एक्सप्लोरर

आपातकाल के बाद अपने गढ़ रायबरेली में हारने वाली इंदिरा गांधी ने कैसे की सत्ता में वापसी ?

1977 में अापातकाल के बाद अपने ही गढ़ रायबरेली में चुनाव हार चुकीं इंदिरा के लिए सत्ता की वापसी आसान नहीं थी. उनके लिए ‘लाइफलाइन’ बना कर्नाटक उपचुनाव जिसके जरिए उन्होंने सत्ता में वापसी का रास्ता बनाया.

नई दिल्ली: साल 1975,  भारतीय राजनीति का वह साल जिसे गैर कांग्रेसी दल इतिहास का काला अध्याय बताते हैं. यही वह साल था जब देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में अापातकाल लगाया था. दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी को चुनावों में धांधली करने का दोषी पाया था और 12 जून 1975 को जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने अपने फैसले में उनके रायबरेली से सांसद के रूप में चुनाव को अवैध करार दे दिया. अदालत ने साथ ही अगले छह साल तक उनके कोई भी चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी. इलाहाबद कोर्ट के फैसले के बाद इंदिरा के पास प्रधानमंत्री पद छोड़ने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था. 25 जून, 1975 की आधी रात से आपातकाल लागू करने का फैसला इसी कारण लिया गया था.

थोड़ा पीछे जाकर इस पूरे मामले को समझें तो मार्च 1971 में हुए आम चुनावों के नतीजे इसकी वजह रहे थे. उस चुनाव में कांग्रेस पार्टी को जबरदस्त जीत मिली थी. कांग्रेस ने 518 सीटों में से दो तिहाई से भी ज्यादा (352) सीटों पर जीत दर्ज की थी.

1971 के चुनाव में इंदिरा अपनी पुरानी सीट रायबरेली से चुनाव लड़ीं और जीत दर्ज की. इस चुनाव में उनके प्रतिद्वंदी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी राजनारायण थे. उन्होंने नतीजे आने के बाद इंदिरा पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए इलाहाबाद कोर्ट में केस कर दिया. इस केस में राजनारायण की तरफ से शांतिभूषण केस लड़ रहे थे. उन्होंने अपनी दलीलों से साबित कर दिया कि इंदिरा ने सरकारी मशीनरी का चुनाव में गलत प्रयोग किया है और कोर्ट ने उनको सजा सुनाई.

कोर्ट के फैसले के बाद विपक्ष सड़कों पर उतर आया और लगातार इंदिरा से इस्तीफे की मांग कर रहा था. जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में विपक्ष के आगे इंदिरा सरकार कमजोर पड़ती जा रही थी और फिर उन्होंने देश में अपातकाल की घोषणा कर दी. 25 जून, 1975 से लेकर 21 मार्च, 1977 तक भारत में इमरजेंसी लगी रही. इस दौरान विपक्ष के कई नोताओं को जबरन जेल में डाल दिया गया. कई लोगों की जबरदस्ती नसबंदी कराई गई. सरकार के क्रूर व्यवहार से लोगों में गुस्सा भर आया था. फिर अचानक 23 जनवरी, 1977 को इंदिरा गांधी ने एलान कर दिया कि देश में चुनाव होंगे. 16 से 19 मार्च तक चुनाव हुए. 20 मार्च से काउंटिंग शुरू हुई और 22 मार्च तक लगभग सारे नतीजे आ गए.

नतीजा यह रहा कि अपातकाल के फैसले ने कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया और उसे मात्र 153 सीटें मिली थी. वहीं विपक्ष जो एकजुट होकर भारतीय लोक दल के सिंबल पर चुनाव लड़ा था उसे 295 सीटों पर जीत मिली. इस गठबंधन के नेता मोरारजी देसाई ने सूरत से चुनाव जीता था जबकि इंदिरा और संजय गांधी अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में हार गए थे. इसके बाद देश में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी.

‘लाइफलाइन’ बना कर्नाटक उपचुनाव और इंदिरा ने सत्ता में की वापसी

1977 में अापातकाल के बाद अपने ही गढ़ रायबरेली में चुनाव हार चुकीं इंदिरा के लिए सत्ता की वापसी आसान नहीं थी. उनके लिए ‘लाइफलाइन’ बना कर्नाटक उपचुनाव जिसके जरिए उन्होंने सत्ता में वापसी का रास्ता बनाया. चिकमंगलूर जो कर्नाटक की घाटियों में स्थित एक छोटा सा शहर है वहां से इंदिरा उपचुनाव लड़ीं. उनका मानना था कि अापातकाल का जितना असर नॉर्थ इंडिया में पड़ा उतना साउथ में नहीं पड़ा. यही कारण था कि इंदिरा ने चिकमंगलूर से चुनाव लड़ने का फैसला किया. दरअसल उस समय वहां से सांसद रहे डी. बी. चन्द्रे गाव्डा ने इंदिरा के कहने पर अपनी सीट खाली कर दी. सीट खाली होते ही चिकमंगलूर में उपचुनाव की स्थिति बन गई, जिसमें कांग्रेस से ख़ुद इंदिरा गांधी और विपक्ष से वीरेंद्र पाटिल खड़े हुए थे. कांग्रेस ने जोरदार प्रचार किया और फिर 'एक शेरनी सौ लंगूर, चिकमंगलूर – चिकमंगलूर'. नारे के साथ इंदिरा यह चुनाव जीत गईं. चौतरफा आलोचनाओं से घिरी इंदिरा ने इस उपचुनाव में विरोधी प्रत्याशी को लगभग 70 हजार वोटों से मात दी. इसके बाद इंदिरा का जो राजनीतिक सफर खत्म होने के कगार पर था वह एक बार फिर शुरू हो गया.

दोबारा केंद्र की सत्ता में आई इंदिरा

1977 का चुनाव जीतने वाली जनता पार्टी की सरकार में अंदरूनी झगड़े दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे थे. दरअसल जनता पार्टी में तीन धड़े थे. पहला, मोरारजी देसाई का. दूसरा, चौधरी चरण सिंह और राज नारायण का और तीसरा, बाबू जगजीवन राम और जन संघ का. ये तीनों धड़े आपस में ही लड़-भिड़ रहे थे. नौबत यहां तक आ पहुंची कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने गृह मंत्री चौधरी चरण सिंह और उनके ‘हनुमान’ कहे जाने वाले राज नारायण (स्वास्थ्य मंत्री) को मंत्रिमंडल से निकालकर ख़ुद के पैर पर कुल्हाड़ी मार ली.

इसके बाद जनता पार्टी में विरोध खुलकर सामने आ गया और मोरारजी देसाई की सरकार अल्पमत में आ गई और 15 जुलाई, 1979 को मोरारजी देसाई को इस्तीफा देना पड़ा. इसके ठीक 13 दिन बाद 28 जुलाई 1979 में चरण सिंह ने इंदिरा गांधी के सहयोग से अपनी सरकार बना ली. कांग्रेस की बैसाखी पर टिकी यह सरकार भी कुछ ही महीनों में गिर गई और फिर चुनाव जीतकर इंदिरा दोबारा सत्ता में आ गईं.

1980 में फिर आम चुनाव हुए और इस चुनाव में कांग्रेस सत्ता वापसी की राह देख रही थी. लेकिन लोग अपातकाल को भूले नहीं थे. लेकिन जो चीज कांग्रेस के लिए फायदेमंद रही वह थी जनता पार्टी में हुई आंतरिक कलह. देश की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गयी थी, मुद्रास्फीति की दर काबू से बाहर जा रही थी, हड़तालों का दौर फिर शुरू हो गया था, वेतन वृद्धि को लेकर लोग सड़कों पर थे. इस बार कांग्रेस ने लोगों से स्थाई सरकार देने की बात कही. नसबंदी के लिए मुसलमानों से इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी ने माफी भी मांगी.

इन वादों के साथ कांग्रेस ने एक बार फिर जनता के दिल में जगह बनाई और 1980 के आम चुनाव में उसे 353 सीटें मिली और एक बार फिर इंदिरा गांधी देश की सर्वोच्च नेता बन गई थीं.

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Yamuna Water Project: 32 साल का इंतजार खत्म! यमुना का पानी पहुंचेगा राजस्थान, शेखावाटी समेत जल संकट वाले इलाकों को बड़ी राहत
32 साल का इंतजार खत्म! यमुना का पानी पहुंचेगा राजस्थान, शेखावाटी समेत जल संकट वाले इलाकों को बड़ी राहत
Jaipur Spy Case: जयपुर की 'बबीता' कैसे बनी 'खदीजा'... पाकिस्तान जाने की थी तैयारी, खुलासों ने ATS को भी चौंकाया
जयपुर की 'बबीता' कैसे बनी 'खदीजा'... पाकिस्तान जाने की थी तैयारी, खुलासों ने ATS को भी चौंकाया
Explained: क्या 'परफेक्ट मर्डर कॉन्सेप्ट' खत्म हुआ? 2 हफ्ते में अलग-अलग जगह 3 बड़े जुर्म, लेकिन 15 घंटे में पकड़ाए सभी आरोपी!
क्या 'परफेक्ट मर्डर कॉन्सेप्ट' खत्म? 2 हफ्ते में 3 बड़े जुर्म, कैसे 15 घंटे में धराए सभी आरोपी
Puri Rath Yatra 2026: होटल बुकिंग के नाम पर बड़ा फ्रॉड, 46 फर्जी वेबसाइटें ब्लॉक, श्रद्धालुओं के लिए पुलिस का अलर्ट
होटल बुकिंग के नाम पर बड़ा फ्रॉड, 46 फर्जी वेबसाइटें ब्लॉक, श्रद्धालुओं के लिए पुलिस का अलर्ट

वीडियोज

Weather Alert: दिल्ली बना 50°C का तंदूर! IMD की खतरनाक वार्निंग ABPLIVE
bBollywood News: 'वाराणसी' को लेकर चर्चाएं तेज, एक बार फिर भारतीय सिनेमा को ग्लोबल लेवल पर ले जाने की तैयारी! (29.06.26)
YRKKH:😱Armaan को अचानक हुई भूलने की बीमारी! शादी की खुशियों में पड़ा भंग #sbs
19 साल बाद Emraan Hashmi की धमाकेदार वापसी! Awarapan 2 Teaser ने बढ़ाई फैंस का एक्साइटमेंट
Ketan Murder Case: Google Search से परिवार के खुलासों तक, इनसाइड स्टोरी कर देगी हैरान ! ABPLIVE

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
कोलंबो की भारत-पाकिस्तान सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ? विदेश मंत्रालय ने दिया ये हैरान करने वाला जवाब
कोलंबो की भारत-पाकिस्तान सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ? विदेश मंत्रालय ने दिया ये हैरान करने वाला जवाब
PM मोदी ने ईद अल- अदहा पर ईरानी सुप्रीम लीडर को दी मुबारकबाद, अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई ने जताया आभार, जानें क्या कहा?
PM मोदी ने ईद पर ईरानी सुप्रीम लीडर को दी बधाई, अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई ने जताया आभार, जानें क्या कहा?
अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में गैंगवार, कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या
अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में गैंगवार, कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या
तय हो गई काव्या मारन की शादी! कौन है दुल्हा, कब और कहां होंगे फंक्शन? जानिए A टू Z डिटेल 
तय हो गई काव्या मारन की शादी! कौन है दुल्हा, कब और कहां होंगे फंक्शन? जानिए A टू Z डिटेल 
Welcome To The Jungle BO Day 3 Worldwide: 'वेलकम टू द जंगल' ने दुनियाभर में 3 दिनों में कूटे खूब नोट, 6 करोड़ और कमाते ही बना देगी ये रिकॉर्ड
वेलकम टू द जंगल' का दुनियाभर में तांडव, 3 दिनों में कर डाली गजब कमाई
Explained: क्या 'परफेक्ट मर्डर कॉन्सेप्ट' खत्म हुआ? 2 हफ्ते में अलग-अलग जगह 3 बड़े जुर्म, लेकिन 15 घंटे में पकड़ाए सभी आरोपी!
क्या 'परफेक्ट मर्डर कॉन्सेप्ट' खत्म? 2 हफ्ते में 3 बड़े जुर्म, कैसे 15 घंटे में धराए सभी आरोपी
Tamil Nadu Politics:'5 साल तो दूर...' विजय सरकार पर स्टालिन का सबसे बड़ा हमला, बोले- 3 से 6 महीने में हो सकता है खेल खत्म!
'5 साल तो दूर...' विजय सरकार पर स्टालिन का सबसे बड़ा हमला, बोले- 3 से 6 महीने में हो सकता है खेल खत्म!
पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण पर बड़ा बदलाव, विधानसभा से पास हुए दो अहम बिल
पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण पर बड़ा बदलाव, विधानसभा से पास हुए दो अहम बिल
Embed widget