Farmers Protest: पंजाब बीजेपी के नेताओं ने पीएम मोदी से की मुलाकात, कहा- कानून रद्द करने की मांग छोड़ दें किसान
बीजेपी नेता सुरजीत कुमार ज्याणी ने मुलाकात के बाद कहा कि पीएम पंजाब को बेहतर तरीके से समझते हैं और वे किसानों को अहमियत देते हैं. उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग छोड़ देनी चाहिए.

नई दिल्ली: कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के बीच पंजाब के बीजेपी नेताओं ने मंगलवार को पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. पंजाब बीजेपी के नेता और पूर्व मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी और हरजीत सिंह ग्रेवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की.
इस मुलाकात के बाद सुरजीत कुमार ज्याणी ने कहा कि प्रधानमंत्री पंजाब को बेहतर तरीके से समझते हैं और किसानों को अहमियत देते हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों को अड़ना नहीं चाहिए, उन्हें कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग छोड़ देनी चाहिए. वहीं हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि किसानों के आंदोलन में माओवादी घुस गए हैं, जो मुद्दे को सुलझाने नहीं दे रहे.
सुरजीत कुमार ज्याणी को पिछले साल तीन कृषि विधेयकों पर पंजाब के किसानों से चर्चा के लिए बीजेपी की ओर से गठित किसान समन्वय समिति की अध्यक्षता सौंपी गई थी. उस समय ये विधेयक संसद से पारित नहीं हुए थे. ग्रेवाल भी इस समिति के सदस्य थे.
7 जनवरी को किसान निकालेंगे ट्रैक्टर मार्च
प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने 6 जनवरी को प्रस्तावित अपने ट्रैक्टर मार्च को खराब मौसम के पूर्वानुमान के चलते 7 जनवरी के लिए टाल दिया. हालांकि उन्होंने कहा कि वे आने वाले दिनों में अपने आंदोलन को तेज करेंगे. सिंघू बॉर्डर पर मीडिया को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि हजारों किसान सात जनवरी को सभी प्रदर्शन स्थलों से कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) के लिए ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे. स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि बुधवार को खराब मौसम की संभावना के बाद मार्च को टालने का फैसला किया गया है.
पिछले तीन दिन से दिल्ली और आसपास के इलाकों में रुक-रुककर बारिश हो रही है. किसान संघों ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन को आने वाले दिनों में तेज किया जाएगा. किसान नेता जोगिंदर नैन ने 26 जनवरी को दिल्ली के लिए प्रस्तावित एक और ट्रैक्टर मार्च के बारे में कहा, ‘‘हम हरियाणा के हर गांव से 10 ट्रैक्टर ट्रॉलियां भेजेंगे. हम लोगों से अनुरोध करते हैं कि हर घर से कम से कम एक व्यक्ति और एक गांव से कुल 11 महिलाएं आएं.’’
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