उससे पहले से.
* तीसरी भाषा पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों, किताबों और बाकी बुनियादी ढांचा उपलब्ध करवाने का रोडमैप क्या है?
* जो बच्चे पहले से दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं, उन्हें अचानक हुए बदलाव के प्रति सहज बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
* जहां किसी खास भाषा के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, वहां बुनियादी भाषा शिक्षा के लिए क्या ऑनलाइन क्लास का विकल्प हो सकता है?





















