राघव चड्ढा समेत 4 सांसदों के शामिल होने से BJP की हो गई बल्ले-बल्ले! राज्यसभा में कितने हुए NDA के सांसद?
राघव चड्ढा समेत AAP के 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में विलय के बाद उच्च सदन में बीजेपी के संख्या बल में बढ़ोतरी होती दिख रही है. संजय सिंह ने राज्यसभा अध्यक्ष को लेटर सौंपने की बात कही है.

बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) की राज्यसभा में सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना है, क्योंकि आम आदमी पार्टी के एक सांसद ने कहा कि उच्च सदन में पार्टी के 10 सांसदों में से 7 सत्तारूढ़ दल में शामिल हो रहे हैं और उन्होंने इस बात की जानकारी उच्च सदन के अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन को दे दी है.
क्या कहता है कानून?
सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा में संसदीय दल के दो-तिहाई सदस्य इस्तीफा दे रहे हैं, जिनमें उच्च सदन के उपनेता अशोक मित्तल भी शामिल हैं. इसलिए दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन सदस्यों पर अयोग्यता का खतरा नहीं है. इस कानून के अनुसार, किसी भी दल में विलय के लिए पार्टी के दो-तिहाई निर्वाचित सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है. लोकसभा में भी आम आदमी पार्टी के 3 सांसद हैं. कानून के अनुसार सदन के अध्यक्ष को यह तय करना होगा कि विलय दल-बदल विरोधी कानून के तहत है या नहीं.
बीजेपी के पास कितने राज्यसभा सांसद?
वर्तमान में बीजेपी के 106 राज्यसभा सांसद हैं, जबकि एनडीए के पास 141 सांसद हैं (सात मनोनीत सदस्यों सहित). अब इन आंकड़ों के हिसाब से 113 और 148 तक पहुंचने की उम्मीद है. इसके अलावा बीजेपी को यह भी उम्मीद है कि साल के अंत तक जब 30 से अधिक सीटें खाली होंगी, तो वह कम से कम 5 और सीटें हासिल कर लेगी, जिससे उसकी कुल संख्या 163 के दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच जाएगी.
AAP छोड़ने के बाद क्या बोले राघव चड्ढा?
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के पूर्व उपनेता राघव चड्ढा ने कहा, "हमने फैसला किया है कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य भारत के संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए बीजेपी में विलय करेंगे." उन्होंने कहा कि 7 सांसदों ने इस संबंध में एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे राज्यसभा के अध्यक्ष को सौंप दिया गया है. घोषणा के बाद इन सभी सातों सांसदों ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की.
संजय सिंह का बयान
AAP नेता संजय सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “मैं राज्यसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपूंगा, जिसमें यह मांग की जाएगी कि राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को बीजेपी में शामिल होने के कारण राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जाए, क्योंकि यह संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत स्वेच्छा से अपनी मूल पार्टी की सदस्यता छोड़ने के बराबर है.”
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