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बोफोर्स के 30 साल बाद सेना को मिलीं तोपें, अमेरिका से दिल्ली पहुंची एम-777

नई दिल्ली : सेना के लिए बेहद जरुरी एम-777 (एम-ट्रिपल सेवन) तोपें आज भारत पहुंच गईं. 30 साल में ये पहली बार है कि कोई तोप भारतीय सेना के जंगी बेड़े में शामिल हुई है. 80 के दशक के आखिर में भारतीय सेना को स्वीडन से बोफोर्स तोप मिलीं थीं. लेकिन, बोफोर्स सौदे में हुई दलाली और घोटालों के आरोपों के बाद से कोई तोप भारतीय सेना को नहीं मिल पाई थी.

अब बोफोर्स सौदे की काली छत्र छाया से भारत बाहर निकल आया है

अब बोफोर्स सौदे की काली छत्र छाया से भारत बाहर निकल आया है. जानकारी के मुताबिक, आज तड़के दो एम-ट्रिपल सेवन तोपें दिल्ली एयरपोर्ट पहुंची. कस्टम क्लीयरेंस के बाद इन तोपों को सीधे दिल्ली कैंट से राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज ले जाया जायेगा. पोखरण में दोनों तोपों से गोलें दागकर टेस्ट किया जायेगा. हालांकि इन तोपों के सभी परीक्षण पहले ही पूरे हो चुके हैं.

आर्टेलेरी के आधुनिकरण के साथ जोड़ने में लगातार मदद करते रहेंगे

एम-777 तोपें बनाने वाली कंपनी बीएई सिस्टम्स ने एक बयान जारी कर कहा है कि “यूएस द्वारा मिलेट्री सेल्स के जरिए भारत को दिए जाने वाली 145 एम-777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर के करार को पूरा करने के लिए हमें ये बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि पहली दो तोपें समय से पहले इस हफ्ते भारत पहुंच रही हैं.” बीईए ने अपने बयान में आगे कहा कि हम अमेरिकी सरकार को इस नई वेपन प्रणाली को भारतीय सेना की आर्टेलेरी के आधुनिकरण के साथ जोड़ने में लगातार मदद करते रहेंगे.”

अमेरिका की बीईए कंपनी से 145 तोपें खरीदने का सौदा किया था

दरअसल, भारत ने पिछले साल ही अमेरिका की बीईए कंपनी से 145 तोपें खरीदने का सौदा किया था. इस सौदे की कीमत करीब 2900 करोड़ रुपये हैं. इस सौदे के तहत 155x39 कैलेबर की 25 तोपों तो सीधे अमेरिकी कंपनी से आएंगी और बाकी 120 भारत में ही ‘एसेम्बल’ की जायेंगी. इन 120 तोपों की एसेम्बलींग के लिए बीएई ने भारतीय कंपनी, महिंद्रा से करार किया है. इन तोपों की रेंज 24 से 40 किलोमीटर तक की है.

अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोंपों को भारतीय सेना की नई माउंटन स्ट्राइक कोर के लिए खरीद रहा है

सेना के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, भारत ने अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोंपों को भारतीय सेना की नई माउंटन स्ट्राइक कोर के लिए खरीद रहा है. ये नई माउंटन स्ट्राइक कोर पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में तैयार की जा रही है. इस 17वीं स्ट्राइक कोर (भारतीय सेना की कुल 14 कोर हैं) को चीन के किसी भी नापाक इरादों को ध्वस्त करने के लिए तैयार किया जा रहा है. भारत की इस कोर को ‘ब्रह्मास्त्र’ का नाम दिया गया है.

ताकि युद्ध की परिस्तथितियों में इन्हें जल्द से जल्द सीमा पर पहुंचा दिया जाए

ये तोपें इसलिए खरीदी गई हैं ताकि युद्ध की परिस्तथितियों में इन्हें जल्द से जल्द सीमा पर पहुंचा दिया जाए. ये इतनी हल्की तोपें हैं कि इन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए भी उंचाई वाले इलाकों में पहुंचा दिया जाए (जैसा इलाका चीन से सटा हुआ है अरुणचाल प्रदेश, सिक्किम और लद्दाख में है). भारतीय वायुसेना का सुपरहरक्युलिस मालवाहक विमान ऐसी दो तोपों को आसानी से किसी भी जगह कुछ ही घंटो में पहुंचा सकता है.

भारतीय सेना को 169 आर्टेलेरी रेजीमेंट तैयार करनी है

जानकारी के मुताबिक, 2012 तक अमेरिका से ये सभी 145 तोपें भारतीय सेना को मिल जायेंगी. ‘आर्टेलेरी प्लान 2027’ प्लान के तहत भारतीय सेना को 169 आर्टेलेरी रेजीमेंट तैयार करनी है. इन रेजीमेंट के लिए भारत को कम से कम साढ़े तीन हजार (3503) तोपों की जरुरत है. भारत के पास फिलहाल सिर्फ बोफोर्स तोपें ही हैं. करगिल युद्ध में ये तोपों अपना माद्दा साबित कर चुकी है. बोफोर्स तोपों की बैटरी (तोप की रेजीमेंट को बैटरी कहा जाता है) ज्यादातर करगिल और कश्मीर में एलओसी पर तैनात है.

करगिल युद्ध के बाद ही भारत ने तोपों को खरीदने की शुरुआत की

क्योंकि ये तोपें 40 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं. लेकिन, अब ये काफी पुरानी पड़ गई है. करगिल युद्ध के बाद ही भारत ने तोपों को खरीदने की शुरुआत की. लेकिन, बोफोर्स के बाद भी तोप खऱीद सौदों में भष्ट्राचार के आरोप लगते रहे. 2005 में दक्षिण अफ्रीका के कंपनी डेनेल और फिर 2009 में सिंगापुर टेक्नोलोजी के साथ होने वाले सौदे भी घूस और दलाली के आरोपों के चलते ठंडे बस्ते में डाल दिए गए. यही वजह है कि मोदी सरकार ने एम-777 गन्स के लिए अमेरिकी सरकार से सीधे करार किया.

भारत ने हाल ही में प्राईवेट कंपनी, एलएंडटी के साथ 100 तोपों का करार किया

भारत ने हाल ही में प्राईवेट कंपनी, एलएंडटी के साथ 100 तोपों का करार किया है. एलएंडटी ये तोपें दक्षिण कोरिया की कंपनी, हानवा-टेक के साथ मिलकर तैयार कर रही है. इसी महीने रक्षा मंत्रालय ने इन 100 तोपों के लिए 4366 करोड़ रुपये का सौदा किया है. बोफोर्स की तर्ज पर भारत के रक्षा उपक्रम, ओर्डिनेस फैक्टरी बोर्ड यानि ओएफबी ने धनुष तोपों को तैयार किया है. इन तोपों का आखिरी परीक्षण इनदिनों चल रहा है.

इन तोपों को इस बार 26 जनवरी की परेड में भी प्रदर्शित किया गया था

इन तोपों को इस बार 26 जनवरी की परेड में भी प्रदर्शित किया गया था. सेना ने ओएफबी से फिलहाल 114 तोपों का करार किया है 1260 करोड़ रुपये में. पूरा प्लान 414 गन्स खरीदना का है. इन तोपों को ओएफबी की जबलपुर स्थित कारखाने में तैयार किया जा रहा है. साथ ही एडवांस टोय्ड आर्टेलेरी गन सिस्टम को डीआरडीओ ने प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलकर तैयार किया है जो जल्द ही सेना के तोपखाने में शामिल हो जायेगी.

55x52 कैलिबर की इस एटीएजीएस तोप की रेंज करीब 40 किलोमीटर है

155x52 कैलिबर की इस एटीएजीएस तोप की रेंज करीब 40 किलोमीटर है. ये पूरी तरह से स्वदेशी तोप है जिसका डिजाइन डीआरडीओ ने तैयार किया है और तैयार किया है टाटा और भारत फोर्ज नाम की कंपनी ने. इन तोपों के ट्रायल चल रहे हैं जिसके बाद इन्हें थलसेना के बेड़े में शामिल कर लिया जायेगा. डीआरडीओ के डीजी पी के मेहता ने एबीपी न्यूज को बताया कि एटीएजीएस तोप अपने समांतर सभी तोपों में सबसे बेहतर है.

अगर रिजल्ट अच्छे रहे तो इन तोपों को एक्सपोर्ट भी किया जायेगा

मेहता के मुताबिक अगर रिजल्ट अच्छे रहे तो इन तोपों को एक्सपोर्ट भी किया जायेगा. (26 जनवरी पर चली थी ये स्टोरी, फीड निकाल लें.) इस साल गणतंत्र दिवस परेड में एटीएजीएस के साथ साथ ओएफबी, जबलपुर द्वारा तैयार की गई धनुष तोप भी शामिल है.

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