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ओबीसी में 'कोटे के भीतर कोटे' को लेकर राजनीति तेज़, यहां पढ़ें-क्या होगा असर?

Commission For Sub-Categorisation of OBC: अब नवगठित आयोग ओबीसी वर्ग के भीतर उन जातियों की पहचान करेगा जिन्हें आरक्षण का लाभ ज़्यादा नहीं मिल पाया है. ताकि वैसी जातियों के लिए ओबीसी के लिए निर्धारित 27 फीसदी कोटे या आरक्षण के भीतर ही अलग से आरक्षण की व्यवस्था की जा सके.

नई दिल्ली: ओबीसी श्रेणी के भीतर उप श्रेणियां बनाने के लिए आयोग बनाने के मोदी सरकार के फ़ैसले पर अब राजनीति शुरू हो गई है. कांग्रेस ने सरकार और बीजेपी पर अपने सियासी फ़ायदे के लिए ओबीसी वर्ग में दरार डालने की कोशिश करने का आरोप लगाया है. ओबीसी वर्ग से आने वाले वरिष्ठ नेता शरद यादव ने भी मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस का आरोप कांग्रेस का मानना है कि मोदी सरकार और बीजेपी का मक़सद यादव और कुर्मी जैसी ओबीसी की प्रभावशाली जातियों और ओबीसी की बाक़ी जातियों के बीच दरार पैदा करना है. पार्टी का आरोप है कि सरकार की मंशा इसके ज़रिए ओबीसी के भीतर की निचली जातियों को अपने पक्ष में करने की है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद पी एल पुनिया ने आरोप लगाया कि बीजेपी हमेशा ही धर्म और जाति के नाम पर राजनीति करती आई है और ओबीसी में उप श्रेणी बनाने का फैसला भी उसी की कड़ी है. हालांकि पुनिया ने ये ज़रूर माना कि आरक्षण का लाभ ओबीसी के सभी वर्गों तक पहुंचाने के लिए ओबीसी के अंदर उप श्रेणियां बनाना एक मुद्दा रहा है और इसकी मांग उठती रही है. क्या है मामला? फिलहाल ओबीसी श्रेणी के लोगों के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में एडमिशन में 27 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है. लेकिन एक शिकायत ये मिलती रही है कि इस 27 फीसदी आरक्षण का लाभ यादव और कुर्मी जैसी ओबीसी वर्ग की प्रभावशाली जातियों को ज़्यादा मिलता है जिसके चलते ओबीसी वर्ग का एक बड़ा हिस्सा आरक्षण का फायदा नहीं ले पाता है. अब नवगठित आयोग ओबीसी वर्ग के भीतर उन जातियों की पहचान करेगा जिन्हें आरक्षण का लाभ ज़्यादा नहीं मिल पाया है. ताकि वैसी जातियों के लिए ओबीसी के लिए निर्धारित 27 फीसदी कोटे या आरक्षण के भीतर ही अलग से आरक्षण की व्यवस्था की जा सके. क्या होगा असर? एबीपी न्यूज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक ओबीसी श्रेणी को 3 उप श्रेणियों में बांटे जाने की संभावना है - ओबीसी ( Other Backward Castes), एमबीसी ( More Backward Castes ) और ईबीसी ( Extremely Backward Castes ). इसका सीधा असर ये होगा कि ओबीसी की वो जातियां जिनको आरक्षण का लाभ कम मिल पाया है उनके लिए तो अब 27 फीसदी कोटे के भीतर ही अलग से एक तय फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की जा सकेगी. लेकिन यादव और कुर्मी जैसी ओबीसी की बड़ी जातियों के लिए आरक्षण का प्रतिशत घट जाएगा. बिना किसी जाति का नाम लिए पी एल पुनिया कहते हैं कि चूंकि ओबीसी की बड़ी जातियां पहले से ही किसी न किसी पार्टी के पक्ष में वोट देते आये हैं इसलिए बीजेपी की नज़र बाकी छोटी जातियों पर है. हालांकि आयोग केवल ओबीसी की केंद्रीय सूची में ही उप श्रेणियां बनाने पर अपनी रिपोर्ट देगा राज्य के बारे मे नहीं. यहां ये बात भी बताना जरूरी है कि आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्‍ट्र एवं तमिलनाडु समेत 9 राज्यों में पिछड़ी जातियों के उप वर्गीकरण की व्‍यवस्‍था पहले से ही है. ओबीसी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ नेता शरद यादव भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करते हैं. यादव का कहना है कि सरकार को पहले नौकरियों में ओबीसी की 27 फीसदी सीटों को भरना चाहिए. अगर ऐसा होता है तो वो भी उप वर्गीकरण के पक्ष में हैं. आयोग का गठन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने ओबीसी श्रेणी के भीतर उप श्रेणियां बनाने पर विचार करने के लिए संविधान की धारा 340 के तहत कल ही एक आयोग का गठन किया है. दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी की अध्यक्षता में गठित इस 5 सदस्यीय आयोग को 12 हफ्तों के भीतर अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपनी है. आयोग की ज़िम्मेदारी में इस बात को भी पता लगाना है कि ओबीसी श्रेणी में आरक्षण का वितरण किस सीमा तक असमान हुआ है. इसी साल 23 अगस्त को केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में मोदी सरकार ने आयोग बनाने का फैसला किया था. लगता है गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव से ठीक पहले लिए गए इस फैसले की गूंज इन चुनावों में भी सुनाई पड़ेगी .

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