सेवा तीर्थ में केंद्रीय कैबिनेट की पहली बैठक, पीएम मोदी का आया रिएक्शन, जानिए क्या कहा?
PMO Seva Teerth: मंत्रिमंडल ने संकल्प लिया कि सेवा तीर्थ में लिया गया हर निर्णय 140 करोड़ देशवासियों की सेवा भावना से प्रेरित होगा और राष्ट्र निर्माण के व्यापक लक्ष्य से जुड़ा रहेगा.

नए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक आयोजित की गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक को सरकार ने नए भारत के नवनिर्माण की दिशा में अहम कदम बताया. बैठक के बाद पीएम मोदी ने इसे राष्ट्रसेवा के नए संकल्प की शुरुआत बताया.
सेवा भाव और राष्ट्र निर्माण का संकल्प
सरकार की तरफ से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, मंत्रिमंडल ने संकल्प लिया कि सेवा तीर्थ में लिया गया हर निर्णय 140 करोड़ देशवासियों की सेवा भावना से प्रेरित होगा और राष्ट्र निर्माण के व्यापक लक्ष्य से जुड़ा रहेगा. यह भी कहा गया कि यहां की कार्य संस्कृति संविधान की मूल भावना के अनुरूप होगी.
पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- युगाब्द 5127, विक्रम संवत 2082, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन सेवा तीर्थ में केंद्रीय कैबिनेट की पहली बैठक हुई, जिसमें देश के लिए कई अहम फैसले लिए गए. उन्होंने कहा कि स्वदेशी सोच, आधुनिक स्वरूप और 140 करोड़ देशवासियों की क्षमता के आधार पर बना सेवा तीर्थ राष्ट्रसेवा के कर्तव्य को आगे बढ़ाएगा. पीएम ने मंत्र भी साझा किया - “यद् भद्रं तन्न आ सुव”, जिसका अर्थ है कि जो भी शुभ और कल्याणकारी विचार हैं, वे हमें निरंतर प्राप्त होते रहें.
आज युगाब्द 5127, विक्रम संवत 2082, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन नवनिर्मित सेवा तीर्थ में केंद्रीय कैबिनेट की प्रथम बैठक हुई। इसमें देश के लिए कई अभूतपूर्व निर्णय लिए गए।
— Narendra Modi (@narendramodi) February 24, 2026
इस दौरान, कैबिनेट ने ये संकल्प भी लिया कि स्वदेशी सोच, आधुनिक स्वरूप और 140 करोड़ देशवासियों के अनंत सामर्थ्य…
संवैधानिक मूल्यों पर जोर
बैठक में यह संकल्प भी दोहराया गया कि शासन नागरिकों की गरिमा, समानता और न्याय से जुड़ा रहेगा. सरकार ने कहा कि सेवा तीर्थ में बनने वाली हर नीति देशवासियों की आकांक्षाओं के प्रति जवाबदेह होगी.
साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ तक का सफर
विज्ञप्ति में कहा गया कि आजादी के बाद दशकों तक प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा, जहां विभिन्न सरकारों ने देश की विरासत को संभाला और भविष्य की योजनाएं बनाईं. सेवा तीर्थ को उसी सोच का आधुनिक रूप बताया गया है, जो स्वदेशी विचार और आधुनिक ढांचे का मेल है.
Source: IOCL























