वक्त के फेर में ढेर हुए सियासत के ‘नारायण‘

नई दिल्ली: सियासत किस कदर करवट बदलती है उसे इतिहास के आईने से बखूबी देखा जा सकता है, एक तस्वीर उस दौर की है जब एनडी तिवारी को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कांग्रेस ज्वाइन कराई थी.

और आज उसके ठीक उलट 75 साल बाद की एक तस्वीर ये भी है

जब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने एनडी तिवारी अपने बेटे रोहित शेखर से साथ पहुंचे थे खबर तो ये थी कि एनडी बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं लेकिन शायद बात नहीं बनी और पीएम की तारीफ करके एनडी लौट आए.
नारायण दत्त तिवारी 4 पीढ़ियों की कांग्रेसी राजनीति के ऐसे गवाह हैं जिनका राजनैतिक करियर उतना ही पुराना है जितना कि भारतीय संविधान.
सियासी करियर
- आपको बता दें कि एनडी तिवारी पहली बार 1952 में विधायक बने
- एनडी तिवारी पहली बार 1976 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने
- 5 बार विधायक रहे तो तीन बार यूपी के सीएम की कुर्सी पर कब्जा किया
- 1980 में तिवारी पहली बार लोकसभा पहुंचे और इंदिरा गांधी ने उन्हें योजना मंत्री बनाया
- बाद में एनडी तिवारी ने वित्त, विदेश जैसे कई बड़े मंत्रालय संभाले.
कहा जाता है कि खांटी कांग्रेसी एनडी तिवारी, राजीव गांधी की मौत के बाद प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे थे लेकिन वो चुनाव हार गए और सत्ता की सबसे बड़ी कुर्सी के इतने करीब होने के बावजूद उसे पा ना सके. और यही वजह थी कि एनडी कांग्रेस से अलग हो गए थे लेकिन बाद सोनिया के आने के बाद फिर से कांग्रेस में वापस आ गए
जब एनडी ने रचा इतिहास
उसके बाद साल 2000 में उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ, साल 2002 में ही उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बन एनडी तिवारी ने इतिहास रच दिया, और बन गए दो राज्यों के मुख्यमंत्री बनने वाले इकलौते राजनेता. इतना ही नहीं साल 2007 में एनडी तिवारी आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी बने.
इतना बड़ा सियासी करियर होने के साथ ही एनडी तिवारी का विवादों से चोली दामन का साथ रहा . साल 2009 में एनडी तिवारी सेक्स स्कैंडल में फंस गए, एक तेलगू चैनल ने तीन लड़कियों के साथ उनकी तस्वीर दिखाई, जिसके बाद उन्हें राज्यपाल पद से इस्तीफा देना पड़ा. तब बीजेपी ने एनडी तिवारी पर जमकर हमला बोला था लेकिन अमित शाह के साथ आई एक तस्वीर ने चाल, चरित्र और चेहरा सब बदल दिया.
नारायण दत्त तिवारी ऐसा नेता हैं जो राजनीतिक चालों को ना सिर्फ नेपथ्य में खड़ा होकर देखता है बल्कि उसमें धंसकर अपने हिसाब से चक्रव्यूह तैयार करता है,
एनडी तिवारी को पता है कि किस राजनैतिक चाभी से सत्ता के गलियारे का ताला खुलता है और यही वजह है कि करीब 7 दशक तक कांग्रेसी रहा नेता आज बीजेपी का होने चला था, लेकिन ऐन वक्त पर खबर पलट गई है और भारतीय राजनीति का बड़ा इतिहास बनने से बच गया.
Source: IOCL



























