राहुल पर जितेंद्र सिंह ने लगाया वादे से मुकरने का आरोप, कहा- मांगे पूरी फिर भी क्यों प्रदर्शन
Rahul Gandhi Protest: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राहुल गांधी पहले संसद में छात्रों के ऊपर लाठी चार्ज के मुद्दे को उठाने की मांग की थी. लेकिन जब उनकी मांगें मान ली गई.

पीएम आवास के बाहर धरने पर बैठे विपक्षी नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने वादा खिलाफी का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मांगों को मान लिया गया, लेकिन फिर उन्होंने अपनी मांगें बदल दी. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पहले संसद में छात्रों के ऊपर लाठी चार्ज के मुद्दे को उठाने की मांग की थी. लेकिन जब उनकी मांगें मान ली गई, उसके बाद वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ गए.
जितेंद्र सिंह ने कहा, 'कुछ समय पहले पता चला कि कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उनके साथ अन्य वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी इत्यादि अकस्मात ही अकबर रोड़ के समीप एक स्थान पर अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गये हैं. सरकार ने इनसे बात करने के लिए मुझे और गृह सचिव गोविंद मोहन को मौके पर भेजा. राहुल गांधी से अनुरोध किया गया कि वे अपना धरना समाप्त करें, क्योंकि यह स्थल धरने का स्थल नहीं है, और यहां पर धरना करने से जनसाधारण को काफी असुविधा भी पहुंच रही है.'
उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी जी ने यह मांग रखी कि यदि सरकार संसद में NEET और उससे संबंधित आंदोलन के साथ जुड़े सभी विषयों पर चर्चा करने के लिए मान जाती है तो वह अपना धरना तुरंत समाप्त कर देगें. कुछ ही देर में सरकार के शीर्ष नेतृत्व की अनुमति लेने के बाद राहुल गांधी को यह आश्वसान दिया गया कि उनकी मांगों को मान लिया गया है और सरकार NEET और उससे संबंधित आंदोलन के साथ जुड़े सभी विषयों पर संसद में चर्चा करने को तैयार है.'
केंद्रीय मंत्री ने बताया, 'राहुल गांधी को जब यह सूचना पहुंचाई गई तो उन्होंने कहा कि वह इतने पर ही नहीं मानेंगे अपितु उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का भी आश्वसान चाहा. उन्होंने कहा कि अब मेरी दो मांगे हैं: संसद में चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा. जब उनको याद दिलाया गया कि पहले उन्होने केवल चर्चा की ही मांग की थी, तब उन्होंने कहा कि अब मेरी मांगें बदल गयी हैं. जब उनकों विनम्रता से ये समझाने का प्रयास किया गया कि उनके जैसे वरिष्ठ नेता को इतनी जल्दी अपनी बात से मुकर जाना शोभा नहीं देता, तो उन्होंने कहा कि यह उनकी मर्जी है.'























