CAA Protest: नागरिकता कानून के खिलाफ लोगों का प्रदर्शन जारी, यूपी भवन से हिरासत में लिए गए कई लोग
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है. प्रशासन और सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद लोग इस कानून के खिलाफ प्रदर्शनरत हैं.

नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशभर में विरोध-प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है. आज एक बार फिर दिल्ली के विभिन्न इलाकों में लोगों ने प्रदर्शन किया. दिल्ली के जामा मस्जिद के पास भी जुमे की नमाज के बाद लोगों ने प्रदर्शन किया. इसके बाद कुछ लोगों ने यूपी भवन के पास प्रदर्शन किया जहां से अनेक लोगों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया है.
इन प्रदर्शनों की वजह से लोक कल्याण मार्ग मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया गया है. पुलिस फ्लैग मार्च कर रही है. असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए पुलिस भीड़ पर नजर रखी हुई है. बता दें कि यूपी में भी एहतियात के तौर पर 21 जिलों में इंटरनेट सेवा रोक दी गई है. पुलिस यहां फ्लैग मार्च कर रही है.
वहीं, उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को जुमे की नमाज शांतिपूर्वक संपन्न हो गयी. पिछले सप्ताह जुमे की नमाज के बाद नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई व्यापक हिंसा के मद्देनजर कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किये गये थे. राज्य के पुलिस महानिदेशक ओ पी सिंह ने कहा कि ‘पूरे प्रदेश में शांति रही.’
डीजीपी ने बताया कि प्रदेश के किसी भी हिस्से से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है. राज्य में भारी सुरक्षा बंदोबस्त किया गया है. संवेदनशील इलाकों में केन्द्रीय अर्द्धसैनिक बल के जवान तैनात किये गये हैं. ड्रोन कैमरों की मदद से निगरानी की जा रही है. इंटरनेट सेवाएं बंद हैं ताकि कोई अफवाह ना फैलने पाये. एक सवाल के जवाब में डीजीपी ने हिंसक प्रदर्शन के दौरान मरने वालों की संख्या 19 बताई.
इससे पहले भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की रिहाई की मांग और सीएए के खिलाफ शुक्रवार को प्रधानमंत्री आवास की ओर अपने हाथ बांधकर जा रहे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोका. भारी सुरक्षा व्यवस्था और ड्रोन निगरानी के बीच भीम आर्मी के सदस्यों समेत इन प्रदर्शनकारियों ने जोरबाग के दरगाह शाह-ए-मरदान से अपना मार्च शुरू किया.
पुलिस ने उन्हें लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास से पहले ही रोक दिया. इस मार्च में हिस्सा ले रहे प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथ बांध रखे थे ताकि उन पर इस प्रदर्शन के दौरान हिंसा और आगजनी के आरोप नहीं लगाए जा सके.

























