Iran US War: पश्चिम एशिया में तनाव के चलते किन-किन चीजों के बढ़े दाम? जानें सब कुछ
Iran-Israel War: जम्मू में पैकिंग मेटेरियल की फैक्ट्री के मालिकों का दावा है कि जब से ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच युद्ध की शुरुआत हुई है तब से पेट रीजन की कीमतों में 40 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है.

- पेट रीजन की कीमत 90 से 140 रुपये किलो तक पहुंची।
पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान-इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर जहां पूरी दुनिया में कच्चे तेल के आयात और निर्यात पर पड़ा है, वहीं अब धीरे-धीरे इसका प्रभाव लोगों के कई अन्य रोजमर्रा की जरूरी सामानों पर भी पड़ना शुरू हो गया है. इसमें तेल, कोल्ड ड्रिंक से लेकर पीने के पानी की कीमतों में इजाफा शामिल है. इन सामानों की पैकिंग के लिए जरूरी रॉ मेटेरियल की कमी के चलते इनकी कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है.
पैकिंग मैटेरियल को बनाने के लिए जरूरी रॉ मेटेरियल, जिसे आम भाषा में पेट रीजन कहा जाता है, की कमी के चलते इनकी कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है. पैकिंग मैटेरियल, जिसमें पीने के पानी या कोल्ड ड्रिंक की बोतल, खाने के तेल की बोतल, आचार, मसाले, ज्यूस, फाइनल या अन्य सामान पैक होता है, लगातार महंगा हो रहा है.
पैकिंग मेटेरियल को बनाने में किस चीज का होता है इस्तेमाल?
दरअसल, पैकिंग मेटेरियल को बनाने के लिए जरूरी पेट रीजन पेट्रोलियम का बाय प्रोडक्ट होता है. इसको बनाने में लिक्वीफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का भी इस्तेमाल हो रहा है. सरकार ने जब से एलपीजी की प्रोडक्शन बढ़ाने के आदेश दिए है, तब से इसका असर पेट रीजन पर दिखने लगा है.
पेट रीजन की कीमतों में इजाफे पर जम्मू के व्यापारियों ने क्या कहा?
जम्मू में पैकिंग मेटेरियल की फैक्ट्री के मालिकों का दावा है कि जब से ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच युद्ध की शुरुआत हुई है तब से पेट रीजन की कीमतों में 40 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है. युद्ध शुरू होने से पहले पेट रीजन के प्रति किलो की कीमत 90 रुपये थी, जो अब बढ़कर 140 रुपये प्रति किलो हो गई है. कीमत में हुए इजाफे के बाद भी रॉ मेटेरियल नहीं मिल रहा है, जिससे इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की चिंताएं बढ़ गई है. जबकि पेट रीजन की बढ़ती कीमतों के बीच इस व्यवसाय से जुड़े लोगों ने पैकिंग में काम आने वाली बोतलों और अन्य सामान की कीमतें बढ़ा दी है.
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