यहां जानें, कैसे प्रेग्नेंट होती है मोरनी और मोर क्यों बना राष्ट्रीय पक्षी?

नई दिल्ली: राजस्थान हाईकोर्ट के जज महेश चंद्र शर्मा के मोर को लेकर दिए बयान के बाद से सोशल मीडिया पर मोर-मोरनी के संबंधों को लेकर बहस छिड़ गई है. राजस्थान हाई कोर्ट के जज महेश शर्मा ने कल अपने कार्यक्राल के आखिरी दिन एक अहम मसले पर सुनाई के दौरान कहा कि मोर एक ब्रह्मचारी पक्षी है, इसीलिए उसे राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया है. मोरनी मोर के आंसू को पीकर गर्भ धारण करती है. बह्मचारी होने की वजह से मोर का राष्ट्रीय पक्षी होना ये बात लोगों के गले नहीं उतर रही है.
क्या ये मुमकिन है कि आंसू पीकर मोरनी गर्भवती हो जाए ? आपको बता दें कि मोर और मोरनी भी वैसे ही बच्चे पैदा करते हैं जैसे बाकी पशु-पक्षी करते हैं. आपने मोर को पंख फैलाकर नाचते हुए देखा होगा दरअसल वो मोरनी को मोहित करते हैं. मोरनी मोर के रंग-बिरंगे पंखों से भी काफी आकर्षित होती है और जब उसे मोरनी की सहमति मिल जाती है तब मोर और मोरनी संबंध बनाते हैं. इसके बाद जैसे इंसान और पशु गर्भवती होते हैं वैसे ही मोरनी भी गर्भवती होती है.
मोर राष्ट्रीय पक्षी कैसे बना ? राष्टीय पक्षी के लिए मोर का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि पहले ये भारत में ही पाया जाता था. राष्ट्रीय पक्षी के चुनाव की लिस्ट में मोर के साथ सारस, हंस के नाम थे. 1960 में राष्ट्रीय पक्षी चुनने के लिए बैठक हुई जिसमें गाइडलाइंस तय की गईं थीं. इसके मुताबिक वो पक्षी चुना जाना था जो देश के हर हिस्से में मिले, आम लोग जानते हों और भारतीय संस्कृति का हिस्सा हो. इन सब बातों पर मोर ही खरा उतरा. 26 जनवरी 1963 को मोर राष्ट्रीय पक्षी घोषित कर दिया गया.
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