SIR विवाद के बीच महाराष्ट्र CEO ने भी उठाए सवाल! EC को लिखा मेल, की ये डिमांड
महाराष्ट्र SIR के बीच महाराष्ट्र CEO एस. चोकलिंगम ने ECINet सॉफ्टवेयर में बदलाव की मांग की है. जानें ERO के अधिकार, लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी और 2.07 करोड़ ड्राफ्ट वोटर नाम कम होने की पूरी जानकारी.

महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ECINet पर सवाल उठ रहे हैं. महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर ECINet में बदलाव की मांग की है. उनका कहना है कि स्थानीय चुनाव अधिकारियों यानी ERO को कानून के तहत जो अधिकार मिले हैं, उन्हें सॉफ्टवेयर के जरिए भी इस्तेमाल करने की सुविधा मिलनी चाहिए.
एस. चोकलिंगम ने 24 सितंबर को चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों को ईमेल भेजा था. इसमें उन्होंने SIR के दौरान नोटिस पाने वाले वोटरों से जुड़े मामलों में ERO को ज्यादा फैसला लेने की सुविधा देने की मांग की. महाराष्ट्र CEO ने खास तौर पर कहा कि ERO यह तय कर सकें कि किस मामले में वोटर को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत है और किस मामले में जमा किए गए कागजों के आधार पर फैसला किया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि वोटरों को ऐसे दूसरे कागज जमा करने की अनुमति होनी चाहिए जो चुनाव आयोग की तय सूची में नहीं हैं, लेकिन उनकी पहचान या जानकारी को साबित करते हैं.
लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी क्या है?
SIR के दौरान लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति वोटर नहीं है. यह वोटर की मौजूदा जानकारी और पुरानी SIR की वोटर लिस्ट में दर्ज जानकारी के बीच अंतर को बताया जाता है. मसलन, वोटर के नाम या सरनेम में अंतर होना, माता-पिता के नाम का मेल नहीं खाना या वोटर और उसके माता-पिता की उम्र में असामान्य अंतर होना ऐसी गड़बड़ियों में शामिल हो सकता है. कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति को कई लोगों के माता-पिता के रूप में मैप किया जाना भी इस श्रेणी में आ सकता है. ऐसी स्थिति में वोटर को अपनी जानकारी सही साबित करने के लिए कागज देने पड़ सकते हैं. महाराष्ट्र के CEO ने पहले भी कहा था कि जरूरी प्रमाण उपलब्ध नहीं होने पर आयोग की तय सूची में दिए गए कागज या उनके बराबर दूसरे कागज जमा किए जा सकते हैं.
ERO की शक्तियों को लेकर पहले भी उठे सवाल
ECINet को लेकर चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी पहले चिंता जता चुके हैं. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ने कई मौकों पर यह मुद्दा उठाया कि सॉफ्टवेयर और IT सिस्टम के कारण जमीन पर काम करने वाले अधिकारियों की भूमिका सीमित हो रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक, संधू ने अगस्त में कहा था कि वोटर लिस्ट से जुड़े काम की जिम्मेदारी कानून के तहत CEO, DEO और ERO जैसे अधिकारियों की है, लेकिन सिस्टम में एक्सेस का नियंत्रण केंद्रीकृत होने से उनके काम में परेशानी आ रही है. चुनाव आयोग ने हालांकि कहा है कि अधिकारियों को ECINet में उनके कानूनी अधिकारों के हिसाब से ही एक्सेस दिया गया है. आयोग ने 26 सितंबर को ECINet की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला भी किया.
महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 21.1 फीसदी नाम कम हुए
महाराष्ट्र में SIR के बाद 31 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई थी. इसमें करीब 9.78 करोड़ वोटरों की संख्या घटकर 7.71 करोड़ रह गई. यानी ड्राफ्ट सूची में करीब 2.07 करोड़ नाम कम हुए, जो कुल वोटरों का लगभग 21.1 प्रतिशत है. हालांकि चुनाव आयोग ने साफ किया है कि ड्राफ्ट सूची में कम हुए नामों को अंतिम रूप से हटाए गए वोटर नहीं माना जाना चाहिए. दावे और आपत्तियों के बाद नामों में बदलाव हो सकता है. महाराष्ट्र की अंतिम वोटर लिस्ट 16 नवंबर को जारी होनी है.
नोटिस वाले वोटरों को अब क्या राहत मिली?
महाराष्ट्र CEO की मांग के बाद चुनाव आयोग ने नोटिस पाने वाले वोटरों के लिए प्रक्रिया में बदलाव किया है. अब ऐसे लोगों को हर मामले में ERO या AERO के कार्यालय में जाकर सुनवाई के लिए बुलाना जरूरी नहीं होगा. बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO वोटर के घर जाकर जरूरी कागज ले सकते हैं और उन्हें ECINet पर अपलोड कर सकते हैं. इसके बाद ERO मामले की जांच करके फैसला करेगा. केवल खास मामलों में ही व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत होगी.






















