चीन के सारे जहाजों पर नजर, अमेरिकी रिसर्च वेसल ने नहीं की जासूसी: भारतीय नौसेना के वाइस एडमिरल
भारतीय नौसेना के वाइस चीफ ने शुक्रवार को बताया कि जितने भी जहाज हिंद महासागर में दाखिल होते हैं और जब तक निकल नहीं जाते हैं, इंडियन नेवी पूरी तरह मॉनिटर करती है.

चीन के साथ भले ही राजनयिक संबंध एक बार फिर से पटरी पर लौट रहे हैं, लेकिन हिंद महासागर में भारतीय नौसेना पूरी तरह अलर्ट पर है और चीनी नौसेना के सभी जंगी जहाज और रिसर्च वेसल पर पैनी नजर रखे हुए है. साथ ही नौसेना ने अगले साल फरवरी में होने वाली इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) आयोजन में चीन के निमंत्रण को लेकर कोई फैसला नहीं किया है.
राजधानी दिल्ली में शुक्रवार (31 अक्टूबर, 2025) को IFR की कर्टन रेजर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भारतीय नौसेना के वाइस चीफ (सह-प्रमुख) वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन ने साफ किया कि जितने भी जहाज हिंद महासागर में दाखिल होते हैं और जब तक निकल नहीं जाते हैं, इंडियन नेवी पूरी तरह मॉनिटर करती है.
चीन की PLA-नेवी की जासूसी पर बोले वाइस चीफ
इस सवाल के जवाब में कि भारत के मिसाइल टेस्ट की जासूसी करने के लिए चीन की PLA-नेवी के टोही जहाज हिंद महासागर में आते हैं, एडमिरल वात्सायन ने कहा कि हम पूरी तरह इन घटनाओं से वाकिफ हैं और एक्स्ट्रा क्षेत्रीय शक्तियों के जहाज पर नजर रहती है.
वाइस एडमिरल ने हालांकि, इसी महीने अमेरिका के एक रिसर्च वेसल के मालदीव में आने की खबर को चिंता का विषय नहीं बताया. प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद भारतीय नौसेना के डीजी (ऑपरेशन्स) वाइस एडमिरल एन प्रमोद ने बताया कि अमेरिकी जहाज, स्पेस मॉनिटरिंग के लिए हिंद महासागर में दाखिल हुआ था और भारत की मिसाइल टेस्ट से कोई लेना-देना नहीं था.
चीन के साथ अमेरिका की भी भारत पर नजर
दरअसल, इसी महीने के शुरुआत में भारत ने एक लंबी दूरी की मिसाइल टेस्ट के लिए नोटम (नोटिस टू एयरमैन) जारी किया था. इस मिसाइल टेस्ट की दूरी को एक हफ्ते में तीन बार बढ़ाया गया था, लेकिन उसी दौरान चीन और अमेरिका के रिसर्च वेसल हिंद महासागर में पहुंच गए. ऐसे में कयास लगाए जाने लगे थे कि चीन के बाद अब क्या अमेरिका भी भारत के मिसाइलों की जासूसी करने लगा है. भारतीय नौसेना ने इन सभी कयासों पर विराम लगा दिया है.
वाइस चीफ ने ये भी बताया कि अगले महीने (नवंबर) के आखिरी हफ्ते में भारतीय नौसेना, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की नौसेना के साथ साझा एक्सरसाइज मालाबार में हिस्सा लेने जा रही है. ये एक्सरसाइज इस साल अमेरिका के जिम्मेदारी-क्षेत्र गुयाम (प्रशांत महासागर) में होने जा रही है.
#WATCH | Delhi: Navy Vice Chief Vice Admiral Sanjay Vatsayan says, "There is a continuous presence of extra-regional powers in the Indian Ocean region due to the ongoing situation. It has always been that and it's only increasing. At any given point of time, we have a minimum of… pic.twitter.com/7LqpMN3eou
— ANI (@ANI) October 31, 2025
अंतरराष्ट्रीय मेरीटाइम आयोजन
वाइस एडमिरल वात्स्यायन ने बताया कि IFR में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भारतीय नौसेना और मित्र-देशों के जंगी बेड़ों की समीक्षा करेंगी. विशाखापट्टनम से सटी बंगाल की खाड़ी में IFR को 18 फरवरी 2026 को आयोजित किया जा रहा है. दस साल में एक बार होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय मेरीटाइम आयोजन में रूस और अमेरिका सहित कुल 55 देशों की नौसेनाएं हिस्सा ले रही हैं.
इस सवाल पर कि क्या चीन की नौसेना को भी इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया गया है, वाइस एडमिरल ने कोई साफ-साफ जवाब नहीं दिया. ऐसे में इस बात की संभावना है कि चीनी नौसेना को IFR के लिए निमंत्रण नहीं भेजा गया है.
क्या IFR के लिए चीनी नौसेना को भी मिला निमंत्रण?
खास बात है कि साल 2016 में हुए IFR में चीनी नौसेना को निमंत्रण भेजा गया था और PLA-नेवी के अधिकारियों ने शिरकत भी की थी, लेकिन पिछले दस सालों में डोकलाम विवाद और गलवान घाटी की झड़प के बाद से चीन के साथ सैन्य संबंधों में जबरदस्त खटास आ गई है. पाकिस्तान को भारत के खिलाफ उकसाने के कारण भी संबंध सामान्य नहीं हैं.
पूर्वी लद्दाख से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन की सेनाएं तनाव खत्म करने के लिए तैयार हो गई हैं. इस बार पिछले वर्ष (2024) में दोनों देशों की सेनाओं ने डिसएंगेजमेंट करार भी किया था और विवादित इलाकों से सैनिकों को पीछे भी हटा लिया था. पिछले हफ्ते ही दोनों देशों के कोर कमांडर्स ने विवाद खत्म करने के लिए 24वीं बार बैठक भी की थी, लेकिन हिंद महासागर में भारतीय नौसेना फूंक-फूंककर कदम रख रही है.
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Source: IOCL






















