India-Pakistan Ceasefire: सीजफायर और अमेरिका के बयान पर भड़के पवन खेड़ा, बोले- 'पीएम मोदी ने तो ये नहीं बताया...'
भारत-पाकिस्तान सीजफायर की घोषणा पहले डोनाल्ड ट्रंप ने की, जिस पर विपक्ष ने पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं. BSF जवान की रिहाई और कश्मीर पर मध्यस्थता को लेकर भी सरकार को घेरा है.

India-Pakistan Ceasefire: भारत-पाकिस्तान के बीच 4 दिन तक चले सैन्य टकराव के बाद सीजफायर हो गया है. इसकी घोषणा सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए की. इसके बाद भारत और पाकिस्तान के सेना अधिकारियों ने जानकारी साझा की. विपक्ष लगातार बीजेपी से इसको लेकर सवाल कर रहा है. इस बीच कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सीजफायर के बारे में पीएम मोदी ने नहीं बताया, जबकि इसकी जानकारी हमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दी. इस पर पवन खेड़ा ने डोनाल्ड ट्रंप को टैग करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा कि हमारे BSF जवान पूर्णम साहू को पाकिस्तानी कैद से कब रिहा किया जाएगा?
पंजाब के फिरोजपुर के पास बीते महीने 23 अप्रैल को पाकिस्तान रेंजर्स ने बीएसएफ के जवान को हिरासत में ले लिय था, जिसने अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर ली थी. बता दें कि भारत-पाकिस्तान सीमा की रक्षा करने वाला बीएसएफ प्रमुख बल है, जो एलओसी के कुछ हिस्सों सहित), पंजाब, राजस्थान और गुजरात राज्यों में 3,323 किलोमीटर लंबी बॉर्डर की रक्षा करता है.
When will our BSF jawaan Purnam Sahu be released from Pakistani captivity @realDonaldTrump ?
— Pawan Khera 🇮🇳 (@Pawankhera) May 12, 2025
कश्मीर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता पर सवाल
हाल ही में सीजफायर को लेकर कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा कि क्या उसने कश्मीर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार कर ली है? कांग्रेस ने इस मुद्दे का ‘‘अंतरराष्ट्रीयकरण’’ करने के प्रयास की भी आलोचना की. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AIEC) मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच ‘‘संघर्ष विराम’’ की घोषणा करने का अमेरिका का कदम ‘‘अभूतपूर्व’’ है और इससे कई सवाल उठते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को मौजूदा हालात में इन मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक और सर्वदलीय बैठक तथा संसद का विशेष सत्र बुलाने की विपक्ष की मांग को स्वीकार करना चाहिए.
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