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40 साल बाद जर्मनी से पनडुब्बियां खरीदेगा भारत, डील महज 4 कदम दूर; पाकिस्तान-चीन की बढ़ जाएगी टेंशन!

INDIA Germany Defence Deal: नौसेना के प्रोजेक्ट 75-आई के तहत, भारत और जर्मनी, छह स्टेल्थ पनडुब्बी बनाने की तैयारी कर रहे हैं. फ्रेडरिक मर्ज के मिलने के बाद पीएम मोदी ने रक्षा उद्योग को लेकर घोषणा की.

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों में नया आयाम जुड़ने जा रहा है. क्योंकि दोनों देशों के बीच भारतीय नौसेना के लिए साझा स्टील्थ पनडुब्बी बनाने को लेकर अहम बातचीत हुई है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मर्ज से मुलाकात के दौरान, भारत और जर्मनी के बीच साझा रक्षा उद्योग को लेकर अहम घोषणा की.

नौसेना के लिए छह सबमरीन निर्माण पर चल रही चर्चा

पीएम मोदी और चांसलर मर्ज के बीच अहमदाबाद में हुई वार्ता के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि नौसेना के लिए छह (06) पनडुब्बियों के निर्माण पर सकारात्मक चर्चा चल रही है और पॉजिटिव आउटकम की उम्मीद है. विदेश सचिव के मुताबिक, इस तरह के सौदों में टेक्निकल, फाइनेंशियल और कमर्शियल चर्चा शामिल रहती हैं, जो फिलहाल चल रही हैं. ये चर्चा पूरी होने के बाद रक्षा मंत्रालय इस पर जानकारी साझा कर सकता है.

नौसेना के प्रोजेक्ट 75 (आई) के तहत, भारत और जर्मनी, छह (06) स्टेल्थ पनडुब्बी बनाने की तैयारी कर रहे हैं. इसके लिए मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड (एमडीएल) और जर्मनी की थाइसेनक्रुप कंपनी (टीकेएमसी) के बीच सामरिक करार हो चुका है. इस प्रोजेक्ट की कुल कीमत करीब 08 बिलियन डॉलर यानी 72 हजार करोड़ है. इन पनडुब्बियों को मेक इन इंडिया के तहत एमडीएल में निर्माण करने की तैयारी है.  

एमडीएल ने जर्मनी की कंपनी से पिछले साल किया करार

रक्षा मंत्रालय ने एयर इंडिपेंडेंट प्रोपेलेंट (एआईपी) तकनीक से लैस छह खास पनडुब्बियों के लिए वर्ष 2017 में प्रोजेक्ट पी75 (इंडिया) की घोषणा की थी. इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने एमडीएल और एल एंड टी कंपनी को किसी विदेशी ओईएम यानी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरर के साथ करार करने की छूट दी थी. ऐसे में एमडीएल ने जर्मनी की थाइसेनक्रुप कंपनी से प्रोजेक्ट 75 (आई) के लिए पिछले वर्ष सितंबर में करार किया था.

एलएंडटी कंपनी ने स्पेन की नवांतिया से हाथ मिलाया था, लेकिन नवांतिया और एलएंडटी कंपनी, एआईपी तकनीक से लैस पनडुब्बियों को बनाने में नाकाम साबित हुई थी. ऐसे में रक्षा मंत्रालय ने एलएंडटी और नवांतिया ग्रुप को प्रोजेक्ट से बाहर करने का फैसला लिया था.

एआईपी तकनीक से लैस सबमरीन की खासियत

एआईपी तकनीक से लैस पनडुब्बियां, लंबे समय तक (करीब दो महीने तक) समंदर के नीचे रहकर ओपरेट कर सकती हैं, जबकि पारंपरिक (डीजल) पनडुब्बियों को समय-समय पर समंदर की सतह पर आना पड़ता है. सतह पर आने से पनडुब्बियां दुश्मन की नजर में आ जाती है, लेकिन स्टील्थ (एआईपी) तकनीक से पनडुब्बी के बारे में दुश्मन को कानों-कान खबर नहीं लगती. 

उल्लेखनीय है कि भारत और जर्मनी के बीच करीब 40 वर्ष बाद कोई बड़ा रक्षा सौदा होने जा रहा है. वर्ष 1986 में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार के दौरान भी दोनों देशों ने एचडीडब्लू सबमरीन (शिशुमार क्लास पनडुब्बियों) की डील की थी, लेकिन घूस और दलाली के चलते इस सौदे की छह में से महज चार पनडुब्बियां नौसेना को मिल पाई थी. इनमें से 02 का निर्माण जर्मनी में हुआ था और बाकी 02 का एमडीएल में.

एमडीएल को मिलेगा दूसरा सबसे बड़ा प्रोजेक्ट

स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बी के बाद एमडीएल को दूसरा बड़ा सबमरीन प्रोजेक्ट मिलने जा रहा है. फ्रांस की मदद से एमडीएल ने छह स्कॉर्पीन (कलवरी) क्लास पनडुब्बी बनाकर भारतीय नौसेना को सौंप दी है. खास बात है कि भारतीय नौसेना की छह कलवरी (स्कोर्पीन) क्लास पनडुब्बियों को भी एआईपी तकनीक से लैस किया जा रहा है. पिछले साल दिसंबर में डीआरडीओ द्वारा तैयार की गई एआईपी तकनीक को एलएंडटी कंपनी को ट्रांसफर (टीओटी) किया गया था. एलएंडटी के हजीरा (गुजरात) स्थित शिपयार्ड में इस एआईपी तकनीक को तैयार किया जा रहा है.

नीरज राजपूत देश के जाने-माने डिफेंस-जर्नलिस्ट और वॉर-लेखक हैं. पत्रकारिता में करीब ढाई दशक का अनुभव रखते हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया तीनों में गहरी पकड़ है.

वर्तमान में वे ABP नेटवर्क से जुड़े हैं, जहाँ युद्ध, रक्षा, नेशनल सिक्योरिटी और जियो-पॉलिटिक्स से संबंधित विषयों को कवर करते हैं. ABP लाइव पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘गेम-चेंजर’ के प्रस्तुतकर्ता भी हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने पहली हिंदी पुस्तक "ऑपरेशन Z लाइव" लिखी, जो बेस्टसेलर सूची में भी शामिल हुई और पाठकों द्वारा खूब सराही गई.

रिपोर्टिंग का दायरा
- दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से लेकर आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और चीन सीमा पर तिब्बत के पठार तक
- पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर-स्ट्राइक से लेकर पनडुब्बी के जरिए समुद्र के भीतर तक
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके एक्सक्लूसिव खुलासे और सटीक विश्लेषणों की व्यापक सराहना हुई
- यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में मारियुपोल, डोनेत्स्क और लुहांस्क जैसे एक्टिव वॉर-जोन से रिपोर्टिंग. इसी अनुभव पर आधारित उनकी पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई
- दुनिया की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक उत्तर-दक्षिण कोरिया की DMZ
- ⁠अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक JBLM, और शीत युद्ध के दौरान "गैर-मौजूद" माने जाने वाले रूसी सैन्य अड्डों से भी ग्राउंड रिपोर्टिंग. 
- ⁠वे उन चुनिंदा रक्षा जुड़े पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने भारत के पहले स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर LCH-प्रचंड के कॉकपिट में उड़ान भरी है. इसके अलावा फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण सुविधा से भी उन्होंने विशेष रिपोर्टिंग की.

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'Defence Correspondent Course' के Alumni हैं.

पूर्व कार्य अनुभव
- STAR NEWS में लगभग 6 वर्षों तक चीफ रिपोर्टर (क्राइम) के तौर पर कार्य किया और लोकप्रिय क्राइम शो 'सनसनी' से जुड़े रहे
- पत्रकारिता की शुरुआत अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से की
- इसके बाद B.A.G. Films के साथ जुड़कर STAR NEWS के लिए क्राइम शो बनाए
- SAHARA TV में भी लगभग 2 वर्षों तक कार्यरत रहे

रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर उनकी पकड़, ग्राउंड-जीरो रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण उन्हें देश के सबसे भरोसेमंद डिफेंस जर्नलिस्ट्स में स्थापित करती है.

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