CJP नेता सौरव दास को मेंटर करने की बात गलत, पूर्व जज संजय किशन कौल बोले- 'भाषा ठीक रखें'
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास के साथ अपने संबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संजय किशन कौल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी दास का मार्गदर्शन नहीं किया.

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संजय किशन कौल ने पार्टी नेता सौरव दास के साथ अपने संबंधों को लेकर सफाई दी है. समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने कभी सौरव दास का मार्गदर्शन नहीं किया. वह एक पत्रकार के रूप में उनसे एक-दो बार मिले थे और इस दौरान उन्होंने दास को अपनी भाषा थोड़ी संयमित रखने की सलाह दी थी.
न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि अलग-अलग पीढ़ियों की बातचीत की शैली अलग होती है और नई पीढ़ी की भाषा कभी-कभी पुरानी पीढ़ी के लोगों को असहज कर सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि वह सीजेपी के युवा कार्यकर्ताओं को कोई सलाह नहीं देना चाहते, क्योंकि उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया जा सकता है.
सौरव दास से मुलाकात को लेकर क्या बोले पूर्व न्यायाधीश?
सौरव दास के साथ अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने कहा कि करीब एक साल पहले दिवाली के मौके पर उनकी एक तस्वीर खींची गई थी. अब इस तस्वीर का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए किया जा रहा है कि उनकी कोई खास विचारधारा है या वह सौरव दास का मार्गदर्शन करते हैं. उन्होंने कहा कि जब यह मुलाकात हुई थी, तब सौरव दास खबरों में भी नहीं थे.
न्यायमूर्ति कौल ने बताया कि सौरव दास एक पत्रकार थे और उनसे एक-दो बार मुलाकात हुई थी. दिवाली के समय दास ने उनसे मिलने आने का आग्रह किया था. उस समय वह कहीं और जा रहे थे, लेकिन उन्होंने कुछ देर के लिए वहां जाने की बात मान ली. उन्होंने कहा, "वह चाहते थे कि मैं दिवाली के समय जरूर आऊं. मैं कहीं और जा रहा था. मैंने कहा कि ठीक है, दस मिनट के लिए आ जाऊंगा. मैंने अपनी पत्नी से कहा कि कॉफी पीकर दस मिनट में लौट आएंगे और फिर वहां से चले जाएंगे. बस, इतना ही हुआ था."
'मैंने उनका मार्गदर्शन नहीं किया, सिर्फ भाषा संयमित रखने को कहा'
जब न्यायमूर्ति कौल से पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी सौरव दास का मार्गदर्शन किया था, तो उन्होंने इससे इनकार किया. हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि एक-दो मुलाकातों के दौरान उन्होंने दास को अपनी भाषा पर ध्यान देने की सलाह दी थी. उन्होंने कहा, "मैं उनका मार्गदर्शन नहीं कर रहा था, लेकिन जब वह एक-दो बार मुझसे मिले, तो मैंने उनसे कहा कि मैं हमेशा यही कहूंगा कि अपनी भाषा थोड़ी संयमित रखें."
न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि उनकी पीढ़ी में बातचीत के दौरान अधिक शालीन भाषा का इस्तेमाल किया जाता था. नई पीढ़ी, खासकर जेनरेशन जेड (Gen Z), की भाषा कई बार अलग होती है. ऐसे में दोनों पीढ़ियों के बीच बातचीत के तरीके का अंतर असहजता पैदा कर सकता है.
'कभी-कभी भाषा से हमें तकलीफ होती है'
यह पूछे जाने पर कि क्या इस तरह की भाषा अदालतों तक पहुंच सकती है और क्या यह चिंता का विषय है, न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि लोगों को अपनी भाषा में संयम बरतना चाहिए. उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि लोगों को अपनी भाषा के मामले में कुछ कदम पीछे हटना चाहिए, कम से कम हमारी पीढ़ी के लोगों के लिए. हम इस तरह की भाषा के आदी नहीं हैं, इसलिए कई बार इससे हमें तकलीफ होती है." जब उनसे पूछा गया कि क्या वह सीजेपी के युवा कार्यकर्ताओं को अपना आक्रामक रवैया कम करने की सलाह देंगे या बदलाव लाने के लिए ऐसा रवैया जरूरी है, तो उन्होंने कोई विशेष सलाह देने से इनकार कर दिया. न्यायमूर्ति कौल ने हंसते हुए कहा, "मैं उन्हें किसी भी तरह की सलाह नहीं देना चाहूंगा. कल खबर आ जाएगी कि मैं उन्हें सलाह दे रहा हूं!" इसके बाद उन्होंने कहा कि इसी तरह बात का गलत अर्थ निकाला जाने लगता है.






















