अब बीच मझधार में नहीं फंसेंगे जहाज! APSEZ की पहल से भारत में शुरू हुई इमरजेंसी सुविधा, जानें कैसे मिलेगी मदद
जहाजों की सुरक्षा के लिए APSEZ ने देश में पहली बार ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ की शुरुआत की है. भारत की लंबी तटरेखा और व्यस्त समुद्री मार्गों को देखते हुए यह कदम काफी अहम माना जा रहा है.

भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को नई ताकत मिली है. अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) ने देश में पहली बार ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ की शुरुआत की है. इस पहल के जरिए अब समुद्र में आपात स्थिति का सामना कर रहे जहाजों को सुरक्षित ठिकाना और त्वरित मदद मिल सकेगी.
अब तक भारतीय समुद्री क्षेत्र में ऐसी कोई औपचारिक व्यवस्था मौजूद नहीं थी, जिसके तहत संकट में फंसे जहाजों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर लाकर हालात को नियंत्रित किया जा सके. इस नई सुविधा के शुरू होने से जहाजों की सुरक्षा, क्रू मेंबर्स की जान बचाने और पर्यावरण को नुकसान से बचाने में बड़ी मदद मिलेगी.
क्या होता है पोर्ट ऑफ रिफ्यूज
इंटरनेशनल मैरी टाइम आर्गनाइजेशन (IMO) के दिशा-निर्देशों के अनुसार ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ ऐसे स्थान होते हैं, जहां किसी दुर्घटना, तकनीकी खराबी या खराब मौसम में फंसे जहाज अस्थायी रूप से रुककर स्थिति को संभाल सकते हैं. यह व्यवस्था कई विकसित समुद्री देशों में पहले से लागू है लेकिन भारत में अब इसे पहली बार संस्थागत रूप दिया गया है.
दो अहम समुद्री ठिकानों को विकसित किया गया
APSEZ ने इस योजना के तहत दो अहम समुद्री ठिकानों को विकसित किया है. पश्चिमी तट पर स्थित दिघी पोर्ट अरब सागर और खाड़ी देशों की ओर जाने वाले जहाजों के लिए सहारा बनेगा, जबकि पूर्वी तट पर गोपालपुर पोर्ट बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य की दिशा में संचालित जहाजों के लिए राहत केंद्र की भूमिका निभाएगा. इन पोर्ट्स पर आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर फाइटिंग, प्रदूषण नियंत्रण, मलबा हटाने और रेस्क्यू ऑपरेशन जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी.
इस पहल को वैश्विक स्तर का समर्थन देने के लिए APSEZ ने SMIT Salvage, Royal Boskalis Westminster N.V. और Maritime Emergency Response Centre के साथ समझौता किया है. इससे किसी भी समुद्री हादसे के दौरान तेज, समन्वित और विशेषज्ञ सहायता सुनिश्चित की जा सकेगी.
कंपनी के सीईओ Ashwani Gupta ने कहा कि यह पहल देश की समुद्री तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में अहम उपलब्धि है. वहीं, डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग Shyam Jagannathan के अनुसार इससे आपातकालीन स्थितियों में बेहतर प्रतिक्रिया और समन्वय संभव होगा, जिससे जान-माल और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी.
भारत की लंबी तटरेखा और व्यस्त समुद्री मार्गों को देखते हुए यह कदम काफी अहम माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ की शुरुआत से भारत न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय समुद्री मानकों के करीब पहुंचेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार में उसकी भागीदारी भी और मजबूत होगी.
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