'IDBI बैंक कर्मचारियों के साथ खड़ा हूं', राहुल गांधी ने क्यों लिखा ये पोस्ट? समझें पूरा मामला
राहुल गांधी ने IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के समय देश के उद्योगों को मजबूत करने के लिए बैंक बनाए गए, जबकि सरकार उन्हें बेच रही है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कार्यकाल में देश के उद्योगों को मजबूत करने के लिए बैंक बनाए गए, जबकि मौजूदा सरकार उन्हें बेच रही है. राहुल गांधी ने IDBI बैंक के कर्मचारियों के नाम एक पत्र लिखकर उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिया है. उन्होंने कहा कि जिस बैंक को कर्मचारियों ने घाटे से निकालकर मुनाफे में पहुंचाया, उसे निजी हाथों में सौंपने का फैसला उचित नहीं है.
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “कांग्रेस के समय में IDBI बना, देश का उद्योग खड़ा करने के लिए. मोदी के समय में पहले बोली देखी गई, फिर दाम तय हुआ. कांग्रेस के समय बैंक बनते थे, मोदी के समय में बिकते हैं. मैं IDBI बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूं.”
कांग्रेस के समय में IDBI बना - देश का उद्योग खड़ा करने के लिए। मोदी के समय में पहले बोली देखी गई, फिर दाम तय हुआ। कांग्रेस के time पे बैंक बनते थे। मोदी के time में बिकते हैं। मैं IDBI बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूँ। https://t.co/uLT7mWTYyr
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 30, 2026
कर्मचारियों के नाम पत्र लिखकर जताया समर्थन
राहुल गांधी ने IDBI बैंक के कर्मचारियों को लिखे पत्र में बताया कि पिछले साल मार्च में बैंक के कुछ कर्मचारी संसद भवन में उनसे मिलने आए थे. कर्मचारियों ने उनसे सवाल किया था कि जिस बैंक को उन्होंने मुनाफे में पहुंचाया है, सरकार उसे क्यों बेच रही है?
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने यह सवाल लोकसभा में उठाया था. उन्होंने सरकार से पूछा था कि मुनाफे में चल रहे सरकारी बैंक को क्यों बेचा जा रहा है और इसके कर्मचारियों व खाताधारकों के हितों की सुरक्षा कैसे होगी. उनके मुताबिक, सरकार ने इसका कोई कारण नहीं बताया. अब सरकार ने IDBI बैंक को कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स (Fairfax) को बेचने का फैसला किया है.
सात साल पहले घाटे में था बैंक, अब मुनाफे में
राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि IDBI की शुरुआत एक अग्रणी विकास बैंक के रूप में हुई थी. बाद में इसे वाणिज्यिक बैंक में बदलने का सफर आसान नहीं रहा, लेकिन कर्मचारियों ने तमाम चुनौतियों का सामना किया. सात साल पहले बैंक घाटे में था, जबकि पिछले साल उसने नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाया. राहुल गांधी ने इस बदलाव का श्रेय बैंक के कर्मचारियों को दिया.
उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से बनी संस्था पर जनता का अधिकार है. फिलहाल केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास बैंक की 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है. निजीकरण के बाद यह हिस्सेदारी घटकर 34 प्रतिशत रह जाएगी.
51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने का किया गया था वादा
राहुल गांधी ने पत्र में 2003 का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सरकार ने संसद में वादा किया था कि IDBI में उसकी हिस्सेदारी हमेशा कम से कम 51 प्रतिशत रहेगी. उन्होंने कहा कि भले ही यह वादा कानून का हिस्सा न हो, लेकिन संसद में किया गया वादा देश की जनता से किया गया वादा होता है.
उन्होंने आशंका जताई कि बैंक के निजी हाथों में जाने के बाद अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी. साथ ही, कर्मचारियों की सेवा शर्तें, जो पहले से कमजोर हुई हैं, अपनी आखिरी सुरक्षा भी खो देंगी.
उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि उन्होंने साथ देने का अनुरोध किया था और वह आज उनकी लड़ाई में उनके साथ हैं.
IDBI बैंक के विनिवेश के लिए दूसरी बार बोली प्रक्रिया पूरी
इस बीच, निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने गुरुवार को बताया कि IDBI बैंक के रणनीतिक विनिवेश के लिए दूसरे चरण की बोली प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. विभाग के मुताबिक, यह प्रक्रिया विनिवेश पर सचिवों के मुख्य समूह (CGD) की ओर से तय किए गए तरीके के अनुसार आयोजित की गई.
DIPAM ने बताया कि पहली बार बोली प्रक्रिया वित्त वर्ष 2025-26 में कराई गई थी, लेकिन उन बोलियों को मंजूरी नहीं मिली. इसके बाद पहली प्रक्रिया का प्रभाव समाप्त हो गया और उसे आगे जारी नहीं रखा गया.
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरी बोली प्रक्रिया में रिजर्व प्राइस यानी बैंक की बिक्री के लिए तय न्यूनतम कीमत को न तो घटाया गया और न ही बढ़ाया गया. दूसरी प्रक्रिया को ‘बेस्ट ऑफर राउंड’ भी कहा गया है. इसके लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया विनिवेश पर सचिवों के मुख्य समूह ने तय की थी.
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