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JNU हिंसा का एक साल: न इंसाफ मिला और न हुई किसी की गिरफ्तारी

जेएनयू हिंसा के एक साल बाद भी इस मामले में अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है. इसके अलावा अभी तक इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल नहीं की गई.

नई दिल्ली: दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में 5 जनवरी 2020 की शाम को हुई वारदात हर किसी के जहन में ताजा है. उस रोज कुछ नकाबपोश गुंडे यूनिवर्सिटी कैंपस में घुस आए थे और उन्होंने छात्रों पर हमला कर दिया था. पत्थर, रॉड, लाठी-डंडों के साथ आए इन लोगों ने हॉस्टल में तोड़फोड़ की और छात्रों के साथ मारपीट भी की. इस दौरान स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष आईशी घोष समेत कई दूसरे छात्र घायल हो गए थे और उन्हें काफी चोटें भी आई थी. इस घटना को अब एक साल पूरा हो चुका है लेकिन न्याय अभी भी मिलना बाकी है. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू की थी.

हालांकि जेएनयू हिंसा के एक साल बाद भी इस मामले में अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है. इसके अलावा अभी तक इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल नहीं की गई. इस मामले में न तो कैंपस के लोगों को पता है कि क्या जांच हो रही है और न ही पुलिस की तरफ से कोई ठोस जानकारी दी जा रही है. जानकारी के मुताबिक यूनिवर्सिटी की आंतरिक जांच भी रोक दी गई है. सूत्रों का कहना है कि इस मामले में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम ने 15 संदिग्धों की पहचान की थी. हालांकि कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन और सभी छात्रों के अपने घर लौट जाने की वजह से जांच रुक गई है.

क्या था मामला?

दरअसल, जेएनयू प्रशासन ने 1 जनवरी 2020 से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू करने का फैसला किया था. हालांकि लेफ्ट पार्टी के कुछ संगठन रजिस्ट्रेशन का विरोध कर रहे थे. इसका विरोध अक्टूबर 2019 से ही हो रहा था, तब जेएनयू में फीस बढ़ोतरी को लेकर लगातार प्रदर्शन किया जा रहा था. ऐसे में लेफ्ट पार्टी के छात्र नहीं चाहते थे कि कोई भी रजिस्ट्रेशन करे. इनमें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, स्टूडेंट्स फ्रंट ऑफ इंडिया और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन शामिल थे.

वहीं तीन जनवरी को दोपहर में इन चारों संगठनों के छात्रों ने विरोध करते हुए सर्वर रूम में तोड़फोड़ की. ये वो सर्वर रूम था जहां छात्रों को अपना रजिस्ट्रेशन करना था. विरोध के दौरान सिक्योरिटी गार्ड को भी इन छात्रों ने पीटा. वहीं सर्वर को बंद कर दिया था. घटना को लेकर पुलिस ने बताया कि एक बार सर्वर बंद हो जाने के बाद उसे फिर से शुरू करने में काफी वक्त लगता है लेकिन दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जेएनयू प्रशासन ने सर्वर को फिर से चालू कर दिया. साथ ही सर्वर रूम में तोड़फोड़ की शिकायत दिल्ली पुलिस में दर्ज करवाई गई. मामले में पुलिस ने आठ लोगों पर केस दर्ज कर जांच शुरू की थी.

5 जनवरी 2020 को हुई बड़ी घटना

हालांकि मामला यहीं शांत नहीं हुआ. इसके बाद पांच जनवरी 2020 की सुबह करीब 12 बजे जेएनयू के चार छात्रों के साथ मारपीट का मामला सामने आया. ये छात्र अपना रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते थे. लेफ्ट संगठनों के छात्रों ने मारपीट की थी. जब सिक्योरिटी गार्ड्स ने इन छात्रों को बचाने की कोशिश की तो उनके साथ भी मारपीट की गई. इसी दिन दोपहर करीब 4 बजे चारों छात्र संगठन के छात्रों ने अचानक से पेरियार हॉस्टल पर हमला कर दिया. हॉस्टल में तोड़फोड़ की और छात्रों के साथ मारपीट की. इस दौरान कुछ लोगों ने अपने चेहरे को नकाब से ढका हुआ था. इसको लेकर भी पुलिस में केस दर्ज करवाया गया था. इस मामले में भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू कर दी थी.

वहीं दोपहर की घटना के बाद छात्रों और शिक्षकों ने एक बैठक बुलाई. साबरमती हॉस्टल के पास टी प्वाइंट पर चल रही इस बैठक पर अचानक से लाठी-डंडों से लैस नकाबपोश भीड़ ने हमला कर दिया. इसके बाद नकाबपोश साबरमती हॉस्टल के अंदर घुसे और हॉस्टल के कमरों में तोड़फोड़ की. वहीं पुलिस की जांच में पता चला की हमलावर भीड़ को इस बात की जानकारी थी कि किस कमरे में जाकर तोड़फोड़ और मारपीट करनी है.

इस मामले की जानकारी भी पुलिस को दी गई और केस दर्ज किया गया. पुलिस की जांच में पता चला कि जेएनयू में जिस दिन हिंसा हुई उस दिन शाम करीब 5:30 बजे एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया था. इसका नाम यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट था. इस ग्रुप में करीब 60 लोग जुड़े थे. पुलिस ने कहा कि जेएनयू हिंसा में शामिल कई लोग इस व्हाट्सऐप ग्रुप से भी जुड़े थे. हालांकि अब एक साल बीत जाने के बाद भी अभी तक इस मामले में न्याय नहीं मिला है और जांच की जा रही है.

यह भी पढ़ें: दिल्ली दंगेः जेएनयू की पूर्व छात्रा नताशा ने उठाया पुलिस कार्रवाई पर सवाल, जानिए जेएनयू के 'लाल दुर्ग' में विवेकानंद की मूर्ति से विचारधाराओं के बैलेंस की तैयारी !

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