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INSAS की जगह लेगा अत्याधुनिक AK-203, एक मिनट में दागेगा 600 गोलियां
एके-203 रायफल का उपयोग अर्धसैनिक बल और राज्य पुलिस के जवान भी कर सकेंगे.एके-203 इंसास रायफल की अपेक्षा बहुत ज्यादा हल्की और छोटी होगी.

भारत और रूस ने अत्याधुनिक एके-203 रायफल भारत में बनाने के लिये एक बड़े समझौते को अंतिम मंजूरी दे दी है। एके-203 रायफल, एके-47 रायफल का नवीनतम और सर्वाधिक उन्नत प्रारूप है. यह ‘इंडियान स्मॉल ऑर्म्स सिस्टम’ (इनसास) रायफल की जगह लेगा.
भारतीय थल सेना को लगभग 770,000 एके-203 रायफलों की जरूरत है, जिनमें से एक लाख का आयात किया जाएगा और शेष का निर्माण भारत में किया जाएगा. इन रायफलों को भारत में संयुक्त उद्यम भारत-रूस रायफल प्राइवेट लिमिटेड (आईआरआरपीएल) के तहत बनाया जाएगा. खबर के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कोरवा आयुध फैक्टरी में 7.62 गुणा 39 मिमी के इस रूसी हथियार का उत्पादन किया जाएगा, जिसका उदघाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल किया था.
खबर के मुताबिक प्रति रायफल करीब 1,100 डॉलर की लागत आने की उम्मीद है, जिसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण लागत और विनिर्माण इकाई की स्थापना भी शामिल है. इनसास रायफलों का इस्तेमाल 1996 से किया जा रहा है। उसमें जाम होने, हिमालय पर्वत पर अधिक ऊंचे स्थानों पर मैगजीन में समस्या आने जैसी परेशानियां पेश आ रही हैं.
जाने एके-203 की खूबियां
अत्याधुनिक एके-203 रायफल वजन में इंसास से हल्का होगा. इंसास का वजन जहां 4.25 किलो हैं वही एके-203 का वजन चार किलो है. इंसास में जहां 20 गोलियों का मैगजीन होता है वहीं रूसी रायफल में 30 बुलेट का मैगजीन होगा. ट्रिगर पकड़ने और दबाने के मामले में एके-203 कहीं बेहतर है. यह चार सौ मीटर के दायरे पर सौ फीसदी वार करेगी. इसकी एक्युरेसी भी ज्यादा है. इस राइफल में पिकेटिनी रेल (राइफल के ऊपर लगा एक प्लेटफॉर्म, जिसमें नाइट विजन डिवाइस या दूर तक देखने के लिए डिवाइस लगाई जा सकती है) भी है.
इस रायफल से एक मिनट में छह सौ गोलियां मारी जा सकेंगी. मतलब एक सेकंड में दस गोलियां निकलेंगी. इसे ऑटोमेटिक और सेमी ऑटोमेटिक दोनों तरह से प्रयोग किया जा सकेगा. हालांकि इंसास रायफल प्रति मिनट 650 गोलियां दागती है लेकिन सटीक निशाने के मामले में एके-203 बेहतरीन है.
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Source: IOCL

























