चुनाव बाद कैबिनेट की पहले बैठक में UCC पर असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा ने लिया ये बड़ा फैसला
UCC in Assam: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उत्तराखंड, गोवा और गुजरात पहले ही यूसीसी को लागू कर चुके हैं, लेकिन उनकी सरकार ने इसे असम की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया है.

- असम कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने को मंजूरी दी।
- आदिवासी समुदाय को UCC के दायरे से बाहर रखा जाएगा।
- UCC विधेयक 26 मई को नई विधानसभा में पेश होगा।
- कैबिनेट ने 2 लाख नौकरियां सृजित करने की योजना को मंजूरी दी।
असम में फिर से एक बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनाने के बाद मंत्रिमंडल की पहली बैठक में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार (13 मई, 2026) को समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू करने की मंजूरी दे दी है.
हालांकि, राज्य के आदिवासियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि समान नागरिक संहिता विधेयक को दो हफ्ते बाद 26 मई को नई विधानसभा में पेश किया जाएगा.
UCC को लेकर क्या बोले सीएम हिमंत बिस्वा सरमा?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार (13 मई, 2026) को नई सरकार के पहली कैबिनेट मीटिंग के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘यह कैबिनेट की पहली बैठक में लिया गया एक महत्वपूर्ण फैसला है और यह चुनावों के दौरान किए गए हमारे वादे के अनुसार है.’ उन्होंने कहा, ‘उत्तराखंड, गोवा और गुजरात पहले ही यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लागू कर चुके हैं, लेकिन उनकी सरकार ने इसे असम की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया है.’
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उन्होंने कहा, ‘हमने आदिवासी जनसंख्या को यूसीसी के दायरे से पूरी तरह से बाहर रखा है. असम के लोगों की तरफ से पालन किए जाने वाले सभी रीति-रिवाज, परंपराएं और प्रथाओं को भी यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है. समान नागरिक संहिता उत्तराधिकार, शादी, लिव-इन रिलेशन और शादी और तलाक के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन से संबंधित मामलों को रेगुलेट करेगा.’
पहली कैबिनेट मीटिंग में हिमंत सरकार ने और क्या लिए फैसले?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरकार की अध्यक्षता में हुई असम सरकार की पहली कैबिनेट मीटिंग में यह भी फैसला किया कि भाजपा का चुनावी घोषणापत्र अगले पांच सालों तक असम सरकार के शासन का मार्गदर्शक सिद्धांत होगा.
वहीं, एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में कैबिनेट ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स के गठन को भी मंजूरी दी गई है, जो अगले पांच सालों में दो लाख नौकरियां पैदा करने के लिए रोडमैप तैयार करेगी. यह कदम भी भाजपा के चुनावी वादे के अनुरूप उठाया गया है.
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