पश्चिम बंगाल के बाद लद्दाख में भी इस्तीफा, कवींद्र गुप्ता ने छोड़ा उपराज्यपाल का पद
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने गुरुवार (5 मार्च) को इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अचानक इस्तीफा क्यों दिया इसकी वजह अब तक साफ नहीं हो पाई है.

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने गुरुवार (5 मार्च) को इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अचानक इस्तीफा क्यों दिया, इसकी वजह अब तक साफ नहीं हो पाई है. गुप्ता के अचानक इस्तीफे से लद्दाख की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, उनका इस्तीफा उस समय आया, जब पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इस्तीफा दिया है.
बढ़ी सियासी हलचल
कविंद्र गुप्ता के अचानक इस्तीफा देने से सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि उन्होंने किन वजहों से उपराज्यपाल का पद छोड़ा है. अब देखना होगा कि किसे लद्दाख के उपराज्यपाल की कमान सौंपी जाती है.
जुलाई 2025 में बने थे लद्दाख के उपराज्यपाल
बता दें कि बीते साल (जुलाई 2025) में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के नए उपराज्यपाल (एलजी) बने थे. वह लद्दाख के तीसरे उपराज्यपाल थे, जिन्होंने ब्रिगेडियर बी डी मिश्रा की जगह लद्दाख के गवर्नर का पद संभाला था. बीडी मिश्रा से पहले आर के माथुर उपराज्यपाल थे, जिन्हें 2019 में जम्मू और कश्मीर राज्य के दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजन के बाद लद्दाख का पहला उपराज्यपाल नियुक्त किया गया था.
कौन हैं कविंद्र गुप्ता?
कविंद्र गुप्ता जम्मू शहर के जानीपुर इलाके से ताल्लुक रखते हैं. उनके पास सरकार और पार्टी दोनों में काम करने का लंबा अनुभव है. 2018 में भाजपा-पीडीपी सरकार के दौरान 51 दिनों के लिए जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री रहे थे. उन्होंने तब पद छोड़ दिया, जब भाजपा ने महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था. वह 2005 से 2010 के बीच में तीन कार्यकालों के लिए जम्मू के महापौर के रूप में भी काम कर चुके हैं. 1993 से 1998 तक लगातार दो कार्यकालों के लिए भारतीय जनता युवा मोर्चा की जम्मू-कश्मीर इकाई का नेतृत्व कर चुके हैं.
2014 के विधानसभा चुनावों वह गांधी नगर सीट से विधायक बने थे. उन चुनावों में पीडीपी-भाजपा गठबंधन की जीत के बाद, गुप्ता को सर्वसम्मति से सदन का अध्यक्ष चुना गया था. वह वीएचपी के सचिव भी रह चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने इमरजेंसी के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यकर्ता के रूप में लगभग 13 महीने जेल में बिताए.
Source: IOCL
























