पश्चिम बंगाल में STF की बड़ी कार्रवाई, 3 पाकिस्तानी जासूस अरेस्ट
शुरुआती जांच में पता चला है कि अरेस्ट किए गए लोग जासूस के तौर पर काम कर रहे थे. अरेस्ट लोगों पर नकली नोटों के कारोबार में शामिल होने का भी आरोप है. पुलिस ने गहन जांच शुरू कर दी है.

पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशन टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने कूचबिहार जिले से शनिवार 15 अगस्त को तीन पाकिस्तानी जासूसों को अरेस्ट किया है. इन पर ISI एजेंट होने का भी आरोप है. अरेस्ट किए लोगों के नाम राशिदुल हक, नूर नासिरुद्दीन अली और शफीकुल इस्लाम हैं. जांच करने वाले अधिकारी अरेस्ट लोगों से पूछताछ करके जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं.
शुरुआती जांच में पता चला है कि अरेस्ट किए गए लोग जासूस के तौर पर काम कर रहे थे. अरेस्ट किए लोगों पर नकली नोटों के कारोबार में शामिल होने का भी आरोप है. पुलिस ने गहन जांच शुरू कर दी है. यह पता लगाने की कोशिश कर रही है, कि क्या वे इस महीने की शुरुआत में अरेस्ट किए गए अन्य पाकिस्तानी जासूसों से जुड़े थे.
आरोपियों को कूच बिहार की अदालत में पेश किया गया है. इन लोगों को साहेबगंज केस नंबर 442/26 (तारीख 14/08/26), BNS की धारा 61/152 और इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 24 के तहत अरेस्ट किया गया था.
मो. शफीकुल यूपी का रहने वाला है
मो. शफीकुल इस्लाम यूपी के दिनाजपुर के पंजीपाड़ा का रहने वाला है. मवेशियों की तस्करी में शामिल होने की बात मानी और बताया कि वह मवेशी तस्करी नेटवर्क के जरिए बांग्लादेश नागरिक अकबर उर्फ सम्राट के संपर्क में आया था. उसने अकबर को सिम कार्ड दिए थे. राशिदुल हक, प्रदीप्तो बसु, और विशाल कंचन के संपर्क में भी था. उसके फोन में अकबर से जुड़े बांग्लादेश नंबर, नकली नोटों की फोटो, वीडियो और वीडियोकॉल के स्क्रीनशॉट मिले हैं. इस कॉल का समय अकबर के बांग्लादेशी नंबर से हुई कॉल के समय से मेल खाता है. बताया जाता है कि उसके सिम का इस्तेमाल पाकिस्तान में किया गया था.
बरामद दस्तावेजों से गोलपोखर PS केस नंबर 339/2022 (IPC की धारा 489A/489C/489D) से संभावित संबंध का भी संकेत मिलता है. उसने नकली नोटों के प्रसार में सीधे तौर पर शामिल होने से इनकार किया, लेकिन डिजिटल और संपर्क से जुड़े सबूतों की और पुष्टि की जरूरत है.
कूचबिहार के रहने वाला नूर नसीरुद्दीन मवेशियों की तस्करी के नेटवर्क में शामिल पाया गया. ऐसी गतिविधियों के दौरान अकबर उर्फ सम्राट के संपर्क में आया. अकबर के कहने पर उन्होंने अपनी पहचान का इस्तेमाल करके दो भारतीय सिम कार्ड (7047775740 और 7318643994) हासिल किए और उन्हें जोहोर के जरिए बांग्लादेश भेजा.
उनके हैंडसेट में अकबर का बांग्लादेशी नंबर +8801785550447 सेव पाया गया. बताया जाता है कि वे 2018 में गैर-कानूनी तरीके से बांग्लादेश गए थे और कथित तौर पर अकबर द्वारा इस्तेमाल किए गए दो IMEI नंबरों से भी जुड़े थे. उनकी भूमिका से सिम-तस्करी नेटवर्क में उनकी संभावित भागीदारी का संकेत मिलता है, जो सीमा-पार या पाकिस्तान-आधारित इस्तेमाल में मदद करता था.
राशिदुल मुख्य ऑपरेटर के तौर पर आया सामने
राशिदुल हक सिम/नकली नोट नेटवर्क में एक मुख्य ऑपरेटर के तौर पर सामने आया. बताया कि शफीकुल के जरिए उनकी मुलाकात अकबर से हुई थी. उन्होंने 2023-2025 के दौरान नजीरहाट नयारहाट सीमावर्ती इलाकों में FICN (नकली भारतीय मुद्रा) की तस्करी में शामिल होने की बात कबूल की. इसमें लगभग 6-7 लाख रुपए की नकली मुद्रा शामिल थी.
उन्होंने मिट्ठू बर्मन का नाम सप्लायर के तौर पर लिया और दादा, हैदर और विशाल/कंचन जैसे FICN ग्राहकों के साथ अपने संबंधों का खुलासा किया. उन्होंने आगे बताया कि अकबर ने एक बार उनके SBI खाते में 2.5 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे, जो बाद में प्रदीप्तो बसु को भेज दिए गए. उनके बयान पर शफीकुल के संपर्कों और सिम/FICN से जुड़े सबूतों से एक संगठित सीमा-पार नेटवर्क की संभावना का संकेत मिलता है. इसकी पुष्टि के लिए CDR/SDR, वित्तीय और डिजिटल सबूतों की जरूरत है.





















