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गलवान हिंसा का एक साल: घटना के बाद इतने फीसदी लोगों ने नहीं खरीदा मेड इन चाइना का एक भी सामान- सर्वे

लोकल सर्कल्स की तरफ से देश के 281 जिलों के करीब 18 हजार लोगों से सर्वे कर यह जानने का प्रयास किया गया है कि पिछले साल भर के दौरान उन्होंने चीन का सामान खरीदा या नहीं.

पिछले साल गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच जो हिंसक झड़प हुई थी, उसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे जबकि कई चीनी सैनिक के मारे गए थे. इस घटना को आज एक साल हो गया. गलवान घाटी की इस हिंसा का जिस क्षेत्र पर सबसे ज्यादा असर हुआ है और वो है दोनों देशों के बीच व्यापार और वाणिज्य.

चीन के आक्रामक रवैये के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए चीन के निर्यात होने वाले कई उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया ताकि घरेलू सामानों के उत्पादों को बढ़ावा दिया जा सके.

गलवान हिंसा के बाद भारत-चीन व्यापार पर कितना असर?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2020 लॉकडाउन के बाद अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए भी आत्मनिर्भर भारत का आह्वान किया था. संयोगवश दोनों का समय करीब-करीब मिलता जुलता था. इसके बाद केन्द्र सरकार ने टिकटॉक, क्लब फैक्ट्री समेत करीब 100 से ज्यादा चीनी कंपनियों के ऐप पर रोक लगा दी.

गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हिंसा के बाद कई भारतीयों ने चीन के उत्पादों का पूरी तरह से बहिष्कार करने का फैसला किया. लोकल सर्कल्स की तरफ से त्योहारों के दौरान नवंबर में सर्वे किया गया था, जिसमें 71 फीसदी भारतीयों उपभोक्ताओं ने कहा था कि उन्होंने चीन का कोई उत्पाद नहीं खरीदा. जबकि कुछ लोगों ने अगर यह स्वीकार किया कि उन्होंने इसे खरीदा तो उसकी वजह उन्होंने कम लागत बताई थी. साल 2020 में चीन के साथ व्यापार में करीब 5.6 फीसदी की गिरावट आई थी और यह 87.6 अमेरिकी डॉलर तक रह गया था. लेकिन, इस साल यानी 2021 के पांच साल के दौरान चीन से आयात में 42 फीसदी का इजाफा हुआ है.

हालांकि, लोकल सर्कल्स के मुताबिक, यह बढ़त खासकर जीवन बचाने वाले उपकरण और मेडिकल ऑक्सीजन उपकरण की भारत में आयात में बढ़ोतरी की वजह से चीन के साथ व्यापार में इजाफा देखने को मिला है. इसकी बड़ी वजह है कि भारत के कोरोना महामारी की गिरफ्त में होने और लॉकडाउन के चलते इन उपकरणों की मांग काफी बढ़ गई थी.   

लोकल सर्कल्स की तरफ से देश के 281 जिलों के करीब 18 हजार लोगों से सर्वे कर यह जानने का प्रयास किया गया है कि पिछले सालभर के दौरान उन्होंने चीन का सामान खरीदा या नहीं. और अगर खरीदा तो उसकी मुख्य क्या वजह रही है.

43% उपभोक्ताओं ने पिछले 12 महीनों के दौरान नहीं खरीदे कोई मेड इन चाइन उत्पाद

हालांकि भारत, चीन के इलैक्ट्रिकल मशीनरी और दवाईयों पर काफी निर्भर है. उसके बावजूद जब सर्वे के दौरान लोगों से यह सवाल किया गया तो 43 फीसदी भारतीयों ने कहा कि उन्होंने चीन में बनी एक भी चीज नहीं खरीदी है. जबकि 34 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्होंने 1-2 प्रोडक्ट्स खरीद हैं तो वहीं 8 फीसदी ने कहा कि 3-5 आइट्म्स खरीदे हैं. 4 फीसदी ऐसे थे जिन्होंने 5-10 मेड इन चाइन प्रोडक्ट्स खरीदे. तो वहीं 3 फीसदी ने 10-15 चाइना के उत्पाद खरीदे. जबकि 1 फीसदी ने कहा कि उसने 20 से ज्यादा चीनी उत्पाद खरीदा है. इसमें 9,052 लोगों से जवाब मांगा गया था.

चीन सामान खरीदने वालों में 60% ने सिर्फ 12 महीने में सिर्फ 1-2 सामान ही खरीदा

सर्वे के दौरान यह पता चला कि जिन लोगों ने पिछले 12 महीने के दौरान मेड इन इंडिया का सामान खरीदा है उसमें से 60 फीसदी ऐसे लोग हैं, जिन्होंने सिर्फ 1-2 सामान ही खरीदा. 14 फीसदी ने कहा कि उन्होंने 3-5 प्रोडक्ट्स, 7 फीसदी ने कहा कि 5-10 प्रोडक्ट्स और 2 फीसदी ने 10-15 प्रोडक्ट्स खऱीदे.

कम कीमत के चलते खरीदा चीनी उत्पाद

सर्वे के मुताबिक, जिन लोगों ने चीन के प्रोडक्ट्स खरीदे उनमें से 70 फीसदी ने बताया कि वैल्यू फॉर मनी है जबकि 40 फीसदी ने यूनीकनेस वजह बताई तो वहीं 38 फीसदी लोगों ने कहा कि बेटर क्वालिटी है.

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