उन्होंने आग्रह किया कि कश्मीरी शरणार्थियों के वोटिंग अधिकार और संवैधानिक दर्जे को राजनीतिक सौदेबाजी का मुद्दा न बनाया जाए। उनके अधिकार जम्मू-कश्मीर के लोगों के सामूहिक अधिकारों का अहम हिस्सा हैं।
PoK में जारी प्रदर्शन और बर्बरता पर मीरवाइज ने जताई चिंता, जानें क्या कहा?
PoK Protests: मीरवाइज ने कहा कि लोगों का कोई भी सच्चा आंदोलन सबको साथ लेकर चलने वाला होना चाहिए. यह लोगों के एक वर्ग के अधिकारों को आगे नहीं बढ़ा सकता,

- प्रदर्शनकारियों से शरणार्थियों के अधिकारों का सम्मान करने का अनुरोध भी किया।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आम नागरिकों की लगातार हो रही हत्याओं और प्रदर्शनकारियों पर लगातार हो रही कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताते हुए मीरवाइज-ए-कश्मीर मौलवी उमर फारूक ने कहा कि लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के बावजूद बंटवारे के दोनों तरफ रहने वाले सभी लोग एक ही हैं और एक-दूसरे का दुख-दर्द साझा करते हैं.
श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में शुक्रवार (31 जुलाई, 2026) की नमाज के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए मीरवाइज ने लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के पार खासकर रावलकोट में जारी अशांति और लोगों की दुखद मौत पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा, ‘चाहे हम श्रीनगर, मुजफ्फराबाद, बर्मिंघम या दुनिया में कहीं भी रहें, हम एक ही लोग हैं. एलओसी ने इलाके को बांटा है, लेकिन हमारे परिवारों, हमारे साझा इतिहास या हमारी नियति में हमारी सामूहिक हिस्सेदारी को नहीं बांटा है.’
एलओसी पार की घटनाओं पर जताई गहरी चिंता
मीरवाइज ने एलओसी के पार, खासकर रावलकोट में हाल की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि यह खून-खराबा सरकारों की इलाकों पर शासन करने और अपनी राजनीतिक स्थिति को आगे बढ़ाने की इच्छा का नतीजा है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के लोग ही अपनी मातृभूमि के असली हकदार हैं. अपने उपदेश में मीरवाइज ने कहा, ‘आज जब हम प्रार्थना के लिए इकट्ठा हुए हैं, तो हमारे विचार और प्रार्थनाएं एलओसी के दूसरी तरफ रहने वाले हमारे भाइयों और बहनों के साथ हैं. पिछले डेढ़ महीने में जारी अशांति और कीमती जानों के दुखद नुकसान से हमें गहरा दुख हुआ है.’
विरोध प्रदर्शन के दौरान मारे गए दर्जनों लोग- मीरवाइज
अशांति में मारे गए लोगों की संख्या पर चिंता जताते हुए मीरवाइज ने कहा कि रिपोर्टों से पता चलता है कि दर्जनों लोग मारे गए हैं, जबकि कुछ रिपोर्टों में मरने वालों की कुल संख्या इससे भी ज्यादा बताई गई है. उन्होंने कहा, ‘सच का पता एक त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के जरिए लगाया जाना चाहिए. हम हर उस जान के नुकसान पर शोक व्यक्त करते हैं जो गई है, चाहे वह कोई आम नागरिक प्रदर्शनकारी हो या पुलिस बल का सदस्य, और सभी घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं. साथ ही, सत्ता संभालने वालों को न्याय, समझदारी और संयम की राह पर चलने की प्रार्थना करते हैं.’
मीरवाइज ने भारत और पाक सरकार से की अपील
मीरवाइज ने भारत और पाकिस्तान की सरकारों से अपील की कि वे भविष्य की सभी बातचीत में बंटवारे के दोनों तरफ के लोगों को शामिल करें, क्योंकि इस क्षेत्र में शांति के असली हकदार वही लोग हैं. उन्होंने कहा, ‘लाइन ऑफ कंट्रोल के दोनों तरफ सरकारें जम्मू-कश्मीर के लोगों के भले के लिए काम करने का दावा करती हैं, फिर भी उनके भविष्य पर असर डालने वाले हर फैसले के केंद्र में खुद लोग ही होने चाहिए. हम एक ही लोग हैं, जो इतिहास, परिवार, संस्कृति और अपनी साझा 'स्टेट सब्जेक्ट' पहचान से जुड़े हैं.’
मीरवाइज ने पाकिस्तान सरकार और LoC के उस पार (POJK) की स्थानीय सरकार से अपील की कि वे जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रतिनिधियों और लोगों के सभी वर्गों के साथ ईमानदारी से बातचीत करें. उन्होंने कहा, ‘लंबे समय तक चलने वाली शांति और स्थिरता तभी मिल सकती है जब बातचीत हो, संवैधानिक निष्पक्षता बरती जाए और समाज के हर वर्ग के अधिकारों और सम्मान का ध्यान रखा जाए.’
उन्होंने सरकारों को सलाह दी और साथ ही प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे POK में दूसरे समूहों के अधिकारों को छीनने की कोशिश न करें, जो विधानसभा में J&K से आए कश्मीरी प्रवासियों के लिए सीट रिजर्वेशन का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘लोगों का कोई भी सच्चा आंदोलन सबको साथ लेकर चलने वाला होना चाहिए. यह लोगों के एक वर्ग के अधिकारों को आगे नहीं बढ़ा सकता, अगर वह दूसरे वर्ग के संवैधानिक अधिकारों पर सवाल उठाए या उन्हें कमजोर करे.’
प्रदर्शनकारियों से क्या किया अनुरोध?
मीरवाइज ने POJK में प्रदर्शनकारियों से आग्रह किया कि पाकिस्तान के अलग-अलग प्रांतों में रह रहे लगभग 30 लाख कश्मीरी शरणार्थियों और प्रवासियों के वोटिंग अधिकार और संवैधानिक दर्जे को राजनीतिक सौदेबाजी या उन्हें अलग-थलग करने का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि उनके अधिकार जम्मू-कश्मीर के लोगों के सामूहिक अधिकारों का अहम हिस्सा हैं और उन्हें भी उतना ही सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए. इसलिए दोनों पक्षों को इस अहम मुद्दे को हल करने के लिए एक निष्पक्ष और आपसी सहमति वाला रास्ता खोजने की कोशिश करनी चाहिए.
मीरवाइज ने कहा कि यह संघर्ष हमेशा से न्याय, सम्मान, मानवाधिकारों और जम्मू-कश्मीर के सभी लोगों के राजनीतिक अधिकारों के लिए रहा है, चाहे वे किसी भी क्षेत्र या समुदाय के हों, इसमें लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के दोनों तरफ या दुनियाभर में फैले कश्मीरी समुदाय के लोग भी शामिल हैं.
अशांति में जान गंवाने वालों के लिए प्रार्थना करते हुए मीरवाइज ने लोगों के बीच शांति, न्याय, मेल-मिलाप और एकता के लिए भी दुआ की. उन्होंने कहा, ‘हम प्रार्थना करतें हैं कि टकराव पर समझदारी, हिंसा पर बातचीत और बंटवारे पर सबको साथ लेकर चलने की भावना की जीत हो. अल्लाह सभी सरकारों और नेताओं को जम्मू-कश्मीर के हर बेटे और बेटी के अधिकारों, सम्मान और भलाई की रक्षा करने की राह दिखाए.’
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