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करगिल शिखर सम्मेलन: बिक्रम सिंह ने कहा- जंग यंग जवानों ने लड़ी थी, पेंटागन की तर्ज पर एक इंटीग्रेटेड हेडक्वार्टर बने

करगिल युद्ध के दौरान सेना के मुख्य प्रवक्ता रहे पूर्व सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने कहा कि करगिल युद्ध के दौरान सबसे मुश्किल घड़ी तब होती थी जब मैं शहीद जवानों की जानकारी देता था.

नई दिल्ली: करगिल युद्ध के 20 साल पूरे होने के मौके पर आज देश जीत का जश्न मना रहा है और शहीद सपूतों को श्रद्धांजलि दे रहा है. इस मौके पर एबीपी न्यूज़ के खास कार्यक्रम 'करगिल शिखर सम्मेलन' में पूर्व सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने कहा कि ये जंग युवा जवानों ने जीती. सीनियर अधिकारियों ने भी बड़ा योगदान दिया, हेडक्वार्टर ने भी लड़ाई लड़ी लेकिन जूनियर लीडरशिप ही युद्ध को सफल बनाती है.

बिक्रम सिंह ने कहा कि करगिल अब दोबारा नहीं हो सकता है. खुफिया तंत्र मजबूत है. मुश्तैदी काफी है. बड़ी तादात में कुछ भी नहीं हो सकता है. अब भारी ठंड में भी सेना की तैनाती रहती है.

करगिल युद्ध के दौरान सेना के मुख्य प्रवक्ता बिक्रम सिंह ने ये पूछने पर कि प्रेस कांफ्रेंस में सबसे मुश्किल क्या बताना होता था? उन्होंने कहा कि सबसे मुश्किल होता था करगिल में जब हमारे सैनिक शहीद होते थे उनके बारे में बताना.

बिक्रम सिंह ने कहा, ''करगिल युद्ध के दौरान सबसे मुश्किल घड़ी तब होती थी जब मैं शहीद जवानों की जानकारी देता था. हमें इस बात का अहसास था कि जो शहीद की पत्नियां हैं, परिवार हैं उन पर क्या बीतेगी. इसलिए मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होती. इसके अलावा मेरे लिए सारा कुछ सामान्य था. हम विदेश मंत्री जसवंत सिंह को ऑपरेशन की जानकारी दे रहे थे.''

जब उनसे पूछा गया कि करगिल के लिए जिम्मेदार कौन है? उन्होंने कहा, ''अभी वक्त राजनीति का नहीं है. जीत को सेलिब्रेट करने का वक्त है. अगर बोला जाएगा तो बहुत सारे लोगों के खिलाफ बातें चलेंगी. करगिल रिव्यू कमेटी की चैप्टर छह से लेकर आठ तक पढ़ते हैं तो उसके अंदर पूरी चीज पता लग जाएगा. कहां खामियां थी यह पता चल जाएगा. इस युद्ध से हमने हासिल भी किया है. लड़ाई के बाद लड़ाई लड़ने के लिए मॉर्डेनाइजेश आया. पहले ब्रिगेड था, वहां अब माउंटन डिविजन है. ट्रूप्स ज्यादा हैं, अधिक संख्याबल में जवान हैं.''

बिक्रम सिंह ने जूनियर जवानों के योगदानों की तारीफ करते हुए कहा, ''करगिल की लड़ाई यंग जवानों ने जीती. सीनियर जवानों का भी बड़ा योगदान था, मुख्यालय में भी तैयारी की गई, वहां से भी लड़ी गई. लड़ाई में एक टुकड़ी के बाद दूसरी टुकड़ी जाती है. जूनियर लीडरशिप ही लड़ाई लड़ती है और उन्होंने ही ऑपरेशन को कामयाब किया. गोलियों की बरसात होती है और उसका मुकाबला जवान करते हैं.''

पूर्व सेना प्रमुख ने मीडिया की भूमिका को सराहते हुए कहा कि इससे जवानों का हौसला बुलंद होता है. जवानों का जज्बा ऊपर जाता है, जुनून को कामयाब रखता है. सिंह ने कहा, ''करगिल में मीडिया ने भी बड़ी लड़ाई लड़ी. मीडिया रिपोर्टिंग से पूरा देश एकजुट हुआ. सेना का मनोबल बढ़ा.''

उन्होंने करगिल रिव्यू कमेटी का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार बहुत दबाव में थी कि करगिल क्यों हुआ? उस चीज को दबाने के लिए करगिल रिव्यू कमेटी बनाई गई. कमेटी में सेना और खुफिया भी शामिल था. इसमें खामियों का पता लगाया था. कमेटी ने खामियों को गिनाया. आज देश हर चुनौती के लिए तैयार है.

बिक्रम सिंह ने कहा, ''आज भी हमें कई काम करना है. अमेरिका ने पेंटागन बनाया है. उसी की तर्ज पर एक इंटीग्रेटेड हेडक्वार्टर होना चाहिए जहां सारे डिफेन्स कमांडर बैठें.''

उन्होंने कहा, ''एक्स सर्विसमैन कमीशन जल्दी क्रिएट होना चाहिए ताकि जो एक्स सर्विसमैन है या जो वीर नारी ( War Widow) है उसकी देखभाल बेहतर तरीके से कर सकें.'' उन्होंने लोगों से अपील की कि आम नागरिकों को भी आगे आना चाहिए और वीर नारी से मिलना चाहिए. एक साल में मात्र दो दिन निकालकर वीर नारी के घर जाना चाहिए. जय हिंद कीजिए.''

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