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कांग्रेस में बड़ा फेरबदल: जानिए किसका कद बढ़ा, किसका घटा

सोनिया गांधी की मदद के लिए बनी कमिटी में एके एंटनी, अहमद पटेल, अंबिका सोनी, केसी वेणुगोपाल, वासनिक और सुरजेवाला हैं. यहां छह में से तीन सोनिया गांधी के पुराने विश्वासपात्र हैं. वेणुगोपाल और सुरजेवाला राहुल गांधी के करीबी हैं.

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष की कमान दुबारा संभालने के करीब 13 महीने बाद सोनिया गांधी ने शुक्रवार को पार्टी के शीर्ष स्तर पर बड़े बदलाव करते हुए कांग्रेस वर्किंग कमिटी पुनर्गठित करने के साथ ही महासचिव और राज्यों के प्रभारियों की नियुक्ति की. सोनिया गांधी के सहयोग के लिए छह नेताओं की एक विशेष कमिटी भी गठित की गई है.

यह फेरबदल तब हुआ है जब कुछ दिनों पहले पार्टी के 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर संगठनात्मक सुधार की मांग की थी और इस चिट्ठी को लेकर बुलाई गई सीडब्ल्यूसी की बैठक बेहद हंगामेदार रही थी, ऐसे में दिलचस्पी यह जानने में है कि इस फेरबदल में किसका कद बढ़ा और किसका घटा?

बदलावों में राहुल गांधी का खेमा कितना हावी रहा और चिट्ठी लिखने वाले नेताओं के हाथ क्या आया? सवाल यह भी है कि क्या नई टीम भविष्य का कांग्रेस तैयार कर पाएगी?

फेरबदल को लेकर कांग्रेस में दो राय इस फेरबदल को लेकर कांग्रेस में दो राय है. एक पक्ष यह मानता है कि चिट्ठी लिखने वाले नेताओं के पर कतर दिए गए हैं और राहुल गांधी के चहेतों को खूब तरजीह मिली है. यह नजरिया ज्यादा चर्चा में है. वहीं दूसरी राय यह है कि सोनिया गांधी ने सबको साथ लेकर चलने की कोशिश की है और चिट्ठी गुट के दबाव में ही महीनों से पुराने लंबित फैसले एक झटके में हो गए. उनकी राय में राहुल की पसंद को प्राथमिकता मिलना लाजमी है लेकिन कोई भी चौंकाने वाला फैसला नहीं किया गया है. सच्चाई दोनों नजरिए के बीच में है.

किसे कहां मिली जगह

पहले बात नए महासचिवों की. सबसे बड़ा प्रमोशन मिला है रणदीप सुरजेवाला को जिन्हें राहुल गांधी का सबसे खास सिपहसालार माना जाता है. फिलहाल मीडिया प्रभारी का काम देख रहे रणदीप को महासचिव के साथ कर्नाटक का प्रभारी बनाया गया है. इसके साथ ही रणदीप को सोनिया गांधी के सहयोग के लिए बनी छह नेताओं की कमिटी में भी रखा गया है. उनके अलावा तारिक अनवर (केरल) और जितेंद्र सिंह (असम) को भी महासचिव बनाया गया है.

इन फैसलों पर राहुल गांधी की छाप साफ दिखाई देती है. प्रियंका गांधी (यूपी) , हरीश रावत(पंजाब), ओमन चांडी (आंध्र प्रदेश), केसी वेणुगोपाल (संगठन), अजय माकन (राजस्थान) और मुकुल वासनिक (मध्यप्रदेश) महासचिव के पद पर बरकरार रखे गए हैं. नौ महासचिवों में से मुकुल वासनिक को छोड़ बाकी सभी को राहुल गांधी का विश्वासपात्र माना जा सकता है.

मुकुल वासनिक चिट्ठी लिखने वाले नेताओं में शामिल थे. लेकिन संगठन के पुराने धुरंधर वासनिक को महासचिव के साथ-साथ सोनिया गांधी के सहयोग के लिए बनी विशेष कमिटी में भी जगह मिली है.

कुछ बुजुर्ग नेताओं को जिम्मेदारी से मुक्त किया गया

गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे, अंबिका सोनी, मोतीलाल वोरा, लुइजिन्हों फलेरियो आदि को महासचिव पद से हटाया गया है. इसे चिट्ठी लिखने वाले गुट के सबसे बड़े चेहरे गुलाम नबी आजाद पर कार्रवाई के तौर पर पेश किया जा रहा लेकिन इन सारे बुजुर्ग नेताओं को उनकी उम्र की वजह से जिम्मेदारी से मुक्त किया गया है. कुछ नेताओं ने तो इस संबंध में खुद ही पार्टी आलाकमान से आग्रह किया था.

फेरबदल की बड़ी बातें बड़ी बात यह है कि चिट्ठी गुट के अगुआ गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा वर्किंग कमिटी के सदस्य के तौर पर बरकरार रखा गया है. उनके साथ राहुल गांधी, मनमोहन सिंह, अहमद पटेल, एके एंटनी, अम्बिका सोनी, मल्लिकार्जुन खड़गे भी सीडब्ल्यूसी के सदस्य बनाए गए हैं. पी चिदंबरम को सीडब्ल्यूसी सदस्य बनाया गया है. इससे पहले चिदम्बरम स्थाई आमंत्रित सदस्य थे.

तरुण गोगोई, गईखंगम और रघुवीर सिंह मीना को भी सीडब्ल्यूसी का सदस्य बनाया गया है. मोतीलाल वोरा की सीडब्ल्यूसी से छुट्टी हो गई है. यानी भले ही सीडब्ल्यूसी का चुनाव करवाने की चिट्ठी गुट की मांग के बावजूद सोनिया गांधी सीडब्ल्यूसी को मनोनीत कर दिया लेकिन नाराज गुट के दोनों बड़े चेहरों को इसमें बरकरार रखा गया है. जबकि दोनों ने मीडिया में खुल कर बयानबाजी भी की थी. राज्यों के प्रभारी

जितिन प्रसाद को पश्चिम बंगाल, राजीव शुक्ला को हिमाचल प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है. राजीव सातव (गुजरात), शक्ति सिंह गोहिल (बिहार, दिल्ली) , पीएल पुनिया (छत्तीसगढ़) , आरपीएन सिंह (झारखंड) को पहले वाले राज्यों में ही बरकरार रखा गया है. वरिष्ठ नेता एचके पाटिल को महाराष्ट्र तो युवा नेताओं देवेंद्र यादव को उत्तराखंड और विवेक बंसल को हरियाणा का प्रभारी बनाया गया है.

मनीष चतरथ को अरुणाचल प्रदेश और मेघालय का प्रभारी बना कर प्रोमोट किया गया है. मनिकम टैगोर, कुलजीत नागरा को भी प्रभारी बनाया गया है. चेल्ला कुमार और रजनी पाटिल के राज्य बदले गए हैं. सत्रह प्रभारियों में से जो नए नाम हैं उनमें एक-दो को छोड़ कर बाकी राहुल गांधी की पसंद कहे जा सकते हैं. इनमें एक-दो को छोड़कर बाकियों का राजनीतिक कद सवालों के घेरे में है.

यहां महत्वपूर्ण यह भी है कि चिट्ठी लिखने वाले जितिन प्रसाद का पार्टी में कद बढ़ाया तो गया है लेकिन उनके अपने गृहराज्य उत्तरप्रदेश में उन्हें नजरंदाज किए जाने की बात कही जाती है. ऐसे में कहना मुश्किल है कि पश्चिम बंगाल का प्रभारी बना कर जितिन को इनाम दिया गया है या सजा दी गई है!

वापसी करने वालों में शामिल हैं दो अहम नाम वापसी करने वालों में दो अहम नाम है दिग्विजय सिंह और प्रमोद तिवारी का जिन्हें कांग्रेस वर्किंग कमिटी में स्थाई आमंत्रित सदस्य बनाया गया है. इसके अलावा जयराम रमेश, सलमान खुर्शीद, अधीर रंजन चौधरी, अविनाश पांडे को भी सीडब्ल्यूसी का विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है. मधुसूदन मिस्त्री को कांग्रेस के केंद्रीय चुनाव ऑथॉरिटी की कमान सौंपी गई है. जिसका मतलब है कि आने वाले दिनों में अगले अध्यक्ष के चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज होंगी. दिलचस्प है कि इस कमिटी में चिट्ठी लिखने वाले अरविंदर सिंह लवली को भी सदस्य बनाया गया है. दरअसल चिट्ठी गुट ने पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया का मुद्दा भी उठाया था.

सोनिया गांधी ने सबको साथ लेकर चलने की कोशिश की है कुल मिला कर वाकई सोनिया गांधी ने सबको साथ लेकर चलने की कोशिश की है लेकिन फेरबदल में राहुल गांधी के पसंदीदा नेताओं का कद खूब बढ़ा है. संगठन में काम करने वालों को ज्यादा महत्वपूर्ण जगहों पर रखा गया है. चिट्ठी गुट वाले बड़े नेताओं का कद छोटा नहीं किया गया है ताकि विवाद ना बढ़े. लेकिन मनीष तिवारी, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कपिल सिब्बल, मिलिंद देवड़ा, वीरप्पा मोइली, राज बब्बर, शशि थरूर जैसे नेताओं को नजरअंदाज कर सोनिया ने सन्देश भी साफ तौर पर दिया गया है. हालांकि इसकी काट में यह कहा जा रहा है कि इन नेताओं में हुड्डा को छोड़ कर कुछ के पास संगठन का अनुभव नहीं है तो कुछ की संगठन में काम करने की रुचि नहीं है.

सोनिया गांधी के बाद अध्यक्ष कौन बनेगा? यह फेरबदल कांग्रेस की कार्यप्रणाली और किस्मत किस हद तक बदलेगा यह तो भविष्य बताएगा लेकिन असली सवाल अब भी वही है कि सोनिया गांधी के बाद अध्यक्ष कौन बनेगा? क्या राहुल गांधी की वापसी होगी या दो दशक बाद गांधी परिवार के बाहर का कोई नेता पार्टी की कमान संभालेगा! कांग्रेस की पिक्चर अभी बाकी है..

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