कर्नाटक: वोटर लिस्ट में नाम हटाने पर CEO का बड़ा बयान, कहा-'अभी तक...'
कर्नाटक SIR में 43.82 लाख नोटिस जारी हुए हैं और 91,278 फॉर्म 7 आवेदन मिले हैं. CEO वी. अंबुकुमार ने कहा कि अभी किसी वोटर का नाम नहीं हटाया गया है.

कर्नाटक में वोटर लिस्ट के SIR को लेकर विवाद के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार ने सोमवार (5 अक्तूबर 2026) को स्थिति साफ की. उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक 43.82 लाख से ज्यादा नोटिस जारी किए गए हैं. वहीं 4 अक्टूबर तक वोटर लिस्ट से नाम हटाने या किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति से जुड़े Form 7 के 91,278 आवेदन मिले हैं. हालांकि, इनमें से किसी आवेदन के आधार पर अभी तक किसी वोटर का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया गया है.
अंबुकुमार ने कहा कि सिर्फ फॉर्म 7 आवेदन मिलने से किसी वोटर का नाम सीधे नहीं हटाया जा सकता. संबंधित ERO को पहले नोटिस देना होता है. इसके बाद आपत्ति करने वाले व्यक्ति और संबंधित वोटर, दोनों की सुनवाई होती है. दस्तावेजों की जांच के बाद ही ERO नाम हटाने या उसे वोटर लिस्ट में बनाए रखने का फैसला कर सकता है.
43.82 लाख नोटिस जारी, 99.40 फीसदी की डिलीवरी
CEO ऑफिस के अनुसार, कर्नाटक में SIR के दौरान कुल 43,82,313 नोटिस जारी किए गए हैं. इनमें से 43,55,818 नोटिस वोटरों तक पहुंच चुके हैं, जबकि 26,495 नोटिस की डिलीवरी अभी बाकी है. इस तरह नोटिस की कुल डिलीवरी 99.40 फीसदी हो चुकी है. डिलीवर किए गए नोटिस में से 36,89,063 मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है. यह संख्या करीब 84.69 फीसदी है. वहीं 6,66,755 मामलों की सुनवाई अभी बाकी है.
फॉर्म 7 को लेकर क्या है विवाद?
फॉर्म 7 का इस्तेमाल मौजूदा वोटर लिस्ट से किसी नाम को हटाने की मांग करने या वोटर लिस्ट में किसी नए नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है. कर्नाटक में इस समय फॉर्म 7 को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है. मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया है कि बड़ी संख्या में फॉर्म 7 दाखिल कर योग्य वोटरों के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने इस मामले की जांच की मांग भी की थी. दूसरी ओर, CEO वी. अंबुकुमार ने कहा है कि फॉर्म 7 के जरिए अभी तक किसी वोटर का नाम नहीं हटाया गया है. उन्होंने ERO को निर्देश दिया है कि अगर जांच में किसी आवेदन में जानबूझकर गलत जानकारी या गलत घोषणा पाई जाती है तो कानून के तहत कार्रवाई की जाए.
गलत जानकारी देने पर हो सकती है कार्रवाई
CEO ऑफिस ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति फॉर्म 6, फॉर्म 6A, फॉर्म 7 या फॉर्म 8 में जानबूझकर गलत जानकारी देता है या गलत घोषणा करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. इसके लिए पहले RER 1960 के Rule 20 के तहत जांच होगी. जांच में आरोप सही पाए जाने पर RPA, 1950 की सेक्शन 31 के तहत कार्रवाई की जा सकती है. अंबुकुमार ने यह भी कहा कि उनके कार्यालय की ओर से इस मामले में अभी तक कोई केस दर्ज नहीं कराया गया है.
16 जून से 22 लाख से ज्यादा आवेदन
CEO ऑफिस के आंकड़ों के अनुसार, 16 जून से 4 अक्टूबर के बीच कर्नाटक में कुल 22,05,171 आवेदन मिले हैं. इनमें फॉर्म 6 के 9,10,732 आवेदन, फॉर्म 6A के 4,677 आवेदन, फॉर्म 7 के 91,278 आवेदन और फॉर्म 8 के 11,98,484 आवेदन शामिल हैं. इनमें फॉर्म 7 के 91,278 आवेदनों में किसी नए नाम को वोटर लिस्ट में शामिल करने पर आपत्ति वाला आवेदन शून्य बताया गया है.
बीदर में सबसे ज्यादा फॉर्म 7 आवेदन
जिलेवार आंकड़ों में बीदर सबसे ऊपर है. यहां 5,953 फॉर्म 7 आवेदन मिले हैं. इसके बाद शिवमोग्गा में 5,936 और दक्षिण कन्नड़ में 5,534 आवेदन मिले हैं. बेलगावी में 4,002, तुमकुरु में 4,568, विजयपुरा में 3,808 और मैसूरु में 3,090 फॉर्म 7 आवेदन मिले हैं. बेंगलुरु अर्बन में 3,365, BBMP नॉर्थ में 1,842, BBMP साउथ में 1,707 और BBMP सेंट्रल में 1,659 आवेदन दर्ज हुए हैं.
आखिरी सुनवाई 12 अक्टूबर को
CEO ऑफिस के मुताबिक SIR प्रक्रिया के तहत आखिरी सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी. दावों और आपत्तियों के निपटारे तथा नोटिस से जुड़े चरण को पूरा करने की अंतिम तारीख 22 अक्टूबर बताई गई है. राजनीतिक दलों के अनुरोध पर नो मैपिंग और एनोमेलिस कैटेगरी में नोटिस पाने वाले लोगों की सूची भी CEO की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है.
वोटर अपना नाम कैसे चेक करें?
CEO ऑफिस ने उन वोटरों के लिए भी सफाई दी है जिन्हें ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपने पुराने पार्ट या सीरियल नंबर पर नाम नहीं मिल रहा है. अधिकारियों के मुताबिक पोलिंग स्टेशन के पुनर्गठन और वोटरों की दोबारा क्रम संख्या तय होने के कारण पार्ट नंबर और सीरियल नंबर बदल सकते हैं. ऐसे वोटर अपना नाम EC के वोटर पोर्टल या ECINET ऐप पर EPIC नंबर के जरिए खोज सकते हैं.
फिलहाल कर्नाटक में SIR और फॉर्म 7 को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं. चुनाव अधिकारियों का कहना है कि किसी भी वोटर का नाम हटाने से पहले तय कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई पूरी करना जरूरी है. इसलिए Form 7 आवेदन मिलने और वास्तव में किसी नाम के वोटर लिस्ट से हटने के बीच अंतर समझना जरूरी है.






















