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राजस्थान विधानसभा स्पीकर ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस ली, कहा- HC के नए आदेश से परिस्थितियां बदलीं

सुनवाई के दौरान स्पीकर के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की समीक्षा करने के बाद अगर जरूरत महसूस हुई तो हम दोबारा सुप्रीम कोर्ट आना चाहेंगे. कोर्ट हमें इसकी भी इजाजत दे.

नई दिल्ली: राजस्थान विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है. स्पीकर ने पायलट खेमे के विधायकों की याचिका पर सुनवाई करने के हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी थी. लेकिन आज उनके वकील कपिल सिब्बल ने हाई कोर्ट के नए आदेश की समीक्षा करने की बात कहते हुए याचिका वापस ले ली.

सुप्रीम कोर्ट में आज क्या-क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई में 3 जजों की बेंच विशेष रुप से स्पीकर की याचिका पर सुनवाई करने बैठी थी. सुबह 11 बजे सुनवाई शुरू होते ही स्पीकर की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि हम याचिका को वापस लेना चाहते हैं. इसकी इजाजत दी जाए. जजों ने इसकी वजह पूछी तो सिब्बल ने बताया हाई कोर्ट ने 32 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी किया है. अब सुनवाई संविधान के 10वीं अनुसूची के कुछ प्रावधानों की वैधता की तरफ मुड़ गई है. ऐसे में हम नए सिरे से अपने कानूनी विकल्पों की समीक्षा करना चाहते हैं.“

जजों ने सिब्बल की बात सुनने के बाद उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी. सिब्बल ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की समीक्षा करने के बाद अगर जरूरत महसूस हुई तो हम दोबारा सुप्रीम कोर्ट आना चाहेंगे. कोर्ट हमें इसकी भी इजाजत दे. इस पर जजों ने कहा, “आप अगर याचिका दायर करेंगे, तो उस पर सुनवाई ज़रूर होगी.“

स्पीकर ने पायलट खेमे के 19 विधायकों को अयोग्यता का नोटिस जारी किया था

सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रही खींचतान के बीच विधानसभा स्पीकर ने पायलट समेत उनके खेमे के 19 विधायकों को अयोग्यता का नोटिस जारी किया था. उनकी गतिविधियों को पार्टी विरोधी बताया गया था. पायलट खेमे ने स्पीकर के नोटिस को हाई कोर्ट में चुनौती दी. वहां  स्पीकर ने भी अपना पक्ष रखा. लेकिन हाई कोर्ट का फैसला आने से पहले ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए. यहां उन्होंने दलील दी कि विधायकों की अयोग्यता पर उनका फैसला आने से पहले हाई कोर्ट को सुनवाई नहीं करनी चाहिए थी. यह उनके अधिकार क्षेत्र का हनन है.

स्पीकर ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि वह हाई कोर्ट को मामले में आदेश देने से रोक दे. 23 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इससे मना कर दिया. लेकिन कहा कि हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को लेकर स्पीकर ने जो सवाल उठाए हैं, उस पर सोमवार को विस्तार से सुनवाई होगी. हाई कोर्ट जो भी आदेश जारी करेगा, वह सुप्रीम कोर्ट में लंबित सुनवाई के निष्कर्ष पर निर्भर करेगा.

हाई कोर्ट ने सुनवाई के लिए 13 सवाल तय कर दिए थे

24 जुलाई को हाई कोर्ट ने स्पीकर की तरफ से विधायकों को भेजे गए नोटिस की वैधता पर सीधा आदेश नहीं दिया. इसकी बजाय मामले में आगे की सुनवाई के लिए 13 सवाल तय कर दिए. इन सवालों में मुख्य रूप से यह मुद्दा रखा गया कि अपनी सरकार के प्रति यदि कुछ विधायक असंतोष जताते हैं, तो क्या यह संविधान की दसवीं अनुसूची के पैराग्राफ 2 1(a) के तहत अयोग्यता का आधार माना जा सकता है? क्या सत्ता पक्ष के किसी विधायक को सरकार के प्रति असंतोष को व्यक्त करने से रोकना अभिव्यक्ति की मौलिक स्वतंत्रता के अधिकार का हनन नहीं होगा?

दरअसल, हाई कोर्ट के आदेश ने मामले को उलझा दिया है. इस बात की संभावना थी कि आज सुप्रीम कोर्ट यह कहता कि स्पीकर को हाई कोर्ट में होने वाली विस्तृत सुनवाई में अपना पक्ष रखना चाहिए. इस स्थिति को भांपते हुए विधानसभा स्पीकर ने खुद ही याचिका वापस ले ली. फिलहाल सभी 19 बागी विधायकों की सदस्यता बरकरार है. सदन में विश्वास मत की स्थिति में यह अशोक गहलोत सरकार के लिए मुसीबत बन सकता है.

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करीब 2 दशक से सुप्रीम कोर्ट के गलियारों का एक जाना-पहचाना चेहरा. पत्रकारिता में बिताया समय उससे भी अधिक. कानूनी ख़बरों की जटिलता को सरलता में बदलने का कौशल. खाली समय में सिनेमा, संगीत और इतिहास में रुचि.
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