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Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस परेड पर दिखेगा खास नजारा! कर्तव्य पथ पर पहली बार मार्च पास्ट करते नजर आएंगे सेना के साइलेंट वॉरियर्स

Republic Day 2026: इस बार गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कुछ खास देखने को मिलेगा. आधुनिक हथियारों के साथ पारंपरिक योद्धाओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा. इसमें सेना के मूक योद्धा भी नजर आएंगे.

भारतीय सेना भले नए-नए हथियारों, ड्रोन, रोबोट और सैन्य उपकरणों से लैस हो रही है, लेकिन पारंपरिक योद्धाओं के साथ अभी भी कदमताल कर रही है. यही वजह है कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार सेना के मूक-योद्धा भी नजर आएंगे, जो वर्षों से सैनिकों को जंग के मैदान में मदद करते आए हैं.

इन मूक योद्धा में शामिल हैं, लद्दाख के डबल-हम्प वाले बैक्ट्रियन ऊंट और रैप्टर्स (शिकारी पक्षी), जिन्हें भारतीय सेना एंटी ड्रोन वारफेयर के लिए इस्तेमाल करती है. खास बात है कि इन बेहद खास जानवरों और पक्षियों की देखभाल से लेकर ट्रेनिंग देने वाली आरवीसी यानी रिमाउंट एंड वेटनरी कोर में पहली बार कोई महिला अधिकारी तैनात की गई है.


Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस परेड पर दिखेगा खास नजारा! कर्तव्य पथ पर पहली बार मार्च पास्ट करते नजर आएंगे सेना के साइलेंट वॉरियर्स

कैप्टन हर्षिता राघव संभालेंगी एनिमल दस्ते की कमान

गणतंत्र दिवस परेड में सेना के एनिमल दस्ते की कमान संभालेंगी, कैप्टन हर्षिता राघव. शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित फुल ड्रेस रिहसर्ल के बाद एबीपी न्यूज से बातचीत में कैप्टन राघव ने बताया कि भारतीय सेना के पशु-दस्ते, पहली बार इतने बड़े और संगठित रूप में परेड में शामिल होंगे. ये पशु न केवल सेना की ताकत दिखाएंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि देश की रक्षा में उनके योगदान को कितनी अहम जगह दी जाती है.

इस विशेष दस्ते में दो बैक्ट्रियन ऊंट, चार जांस्कर पोनी, चार शिकारी पक्षी (रैप्टर्स), भारतीय नस्ल के 10 सेना के कुत्ते और सेना में पहले से काम कर रहे 06 पारंपरिक सैन्य कुत्ते शामिल हैं.

थलसेना के दस्ते की अगुवाई करेंगे बैक्ट्रियन ऊंट

परेड में थलसेना के दस्ते की अगुवाई करेंगे बैक्ट्रियन ऊंट, जिन्हें हाल ही में लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी इलाकों में तैनात किया गया है. ये खास किस्म के ऊंट, लद्दाख और सेंट्रल एशिया के चुनिंदा इलाकों में ही पाए जाते हैं. वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हुई गलवान झड़प के बाद इन खास उंटों को सेना की लॉजिस्टिक विंग का हिस्सा बनाया गया था. इसके लिए इन ऊंटों को खास मिलिट्री ट्रेनिंग दी गई है.

ये ऊंट बहुत ठंडे मौसम और 15 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर आसानी से काम कर सकते हैं. ये 250 किलो तक का सामान ढो सकते हैं और कम पानी-चारे में लंबी दूरी तय करते हैं. इससे सेना को दूरदराज और कठिन इलाकों में रसद पहुंचाने में बड़ी मदद मिलती है.


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जांस्कर पोनी

बैक्ट्रियन ऊंटों के बाद कदम से कदम मिलाकर चलेंगी जांस्कर पोनी, जो लद्दाख की एक दुर्लभ और स्वदेशी नस्ल हैं. आकार में छोटी होने के बावजूद इनमें जबरदस्त ताकत और सहनशक्ति होती है. ये पोनी माइनस (-) 40 डिग्री तापमान और बहुत ऊंचाई वाले इलाकों में 40 से 60 किलो वजन लेकर चल सकती हैं. साल 2020 से ये सियाचिन जैसे कठिन क्षेत्रों में सैनिकों के साथ सेवा दे रही हैं और कई बार एक दिन में 70 किलोमीटर तक गश्त करती हैं.

शिकारी रैप्टर्स

परेड में शामिल चार शिकारी पक्षी (रैप्टर्स), सेना की नई और स्मार्ट सोच को दिखाते हैं. इनका इस्तेमाल निगरानी और एंटी-ड्रोन यानी हवाई सुरक्षा से जुड़े कामों में किया जाता है, जिससे सेना के अभियान ज्यादा सुरक्षित बनते हैं.

K9 दस्ता

इस परेड का सबसे भावुक हिस्सा होंगे भारतीय सेना के कुत्ते, जिन्हें प्यार से “मूक योद्धा” कहा जाता है. इन कुत्तों को मेरठ स्थित सेना के रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स केंद्र में प्रशिक्षित किया जाता है. ये आतंकवाद विरोधी अभियानों, विस्फोटक और बारूदी सुरंगों की पहचान, खोज-बचाव कार्यों और आपदा राहत में सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं. कई बार इन कुत्तों ने अपनी जान की परवाह किए बिना सैनिकों की जान बचाई है.


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आत्मनिर्भर भारत के तहत सेना अब मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई, कोम्बई और राजापलायम जैसी भारतीय नस्लों के कुत्तों को भी बड़े स्तर पर शामिल कर रही है. यह भारत की अपनी क्षमताओं पर बढ़ते भरोसे का साफ संकेत है.

गणतंत्र दिवस 2026 पर जब सेना का एनिमल-कंटीनजेंट पशु कर्तव्य पथ से गुजरेंगा, तब वे यह याद दिलाएंगे कि देश की रक्षा सिर्फ हथियारों से नहीं होती. सियाचिन की बर्फीली चोटियों से लेकर लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान तक, इन पशुओं ने चुपचाप लेकिन मजबूती से अपना फर्ज निभाया है. ये सिर्फ सहायक नहीं हैं, बल्कि भारतीय सेना के सच्चे साथी और चार पैरों पर चलने वाले वीर योद्धा हैं.

नीरज राजपूत देश के जाने-माने डिफेंस-जर्नलिस्ट और वॉर-लेखक हैं. पत्रकारिता में करीब ढाई दशक का अनुभव रखते हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया तीनों में गहरी पकड़ है.

वर्तमान में वे ABP नेटवर्क से जुड़े हैं, जहाँ युद्ध, रक्षा, नेशनल सिक्योरिटी और जियो-पॉलिटिक्स से संबंधित विषयों को कवर करते हैं. ABP लाइव पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘गेम-चेंजर’ के प्रस्तुतकर्ता भी हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने पहली हिंदी पुस्तक "ऑपरेशन Z लाइव" लिखी, जो बेस्टसेलर सूची में भी शामिल हुई और पाठकों द्वारा खूब सराही गई.

रिपोर्टिंग का दायरा
- दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से लेकर आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और चीन सीमा पर तिब्बत के पठार तक
- पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर-स्ट्राइक से लेकर पनडुब्बी के जरिए समुद्र के भीतर तक
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके एक्सक्लूसिव खुलासे और सटीक विश्लेषणों की व्यापक सराहना हुई
- यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में मारियुपोल, डोनेत्स्क और लुहांस्क जैसे एक्टिव वॉर-जोन से रिपोर्टिंग. इसी अनुभव पर आधारित उनकी पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई
- दुनिया की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक उत्तर-दक्षिण कोरिया की DMZ
- ⁠अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक JBLM, और शीत युद्ध के दौरान "गैर-मौजूद" माने जाने वाले रूसी सैन्य अड्डों से भी ग्राउंड रिपोर्टिंग. 
- ⁠वे उन चुनिंदा रक्षा जुड़े पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने भारत के पहले स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर LCH-प्रचंड के कॉकपिट में उड़ान भरी है. इसके अलावा फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण सुविधा से भी उन्होंने विशेष रिपोर्टिंग की.

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'Defence Correspondent Course' के Alumni हैं.

पूर्व कार्य अनुभव
- STAR NEWS में लगभग 6 वर्षों तक चीफ रिपोर्टर (क्राइम) के तौर पर कार्य किया और लोकप्रिय क्राइम शो 'सनसनी' से जुड़े रहे
- पत्रकारिता की शुरुआत अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से की
- इसके बाद B.A.G. Films के साथ जुड़कर STAR NEWS के लिए क्राइम शो बनाए
- SAHARA TV में भी लगभग 2 वर्षों तक कार्यरत रहे

रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर उनकी पकड़, ग्राउंड-जीरो रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण उन्हें देश के सबसे भरोसेमंद डिफेंस जर्नलिस्ट्स में स्थापित करती है.

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